
स्नेहलता
महिलाओं को राजनीति में बराबरी का मौका देने के लिए आरक्षण बड़ा कदम है। लेकिन इसके साथ एक सवाल भी तेजी से उठ रहा है—क्या कुछ पुरुष नेता अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए पत्नी, बेटी और बहू को पहले से राजनीति में तैयार कर रहे हैं?
आंकड़े: 14.5 लाख महिलाएं चुनी हुई प्रतिनिधि
आंकड़े बताते हैं कि राजनीति में महिलाओं की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। 19 मार्च 2025 तक देश में 14.5 लाख महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं की चुनी हुई प्रतिनिधि थीं। यह कुल प्रतिनिधियों का करीब 46 फीसदी है। वहीं 21 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है।
‘सरपंच पति’ या ‘प्रधान पति’ की राजनीति
लेकिन इसी के साथ एक समस्या भी सामने आई है—‘सरपंच पति’ या ‘प्रधान पति’ की राजनीति।
फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि महिलाओं के नाम पर उनके पुरुष रिश्तेदारों द्वारा पंचायत का काम संभालने की समस्या को लेकर एक समिति बनाई गई थी। समिति ने प्रॉक्सी राजनीति रोकने के लिए कानूनी सुरक्षा, प्रशिक्षण, महिला लोकपाल, सामाजिक जांच और जरूरत पड़ने पर सजा जैसे उपाय सुझाए हैं। दिसंबर 2025 तक 28.60 लाख महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका था।
यानी समस्या सरकार के रिकॉर्ड में भी दर्ज है।
हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों में फिर उठा सवाल
2026 में हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों के दौरान यह सवाल फिर उठा। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कई आरक्षित सीटों पर पूर्व प्रधानों की पत्नियां, बहुएं और करीबी महिला रिश्तेदार चुनाव मैदान में उतरीं। इससे बहस शुरू हुई कि क्या आरक्षण महिलाओं को आगे बढ़ा रहा है या कुछ राजनीतिक परिवार अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए महिला रिश्तेदारों को आगे कर रहे हैं।
हर महिला उम्मीदवार को ‘कठपुतली’ कहना सही नहीं
लेकिन हर महिला उम्मीदवार को ‘कठपुतली’ कहना भी सही नहीं होगा। आरक्षण ने लाखों महिलाओं को पहली बार सार्वजनिक जीवन और फैसले लेने का मौका दिया है।
अब नजर विधानसभा और लोकसभा पर
अब नजर विधानसभा और लोकसभा पर है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है। इसका लागू होना जनगणना के बाद परिसीमन से जुड़ा है।
अप्रैल 2026 में सरकार ने इसे जल्दी लागू करने के लिए संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयक पेश किए थे। इनमें लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 816 करने और 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए रखने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया, लेकिन ये विधेयक उस सत्र में आगे नहीं बढ़ सके।
आने वाले वर्षों में राजनीतिक परिवारों की रणनीति पर नजर
ऐसे में आने वाले वर्षों में राजनीतिक परिवारों की रणनीति पर नजर रहेगी।
क्या पुरुष नेता अपनी राजनीतिक विरासत बचाने के लिए पत्नी, बेटी या बहू को तैयार करेंगे?
और सबसे बड़ा सवाल—
कुर्सी पर महिला होगी, लेकिन सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी?



