18 सितंबर से 100 हफ्तों का ‘नशा मुक्त युवा’ अभियान, जानिए देश में नशे की कितनी बड़ी है समस्या।

18 सितंबर 2026 से 100 हफ्तों का ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ शुरू हुआ। 300 शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय संकल्प समारोह हुआ।
18 सितंबर 2026 से 100 हफ्तों का ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ शुरू हुआ। 300 शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय संकल्प समारोह हुआ।

100 हफ्तों तक चलेगा अभियान; 18 सितंबर को 300 संस्थानों में संकल्प समारोह, 20 सितंबर को 485 माई भारत इकाइयों में कार्यक्रम; 2018 सर्वे: 14.6% शराब उपयोगकर्ताओं (16 करोड़), 5.7 करोड़हानिकारक/निर्भर; 3.1 करोड़ कैनबिस, 2.06% ओपिओइड; 10-17 आयु वर्ग: 30 लाख शराब, 40 लाख ओपिओइड, 20 लाख गांजा इस्तेमाल करने वाले; पंजाब, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, पूर्वोत्तर में समस्या गंभीर; टोल-फ्री हेल्पलाइन 14446

रुखसार, तहलका

नई दिल्ली। 18 सितंबर, 2026 – देश में युवाओं को नशे से दूर रखने और नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए 18 सितंबर 2026 से 100 हफ्तों का ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ शुरू किया जा रहा है। इस अभियान की शुरुआत राष्ट्रीय संकल्प समारोह से होगी। 18 सितंबर को राष्ट्रीय सेवा योजना यानी एनएसएस के जरिए 300 शिक्षण संस्थानों में कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 20 सितंबर को 485 माई भारत इकाइयों में भी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर देश में नशे की समस्या कितनी बड़ी है? कितने लोग नशे का इस्तेमाल कर रहे हैं? युवाओं और बच्चों में इसकी स्थिति क्या है और कौन से राज्य ज्यादा प्रभावित हैं?

इन सवालों का जवाब फिलहाल उपलब्ध सबसे बड़े राष्ट्रीय सर्वे से मिलता है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि ये आंकड़े 2018 के भारत में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के दायरे और पैटर्न पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण के हैं। सरकार के मुताबिक 2018 के बाद अभी तक ऐसा कोई नया व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण नहीं हुआ है। इसलिए 2026 के लिए पूरे देश का नया प्रतिशत उपलब्ध नहीं है।

‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा’ अभियान की शुरुआत

‘विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा’ अभियान की शुरुआत 18 सितंबर से राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। इसे युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग, माई भारत और राष्ट्रीय सेवा योजना यानी एनएसएस के जरिए चलाया जा रहा है।

इस अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त 2026 को वर्चुअल संबोधन के जरिए की थी। सरकार के अनुसार अभियान के चार मुख्य आधार हैं रोकथाम, सुरक्षा, पुनर्प्राप्ति और नेतृत्व। शुरुआत के बाद 30,200 से ज्यादा स्थानों से भागीदारी, 2.5 करोड़ से ज्यादा व्यूअरशिप और 1 करोड़ से ज्यादा शपथ दर्ज होने की जानकारी सरकार ने दी है।

18 सितंबर से 300 शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय संकल्प समारोह होगा। इसमें युवा शपथ लेंगे और हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ नुक्कड़ नाटक, नारा लेखन और युवाओं की अगुवाई में चर्चा भी होगी।

20 सितंबर से अभियान का पहला रविवार मनाया जाएगा। इस दिन 485 माई भारत इकाइयों में अलग-अलग कार्यक्रम होंगे।

100 हफ्तों तक क्या-क्या होगा?

यह सिर्फ एक दिन या कुछ दिनों का अभियान नहीं है। इसे 100 हफ्तों तक चलाने की योजना है।

सितंबर से दिसंबर 2026 तक पहले 12 हफ्तों का कार्यक्रम रखा गया है। इसमें तीन मुख्य विषय होंगे-

  • मेरा स्वास्थ्य, मेरा अभिमान
  • फिट युवा, व्यसन-मुक्त युवा
  • जीवन कौशल महीना

इन कार्यक्रमों में स्वास्थ्य जांच, बीएमआई जांच, ध्यान और योग, स्वास्थ्य वॉक और रन, युवा मेले, पारंपरिक खेल, मिनी मैराथन, साइक्लोथॉन, स्पोर्ट्स लीग, निर्णय लेने की कार्यशाला, समस्या सुलझाने वाली गतिविधियां और युवाओं के जरिए रोल-प्ले व नुक्कड़ नाटक शामिल होंगे।

