देश के सबसे खतरनाक हाईवे: 12% हिस्से में 35% सड़क हादसे, AI से होगी सुरक्षा

भारत के खतरनाक राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा और AI निगरानी
राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित हिस्सों की पहचान और सड़क सुरक्षा के लिए AI-based technology का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ये हैं देश के सबसे खतरनाक किलर हाईवे

-कुल हाईवे के महज 12 फीसदी हिस्से में 35 फीसदी दुर्घटना

-सेफ बनाने के लिए एआई का उपयोग

तहलका ब्यूरो, नई दिल्ली।

12 फीसदी हाईवे हिस्से में 35 फीसदी दुर्घटनाएं

राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना में हर साल डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। चौकाने वाला तथ्य यह है कि इन राजमार्गों के सिर्फ 12 फीसदी ऐसा हिस्सा है जहां कुल दुर्घटनों की हिस्सेदारी 35 फीसदी तक है। इन 12 फीसदी हिस्से में पिछले तीन साल में एक लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं हुई है। इसमें 48 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

ब्लैक स्पॉट कम करने की कोशिश

राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट को दूर करने की तमाम कोशिशें हो रही हैं। राजमार्गों पर प्रति सौ किलोमीटर पर चार ब्लैक स्पॉट औसतन हैं। मगर 10 सबसे खतरनाक या कीलर राजमार्गों पर प्रति सौ किलोमीटर 14-18 ब्लॉक स्पॉट हैं।

ये हैं सबसे खतरनाक हाईवे

1-एनएच 44 (दिल्ली-कन्याकुमारी)

2- एनएच 48 (दिल्ली-गुरूग्राम-जयपुर-मुंबई)

3-एनएच 19 (दिल्ली-कोलकाता)

4-एनएच-27 (झांसी-पोरबंदर)

ये चार, कुल दस सबसे खतरनाक हाईवे में सबसे ऊपर हैं। यह आंकड़ा एनएचएआई ने सड़क दुर्घटनाओं के आकलन के आधार पर निकाला है। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि बड़ी तेजी के साथ ब्लैक स्पॉट को दूर किया जा रहा है। सबसे ज्यादा प्राथमिकता सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है। इसके लिए डिजाइन में बदलाव,टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और जागरूकता फैलाया जा रहा है। फिलहाल, सबसे राजमार्गों के सबसे खतरनाक स्ट्रेज को एआई आधारित तकनीक से सेफ किया जा रहा है। इसमें हाई रेज़ोल्यूशन कैमरे के उपयोग के साथ ही अलर्ट सिस्टम जैसे उपाय किए जा रहे हैं। स्पीड की मॉनिटरिंग कैमरों से हो रही है और बार-बार अलर्ट सायरन भी बजाए जा रहे हैं। एक टोल से दूसरे टोल के बीच के हिस्सों में चालकों को रोककर भी उन्हें नसीहत दी जा रही है। स्पीड रिकॉगनिजशन सिस्टम भी हाईवे पर लगाए गए हैं ताकि वाहन चालक वाहन को यह पता चले कि वह किस गति से वाहन चला रहे हैं।