तहलका वेब ब्यूरो। नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में एक साथ सात ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी वाले परिसरों में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक केके चंद्राकर का आवास भी शामिल है।
ईडी की रायपुर जोन की टीमों ने की कार्रवाई
ईडी के रायपुर जोन की टीमों ने कथित CGPSC घोटाले से जुड़े लोगों और परिसरों पर यह कार्रवाई की है। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी अभियान का उद्देश्य कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से संबंधित साक्ष्य जुटाना है।
2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच
यह कार्रवाई CGPSC की वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी जांच के तहत हो रही है। मामले में प्रश्नपत्र लीक, चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर और कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।
जुलाई 2026 में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष को गिरफ्तार किया था
ईडी इस मामले में पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने जुलाई 2026 में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार के जरिए अवैध धन का लेन-देन हुआ और इसी पहलू से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जुड़ी है।
केके चंद्राकर का परिसर शामिल होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण
ताजा तलाशी में केके चंद्राकर का परिसर शामिल होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पीए रह चुके हैं। हालांकि, सिर्फ उनके परिसर पर ईडी की तलाशी के आधार पर भूपेश बघेल को इस मामले का आरोपी या जांच के दायरे में बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल उपलब्ध सूचना में ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसी कोई कार्रवाई या आरोप सार्वजनिक नहीं किया है।
दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों की जांच जारी
तलाशी अभियान के दौरान ईडी की टीमें दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। कार्रवाई पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एजेंसी को क्या महत्वपूर्ण सामग्री मिली है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है मामला
CGPSC से जुड़ा यह मामला छत्तीसगढ़ में पहले से ही राजनीतिक विवाद का विषय रहा है। ईडी की ताजा कार्रवाई से इस कथित भर्ती घोटाले की जांच के और विस्तृत होने के संकेत मिल रहे हैं।