सरकार के अनुसार 12 हफ्तों में एनएसएस के जरिए करीब 2,500 कार्यक्रम और माई भारत की तरफ से 3,235 इकाई स्तर की गतिविधियां प्रस्तावित हैं।

अब समझिए भारत में नशे की स्थिति कितनी बड़ी है

भारत में नशे की स्थिति जानने के लिए सबसे व्यापक राष्ट्रीय सर्वे 2018 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने एनडीडीटीसी, एम्स के जरिए कराया था।

इस सर्वे में 10 से 75 साल की उम्र के लोगों को शामिल किया गया था। देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 2 लाख घरों का सर्वे किया गया और करीब 4.73 लाख लोगों से जानकारी ली गई।

सर्वे में शराब, गांजा/भांग, नशीले पदार्थों यानी अफीम, हेरोइन और कुछ दवाओं का गलत इस्तेमाल, कोकीन, एटीएस, शामक, इनहेलेंट और हैलुसिनोजन जैसी चीजों को देखा गया था।

शराब का इस्तेमाल सबसे ज्यादा

2018 के सर्वे के मुताबिक 10 से 75 साल की आबादी में करीब 14.6 प्रतिशत लोग शराब के मौजूदा उपयोगकर्ता थे। इनकी संख्या करीब 16 करोड़ बताई गई थी।

लेकिन सिर्फ शराब पीने वालों की संख्या ही चिंता की बात नहीं है। सर्वे के अनुसार करीब 5.2 प्रतिशत भारतीय, यानी 5.7 करोड़ से ज्यादा लोग, हानिकारक या शराब पर निर्भरता से प्रभावित थे और उन्हें मदद की जरूरत हो सकती थी।

शराब के इस्तेमाल का स्तर छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, पंजाब, अरुणाचल प्रदेश और गोवा में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा पाया गया था। वहीं शराब के सेवन से जुड़ी समस्या का स्तर त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश में 10 प्रतिशत से ज्यादा बताया गया था।

गांजा और Cannabis का आंकड़ा

सर्वे के अनुसार करीब 2.8 प्रतिशत भारतीय, यानी लगभग 3.1 करोड़ लोग, पिछले 12 महीनों में किसी न किसी रूप में कैनबिस का इस्तेमाल कर चुके थे।

इसमें करीब 2.2 करोड़ लोग भांग और करीब 1.3 करोड़ लोग गांजा या चरस इस्तेमाल करने वाले बताए गए। करीब 72 लाख लोगों को कैनबिस से जुड़ी समस्या के लिए मदद की जरूरत का अनुमान लगाया गया था।

राष्ट्रीय औसत से ज्यादा गांजे का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश, पंजाब, सिक्किम, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में पाया गया था।

नशीले पदार्थों यानी अफीम, हेरोइन और कुछ दवाओं का इस्तेमाल

नशीले पदार्थोंको नशे की गंभीर श्रेणियों में गिना जाता है। 2018 के सर्वे में देश में 2.06 प्रतिशत लोगों के ओपिओइड का इस्तेमाल करने वाले मौजूदा लोग होने का अनुमान था।

इनमें करीब 1.14 प्रतिशत लोग हेरोइन, 0.96 प्रतिशत फार्मास्युटिकल ओपिओइड्स और 0.52 प्रतिशत अफ़ीम का इस्तेमाल करने वाले थे। करीब 0.55 प्रतिशत आबादी को ओपिओइड का इस्तेमाल की समस्या के लिए मदद की जरूरत का अनुमान लगाया गया था।

प्रतिशत के हिसाब से ओपिओइड की समस्या मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में ज्यादा पाई गई थी।

वहीं ओपिओइड-उपयोग विकार से प्रभावित लोगों की कुल संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात का बड़ा हिस्सा था।

बच्चों और किशोरों में क्या स्थिति है?

