मानव तस्करी केस में 9 दोषियों को उम्रकैद, इनमें 8 बांग्लादेशी नागरिक शामिल

मानव तस्करी केस में 9 दोषियों को उम्रकैद, इनमें 8 बांग्लादेशी नागरिक शामिल
मानव तस्करी केस में 9 दोषियों को उम्रकैद, इनमें 8 बांग्लादेशी नागरिक शामिल

हैदराबाद में एनआईए विशेष अदालत का 17 सितंबर 2026 का फैसला; 2019 में बांग्लादेशी महिलाओं को नौकरी का झांसा देकर लाया गया, देह व्यापार में धकेला; तेलंगाना पुलिस ने जलपल्ली और महमूद कॉलोनी से 4 महिलाओं को मुक्त कराया था; 9 दोषियों पर ₹1.37 लाख जुर्माना, नहीं भरने पर 3 महीने अतिरिक्त कैद; IPC, विदेशी नागरिक अधिनियम 1946, अनैतिक देह व्यापार अधिनियम 1956 के तहत सजा

एम. रियाज़ हाशमी, तहलका

9 दोषियों को उम्रकैद, 8 बांग्लादेशी; 2019 में नौकरी के झांसे से बांग्लादेशी महिलाओं की तस्करी, देह व्यापार में धकेला; तेलंगाना पुलिस ने 4 महिलाओं को मुक्त कराया; एनआईए ने 2019-20 में की जांच, 12 आरोपी, 3 फरार; हैदराबाद की विशेष अदालत ने 17 सितंबर 2026 को सुनाया फैसला

नई दिल्ली। 18 सितंबर, 2026 हैदराबाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) मामलों की विशेष अदालत ने मानव तस्करी के एक मामले में 9 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इनमें 8 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। अदालत ने दोषियों पर कुल 1 लाख 37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर तीन महीने की साधारण कैद की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने यह आदेश 17 सितंबर 2026 को सुनाया।

यह मामला वर्ष 2019 में बांग्लादेशी महिलाओं की मानव तस्करी से जुड़ा है। जांच के अनुसार, महिलाओं को आकर्षक रोजगार और अच्छे वेतन का झांसा देकर भारत लाया गया। इसके बाद उन्हें जबरन देह व्यापार में धकेल दिया गया। सितंबर 2019 में तेलंगाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हैदराबाद के जलपल्ली गांव में संचालित एक वेश्यालय से तीन बांग्लादेशी महिलाओं को मुक्त कराया था। इसके अलावा बालापुर के महमूद कॉलोनी स्थित एक मकान से भी एक महिला को बचाया गया था।

तेलंगाना पुलिस के बाद एनआईए ने संभाली जांच

मामला सबसे पहले हैदराबाद के पहाड़ी शरीफ पुलिस थाने में दर्ज किया गया था। एनआईए ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद 12 अक्टूबर 2019 को केस को दोबारा दर्ज किया। जांच के दौरान एजेंसी ने मानव तस्करी के नेटवर्क में आरोपियों की भूमिका स्थापित की। इसके बाद एनआईए ने 17 अक्टूबर 2020 को आरोपी 12 के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। इनमें तीन को फरार बताया गया था। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), विदेशी नागरिक अधिनियम, 1946 और अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया।

मामले में दोषी ठहराए गए 9 आरोपियों के नाम

रुहुल अमीन धाली, मोहम्मद यूसुफ खान उर्फ एमडी इमरान, बिथी बेगम उर्फ खदिजा शेख, इमामुल गाजी उर्फ मोहम्मद राणा हुसैन, मोहम्मद अल मामून, सोजिब शेख, सुरेश कुमार दास उर्फ सागर, मोहम्मद अब्दुल्ला मुंशी उर्फ अब्दुल सरकार, मोहम्मद अयूब शेख को सजा सुनाई गई है। इस मामले में आरोपियों पर बांग्लादेशी महिलाओं को रोजगार का झांसा देकर भारत लाने और बाद में उन्हें देह व्यापार के लिए मजबूर करने का आरोप था। अदालत के आदेश के अनुसार, नौ आरोपियों को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी गई है।