मेरठ में पुलिस हिरासत में मारपीट के आरोप, सपा नेता दिग्विजय भाटी का वीडियो वायरल

मेरठ में पुलिस हिरासत में मारपीट का आरोप लगाने वाले दिग्विजय भाटी
दिग्विजय भाटी ने मेरठ पुलिस पर हिरासत में मारपीट का आरोप लगाया है। पुलिस ने आरोपों से इनकार करते हुए चोटें स्कूटी फिसलने से लगने की बात कही है।

एम. रियाज़ हाशमी | तहलका वेब ब्यूरो | मेरठ

मेरठ में सपा से जुड़े किसान नेता को एसएसपी ने उलटा लटकाकर पीटा, कुर्सी छिनी

दिग्विजय भाटी का वीडियो सामने आने के बाद एडीजी ने सहारनपुर डीआईजी को सौंपी जांच; भाटी बोले- एसएसपी और इंस्पेक्टर ने बंधक बनाकर पीटा, पुलिस का दावा- स्कूटी फिसलने से लगी चोट

यूपी के मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किए गए किसान नेता और सपा से जुड़े दिग्विजय भाटी ने अब पुलिस पर गंभीर मारपीट के आरोप लगाए हैं। भाटी का करीब 4 मिनट 46 सेकेंड का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह दावा कर रहे हैं कि 19 अगस्त को मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने के बाद उन्हें और उनके साथी मोहित जाटव को पुलिस ने बुरी तरह पीटा। मामले ने तूल पकड़ा तो एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर ने जांच सहारनपुर रेंज के डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंप दी।

भाटी ने एसएसपी कार्यालय में मारपीट का आरोप लगाया

भाटी का आरोप है कि वह ललिता गौतम हत्याकांड में जेल भेजे गए प्रदर्शनकारियों के मामले में एसएसपी से मिलने पहुंचे थे। उनके मुताबिक, बातचीत के दौरान एसएसपी ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की और इसके बाद उन्हें कार्यालय के दूसरे हिस्से में ले जाकर पीटा गया। भाटी ने दावा किया कि उनके सिर को कपड़े से ढक दिया गया, पैर रस्सी से बांध दिए गए और कई लोगों ने उनके हाथ, पैर और पीठ पर मारपीट की। उन्होंने यह भी कहा कि आंख पर चोट लगी और उन्हें बार-बार बेहोशी की हालत में पीटा गया।

सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा- मुकदमा दर्ज हो

शुक्रवार को सपा विधायक अतुल प्रधान ने अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइन इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उनके साथ दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव भी मौजूद रहे। अतुल प्रधान ने आरोप लगाया कि दोनों के साथ बर्बरता की गई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

भाटी और मोहित ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे जबरन ऐसा पत्र लिखवाया गया, जिसमें चोटों की वजह स्कूटी से गिरना बताया गया। उन्होंने पुलिस के इस दावे को खारिज किया है।

पुलिस का क्या कहना है?

मेरठ पुलिस की ओर से जारी जानकारी में आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया कि दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव स्कूटी फिसलने से गिर गए थे और चोट लगने की जानकारी उन्होंने खुद दी थी। पुलिस ने दोनों को अपने-अपने जिलों के हिस्ट्रीशीटर बताते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों का भी उल्लेख किया है।

वहीं, आईपीएस अविनाश पांडेय ने भी मारपीट के आरोपों को खारिज किया है और घटना का अलग पक्ष बताया है। अब जांच सहारनपुर डीआईजी के पास है। हालांकि शासन ने इस घटना के बाद उन्हें एसएसपी की पोस्टिंग से हटाकर पुलिस मुख्यालय में अटैच कर दिया है।

ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़ा है पूरा विवाद

मेरठ के टीपीनगर क्षेत्र की बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ललिता गौतम 15 मई को परीक्षा देने घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। 17 मई को रोहटा क्षेत्र के उकसिया गांव में गन्ने के खेत से उसका शव मिला। पुलिस ने जांच के बाद हत्या के मामले में आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर 8 जुलाई को मेरठ कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन हुआ था।

पुलिस ने उस प्रदर्शन के दौरान दिग्विजय भाटी समेत कई लोगों पर कार्रवाई की थी। पुलिस का आरोप था कि भाटी ने प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाई और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने में भूमिका निभाई। अब उसी मामले से जुड़े एक आरोपी के पुलिस पर मारपीट के आरोप ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

विपक्ष हमलावर, कांग्रेस ने कहा- ‘मानवाधिकार ध्वस्त’

दिग्विजय भाटी की पिटाई के आरोप सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया के जरिए योगी सरकार और मेरठ पुलिस पर हमला बोला है। यूपी कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि योगी सरकार में लोकतंत्र और मानवाधिकार ध्वस्त हो चुके हैं।

आम आदमी पार्टी ने भी घटना की निंदा करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि जायज मांगों और अधिकारों के लिए आवाज उठाना अपराध बना दिया गया है।

आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने, दोनों का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण कराने और निष्पक्ष जांच की मांग की।

वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी घटना को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसान के मुंह पर लात मारकर पूरे देश के किसानों को धमकाने का कथित कृत्य माफी लायक नहीं है। यह भाजपा की बौखलाहट है।