सबसे बड़ी चिंता बच्चों और किशोरों को लेकर है।

2018 के सर्वे में 10 से 17 साल की उम्र के बच्चों और किशोरों को अलग से देखा गया था।

इस उम्र के करीब:

  • 30 लाख बच्चे शराब पीने वाले बताए गए।
  • 20 लाख गांजा इस्तेमाल करने वाले का अनुमान था।
  • करीब 40 लाख ओपिओइड का इस्तेमाल करने वाले बताए गए।
  • करीब 20 लाख शामक दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोग थे।
  • करीब 30 लाख बच्चे इनहेलेंट का इस्तेमाल करते पाए गए।

10 से 17 साल के बच्चों में ओपिओइड का इस्तेमाल की प्रसार1.8 प्रतिशत थी।

एक खास बात यह भी सामने आई कि इनहेलेंट के मामले में बच्चों और किशोरों का प्रतिशत वयस्कों से ज्यादा था। बच्चों में यह 1.17 प्रतिशत, जबकि 18 से 75 साल के वयस्कों में 0.58 प्रतिशत था।

Adults में क्या आंकड़े हैं?

18 से 75 साल की उम्र के लोगों में 2018 के सर्वे के मुताबिक

  • शराब – 17.1%, करीब 15.1 करोड़
  • कैनबिस – 3.3%, करीब 2.9 करोड़
  • नशीले पदार्थों – 2.1%, करीब 1.9 करोड़
  • शामक – 1.21%, करीब 1.1 करोड़
  • इनहेलेंट्स – 0.58%, करीब 60 लाख
  • कोकीन – 0.11%, करीब 10 लाख
  • एटीएस – 0.18%, करीब 20 लाख
  • हैलुसिनोजन – 0.13%, करीब 20 लाख

यहां फिर से समझना जरूरी है कि तात्कालिक प्रयोगकर्ता का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति आदी है। नशे का इस्तेमाल करने वालों और नशे की वजह से निर्भरता या हानिकारक इस्तेमाल की समस्या वाले लोगों के आंकड़े अलग हैं।

क्या महिलाओं में भी नशे की समस्या है?

2018 के सर्वे में महिलाओं के आंकड़े भी सामने आए थे। 10 से 75 साल की महिलाओं में गांजे का इस्तेमाल करीब 0.6 प्रतिशत और ओपिओइड का इस्तेमाल करीब 0.2 प्रतिशत पाया गया था। इनहेलेंट्स का इस्तेमाल करीब 0.07 प्रतिशत महिलाओं में दर्ज किया गया था।

शराब के मामले में सर्वे ने बताया था कि इसका इस्तेमाल पुरुषों में महिलाओं की तुलना में बहुत ज्यादा था।

सिर्फ नशा छुड़ाना नहीं, इलाज और मदद भी मकसद

नशा मुक्ति का मतलब सिर्फ लोगों को नशा छोड़ने के लिए कहना नहीं है। सरकार की मौजूदा योजनाओं में जागरूकता, काउंसलिंग, इलाज, पुनर्वास और समाज में दोबारा जुड़ने में मदद भी शामिल है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की नशीले पदार्थों की मांग कम करने की राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत राज्यों, गैर सरकारी संगठनों और दूसरी संस्थाओं को नशे से बचाव और इलाज से जुड़ी गतिविधियों के लिए मदद दी जाती है। सरकार ने नशे के आदीयो के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र, समुदाय-आधारित सहकर्मी के नेतृत्व वाले हस्तक्षेप केंद्र, आउटरीच और ड्रॉप-इन केंद्र और लत उपचार सुविधाएं जैसी सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं।

नशे से जुड़ी मदद के लिए सरकार की टोल-फ्री हेल्पलाइन 14446 भी उपलब्ध है।

सबसे जरूरी बात: 2026 का नया राष्ट्रीय आंकड़ा अभी नहीं है

देश में नशे की मौजूदा स्थिति पर बात करते समय एक बात बिल्कुल साफ रखना जरूरी है।

2018 का राष्ट्रीय सर्वेक्षण अभी उपलब्ध सबसे व्यापक राष्ट्रीय सर्वे है। सरकार ने दिसंबर 2023 में संसद में बताया था कि 2018 के बाद इस विषय पर नया व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण नहीं हुआ था। इसलिए 2026 में “भारत में इतने प्रतिशत लोग नशा करते हैं” कहने के लिए कोई नया राष्ट्रीय सर्वे आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

इसलिए 18 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा 100 हफ्तों का अभियान युवाओं को नशे से बचाने, जागरूकता बढ़ाने, समुदाय को जोड़ने और जरूरतमंद लोगों को मदद व इलाज तक पहुंचाने पर केंद्रित है।

नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि परिवार, स्कूल, कॉलेज और पूरे समाज की जिम्मेदारी भी है।