चुनाव आयोग विवाद से सरकार ने झाड़ा पल्ला

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद में चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की प्रतीकात्मक तस्वीर
ज्ञानेश कुमार विवाद के बीच सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज।

कांग्रेस बनाम भाजपा के बीच चलेगी सियासी जंग

सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर मचे सियासी विवाद से सरकार ने पल्ला झाड़ लिया है। इसको लेकर सरकार की तरफ से कोई भी मंत्री पक्ष या विपक्ष में बोलने से गुरेज करेंगे। अलबत्ता कांग्रेस और विपक्ष के आरोपों पर भाजपा के पदाधिकारी और नेता आक्रामक रूप से ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के समर्थन में खड़े रहेंगे।

ज्ञानेश कुमार विवाद पर सरकारी सूत्रों ने क्या कहा?

सरकारी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि, चुनाव आयोग खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जो सियासी विवाद मचा है उसे सिर्फ राजनीतिक स्तर (पार्टी) पर निपटा जाए। सरकार के मंत्री इस विवाद को लेकर नहीं बोलेंगे। खासकर भाजपा कोटे के मंत्रियों को स्पष्ट रूप से हिदायत है कि वह इस मसले पर टीका-टिप्पणी से बचे। भले बयान या टिप्पणी ज्ञानेश कुमार के समर्थन में हो। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि, जब से यह विवाद आया है किसी भी मंत्री ने इस पर कुछ भी नहीं बोला है।

चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों का जवाब भाजपा कैसे देगी?

यह मामला विशुद्ध रूप से सियासी है। भाजपा और कांग्रेस या विपक्ष की तरफ से इसे उठाया जा रहा है। जब उनसे पूछा गया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इसे उठा रहे हैं तो फिर मंत्री क्यों बोलने से गुरेज कर रहे हैं? मंत्री ने कहा कि सियासी मसले पार्टी के बीच के होते हैं और पार्टी स्तर पर ही उसका उत्तर दिया जाता है। सरकार या इसके मंत्री की भूमिका तब होती है जब मामला संसद में उठता है और सरकार से सवाल पूछे जाते हैं। यदि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में उठाएगी और सरकार से जबाव चाहेगी उस समय यह देखा जाएगा कि क्या किसी मंत्री को इस पर जबाव देने की जरूरत है या नहीं। जरूरत होने पर संसद में सरकार या इसके मंत्री अपनी बात रखेंगे। सरकार के मंत्री को इस मसले पर बोलने से बचने की सलाह क्यों दी गई है? मंत्री ने साफ किया कि मामला एक स्वायत्त संस्था (चुनाव आयोग) से जुड़ा है और मामला अदालत में भी है। ऐसे में सरकार के मंत्री की तरफ से इस विवाद पर बोलना उचित नहीं है।