सिकंदर कौन?

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नरेंद्र मोदी: लहर में कितना असर?

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में से जिन चार राज्यों के चुनावी नतीजों को अगले लोकसभा चुनाव के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा था उनमें से तीन में भारतीय जनता पार्टी की स्पष्ट जीत और एक में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभार को पार्टी ने प्रधानमंत्री पद के अपने उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के बढ़ते असर का नतीजा बताया.  Read more>>

 

shivraj_shingशिवराज सिंह चौहान: बड़े मायनों वाली जीत

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अभूतपूर्व जीत के एक दिन बाद यानी 10 दिसंबर को प्रदेश के सभी मुख्य अखबारों के पहले पन्ने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक बड़ा विज्ञापन छपा. इसमें शिवराज की आंखों में जीत की चमक तो थी ही, चेहरे पर आत्मविश्वास की हल्की मुसकान भी थी.  Read More>>

 

60अरविंद केजरीवाल: नवाचार का नायक

अरविंद केजरीवाल के यह घोषणा करते ही कि जहां से शीला दीक्षित चुनाव लड़ेंगी वहीं से वे भी लड़ेंगे, लोग कहने लगे कि वे राजनीतिक आत्महत्या पर आमादा हैं. मीडिया और आम लोगों के साथ ही आम आदमी पार्टी से जुड़े लोग भी दबी जुबान में उनके इस निर्णय को किंतु-परंतु की नजर से ही देख रहे थे. Read More>>

 

2013 के आइने से 2014

क्या 2013 में आए नतीजे 2014 का ट्रेलर हो सकते हैं? एक प्रचलित धारणा है कि जनता विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में अलग-अलग मानकों पर वोट देती है. अमूमन हारने वाली पार्टियों की इस धारणा में गंभीर आस्था होती है. पर क्या वास्तव में ऐसा है? Read Moro>>

 

Sumit-dayalहार के पार

किसी ने सोचा नहीं था कि 15 साल तक दिल्ली पर राज करने वाली शीला दीक्षित का सियासी सितारा इस तरह डूबेगा. लोगों को यह तो जरूर लगता था कि कांग्रेस के प्रति लोगों में गुस्सा है, लेकिन साथ ही यह बात भी थी कि  दीक्षित ने दिल्ली में काफी काम किए हैं और हो सकता है कि एक बार फिर से दिल्ली की सत्ता में उनकी वापसी हो जाए. Read More>>

 

After-election-first-raillyआगे की राह

आगे क्या? दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद आम आदमी पार्टी (आप) को लेकर सभी के मन में यही सवाल है. पार्टी कहती है कि वह लोकसभा और देश के दूसरे राज्यों की विधानसभा के लिए चुनावी किस्मत आजमाने को तैयार है. वह तमाम मंचों से ईमानदार लोगों को एक मंच पर लाने यानी उन्हें खुद से जोड़ने की बात कह रही है. Read More>>

 

rahulसुनो प्रियंका बढ़ो आगे

प्रियंका गांधी आज कांग्रेस की जरूरत हैं. और मजबूरी भी. जरूरत वे कई सालों से थीं, खासकर उन सालों में जब राहुल गांधी हर फ्रंट पर असफलता की तहरीर लिख रहे थे. लेकिन राहुल के प्रति उनकी मां की आसक्ति, कांग्रेसियों की अंधभक्ति और पार्टी द्वारा एक कमजोर नेता को क्षितिज पर टांगने की लगातार आत्ममुग्ध कोशिशों के बीच अब कहीं कोई जंग लगी कील भी नहीं बची जिसपर टंगकर राजकुंवर गांधी चकमक-चकमक चमक सकें. Read More>>

43आप की छाप

अन्ना हजारे की अगुवाई वाले जनलोकपाल आंदोलन को बगैर किसी तार्किक नतीजे पर पहुंचाए जब अरविंद केजरीवाल ने सीधे तौर पर राजनीतिक दल बनाकर व्यवस्था में शामिल होकर बदलाव की लड़ाई लड़ने की घोषणा की तो बहुत लोगों ने उनकी आलोचना की. कहा गया कि ऐसे प्रयोग पहले भी हुए हैं और चुनावी राजनीति में केजरीवाल टिक नहीं पाएंगे.  Read More>>

 

21बड़े बदलाव

दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का कहना था, ‘ आज राजनीतिक दल सड़क पर चलते आम आदमी की आवाज को जगह नहीं दे रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने ऐसे लोगों को सुना, उन्हें स्थान दिया. हम ऐसा नहीं कर पाए. हमें आम आदमी पार्टी से सीखने की जरूरत है.’  Read More>>

 

IMG_7954हिंदी पट्टी से पत्ता साफ

आंकड़े अक्सर बेहद बोझिल और उबाऊ होते हैं. लेकिन कभी-कभी उनसे कुछ दिलचस्प तस्वीरें भी उभर जाती हैं. एक आंकड़ा यह है कि हालिया चार विधानसभा के चुनावों में कुल 589 विधानसभा सीटें दांव पर लगी हुई थी. कांग्रेस को इनमें से महज 126 सीटें हाथ लगी हैं. प्रतिशत में यह 22 के आस पास बैठता है. Read More>>