आज तक की दुनिया की सबसे सख्त डिजिटल कार्यवाहियों में से एक के तहत, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सोमवार को 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इसके साथ ही गेमिंग और लाइवस्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्मों पर भी नए कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
यूके की यह नीति ऑस्ट्रेलिया द्वारा पिछले दिसंबर में लागू किए गए एक अग्रणी मॉडल से प्रेरित है। युवाओं की डिजिटल पहुंच को सीमित करने का यह वैश्विक अभियान अन्य जगहों पर भी तेजी पकड़ रहा है; इंडोनेशिया ने भी ऐसा ही एक प्रतिबंध लगाया है, जबकि भारत में आंध्र प्रदेश और कर्नाटक हाल ही में बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया प्रतिबंधों की घोषणा करने वाले पहले राज्य बन गए हैं, जहां क्रमश: 13 और 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर यह नियम लागू होगा।
प्रस्तावित ब्रिटिश कानून के तहत, यूट्यूब, फेसबुक, एक्स (ट्विटर), टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित कर दिए जाएंगे। हालांकि, व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे मुख्य मैसेजिंग ऐप्स को इससे छूट दी जाएगी।
प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के अलावा, स्टारमर ने कुछ खास तरह के उच्च जोखिम वाले डिजिटल फीचर्स को निशाना बनाने के लिए “दुनिया के सबसे अग्रणी ब्लॉकों (प्रतिबंधों)” का वादा किया है। ये नियम गेमिंग और मनोरंजन सेवाओं पर नाबालिगों के लिए लाइवस्ट्रीमिंग और अनजान लोगों से बातचीत करने की सुविधाओं को सीमित करेंगे।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्टारमर ने कहा, “यह समय के साथ माता-पिता के बीच होने वाली बातचीत और बच्चों की उम्मीदों को बदल देगा। इससे बहुत बड़ा बदलाव आएगा… यह उन्हें बड़ा होने के लिए अधिक समय, अधिक सुरक्षा और अधिक स्वतंत्रता देगा।”
ऑनलाइन गेमिंग में अनियंत्रित बातचीत के खतरों का जिक्र करते हुए स्टारमर ने आगे कहा: “क्या असल जिंदगी में ऐसी कोई स्थिति होती है जहां आप अपने बच्चे को किसी अजनबी, या किसी ऐसे वयस्क के साथ जाने की अनुमति दे देंगे जिसके बारे में आप कुछ नहीं जानते? नहीं, इसलिए हम इस पर कदम उठा रहे हैं।”
नीति में यह बड़ा बदलाव सरकार द्वारा किए गए एक व्यापक विचार-विमर्श के बाद आया है, जिसमें माता-पिता, युवाओं और उद्योग जगत से जुड़े लोगों से 1,16,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। जनता का रुख सरकार के इस हस्तक्षेप के पक्ष में काफी मजबूत है। जवाब देने वाले लगभग 83% माता-पिता ने कहा कि सोशल मीडिया के फायदे कम और नुकसान ज्यादा हैं। इसी तरह, 90% माता-पिता ने न्यूनतम उम्र सीमा 16 वर्ष रखने का समर्थन किया।
जनता के भारी समर्थन के बावजूद, इस नीति को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। कई मनोवैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का तर्क है कि इस बात के बहुत कम अनुभवजन्य प्रमाण (empirical proof) हैं कि पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी होगा या इसे पूरी तरह लागू किया जा सकेगा। इसके अलावा, युवा समूहों (जिसमें लंदन के स्कूली बच्चे भी शामिल हैं) से मिली शुरुआती प्रतिक्रियाओं से तकनीक के साथ उनका एक बेहद उलझा हुआ रिश्ता सामने आता है, जिसमें कई बच्चों ने पूर्ण प्रतिबंध की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए हैं।
यूके सरकार के पास इस प्रतिबंध के पहले चरण को शुरू करने के लिए नियामक शक्तियां पहले से ही मौजूद हैं। औपचारिक नियम साल के अंत तक आने की उम्मीद है, और यह पूर्ण प्रतिबंध अगले साल वसंत (spring) तक लागू होने की संभावना है।
यह घोषणा बच्चों की सुरक्षा को लेकर सिलिकॉन वैली (टेक कंपनियों) के साथ ब्रिटेन की चल रही जंग में एक बड़ा कदम है। इससे पहले ब्रिटेन उम्र सत्यापन (age verification), एल्गोरिदम में बदलाव और नाबालिगों की आपत्तिजनक तस्वीरों के प्रसार पर रोक लगाने जैसे निर्देश दे चुका है। यह राजनीतिक दांव स्टारमर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है, जिन्हें आने वाले हफ्तों में नेतृत्व की एक संभावित चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।


