रियाज़ वानी | श्रीनगर, 30 अगस्त
उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में करीब 2,000 साल पुराने ज़ेहनपोरा पुरातात्विक स्थल पर शनिवार को खुदाई का दूसरा चरण शुरू हुआ। पुरातत्वविद् यहां इसके बौद्ध अतीत से जुड़े प्रमाण तलाश रहे हैं।
कश्मीर विश्वविद्यालय और जम्मू-कश्मीर पुरातत्व विभाग का संयुक्त प्रयास
खुदाई कश्मीर विश्वविद्यालय के मध्य एशियाई अध्ययन केंद्र और जम्मू-कश्मीर के अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के संयुक्त प्रयास से की जा रही है।
मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने खुदाई के दूसरे चरण का उद्घाटन किया और स्थल का निरीक्षण किया। यह चरण करीब तीन महीने तक चलेगा और ड्रोन तस्वीरों, मानचित्रण तथा जमीनी सर्वेक्षण के आधार पर चिन्हित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
अब तक के प्रमाण: 2,000 साल पुराना स्थल
खुदाई का नेतृत्व कर रहे कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुहम्मद अजमल शाह ने कहा कि अब तक मिले प्रमाणों से संकेत मिलता है कि यह स्थल करीब 2,000 साल पुराना है।
पहले चरण में एक दीवार, एक हॉल परिसर और एक अर्धवृत्ताकार स्तूप के अवशेष मिले थे। पुरातत्वविदों को लोहे और तांबे की वस्तुएं, सुइयां, सजावटी सामान और अन्य अवशेष भी मिले।
शाह ने कहा, “हमने ड्रोन तस्वीरों के जरिए इन दीवारों की स्थिति की पहचान की और उन्हीं स्थानों पर सटीक तरीके से खुदाई की।”
पेरिस के गिमे संग्रहालय में मिली 100 वर्ष पुरानी तस्वीरों ने जगाई नई रुचि
2023 में पेरिस के गिमे संग्रहालय में करीब 100 वर्ष पुरानी तस्वीरें मिलने के बाद ज़ेहनपोरा स्थल को लेकर नए सिरे से रुचि पैदा हुई। इन तस्वीरों में बारामूला के तीन बौद्ध स्तूपों के गुंबद दिखाई दे रहे थे।
शाह ने कहा, “मुझे तुरंत एहसास हुआ कि मैं बारामूला में उस स्थल का दौरा कर चुका हूं। जिस बात ने मुझे प्रभावित किया, वह यह थी कि तस्वीर में गुंबद आज दिखाई देने वाले गुंबदों से कहीं बड़े नजर आ रहे थे।”
चौथी बौद्ध परिषद से संभावित संबंध की जांच
खुदाई दल ज़ेहनपोरा और चौथी बौद्ध परिषद के बीच संभावित संबंध की भी जांच करेगा, जिसे परंपरागत रूप से पहली शताब्दी ईस्वी में कश्मीर से जोड़ा जाता है।
शाह ने कहा, “प्राचीन काल में कश्मीर बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र था। यहीं हीनयान बौद्ध धर्म से महायान बौद्ध धर्म का विकास हुआ, जिसने धर्म को एक नया दार्शनिक और सांस्कृतिक रूप दिया।”
उन्होंने चीनी यात्री ह्वेनसांग के कश्मीर दौरे का उल्लेख करते हुए कहा, “इससे संकेत मिलता है कि ह्वेनसांग ने ज़ेहनपोरा के मठ का भी दौरा किया होगा।”
कार्बन डेटिंग समेत वैज्ञानिक जांच होगी
डुल्लू ने कहा कि खुदाई से मिले अवशेषों की कार्बन डेटिंग समेत वैज्ञानिक जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह स्थल भविष्य में एक प्रमुख पुरातात्विक और पर्यटन केंद्र बन सकता है तथा इसके संरक्षण के लिए सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया।




