
नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक संकट रविवार को उस समय और गहरा गया जब पार्टी के 20 बागी सांसदों ने एक क्षेत्रीय दल ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में विलय का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की घोषणा भी की।
दिनभर चले घटनाक्रम में बागी सांसद पहले केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पहुंचे, जहां करीब दो घंटे तक बैठक चली। इसके बाद सांसदों का प्रतिनिधिमंडल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिला और संसद में अलग बैठने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
बागी गुट की प्रमुख नेताओं में शामिल काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि उनके साथ सांसदों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है, जो लोकसभा में TMC की कुल ताकत के दो-तिहाई से अधिक है। उन्होंने कहा कि उनका गुट अब NCPI में विलय कर चुका है और आगे NDA के साथ मिलकर काम करेगा।
वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी पुष्टि की कि उनका समूह नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि “असली TMC कौन है, इसका फैसला अब अदालत करेगी।”
दूसरी ओर, TMC के राष्ट्रीय महासचिव और संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर किसी भी अलग गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संसद में केवल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला आधिकारिक TMC गुट ही पार्टी का प्रतिनिधित्व करता है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC लगातार आंतरिक असंतोष से जूझ रही है। पार्टी में संगठनात्मक फेरबदल और नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों के बीच यह बगावत ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है।
