
23 जून 1985 को अटलांटिक के ऊपर बोइंग 747 में बम विस्फोट, 329 मौतें (268 कनाडाई); संजय लाजर ने खोए पिता, सौतेली मां, छोटी बहन; 12 सितंबर 2026 की बैठक में RCMP टास्क फोर्स घटाने का संकेत, परिवारों में आक्रोश; जॉन मेजर आयोग की 2010 रिपोर्ट में खुफिया-पुलिस समन्वय, विमानन सुरक्षा, गवाह सुरक्षा पर सिफारिशें; 1995 का $1M इनाम बढ़ाने, नई सार्वजनिक अपील और जांच तेज करने की मांग; 2005 में मलिक-बागरी बरी, रियात को 1991 में सजा
एम. रियाज़ हाशमी
नई दिल्ली । 18 सितंबर, 2026 एयर इंडिया फ्लाइट 182 (कनिष्क) बम विस्फोट की जांच को लेकर कनाडा में एक बार फिर पीड़ित परिवारों की नाराजगी सामने आई है। इस हादसे में अपने माता-पिता और छोटी बहन को खोने वाले संजय लाजर ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को पत्र भेजकर जांच बंद करने या निष्क्रिय स्थिति में डालने के प्रयास का विरोध किया। लाजर के मुताबिक, 12 सितंबर को पीड़ित परिवारों के साथ हुई बैठक में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की जांच टीम का आकार घटाने और मामले को निष्क्रिय स्थिति में रखने की संभावित योजना का पता चला, लेकिन आरसीएमपी ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है।
लाजर ने प्रधानमंत्री से जांच जारी रखने, नए सुरागों के लिए इनाम बढ़ाने और कनाडाई पुलिस तथा खुफिया एजेंसियों को जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने के लिए नए सिरे से प्रयास करने की मांग की है। यह मामला सिर्फ 1985 के एक आतंकी हमले की कहानी नहीं है। यह उन सुरक्षा और जांच संबंधी सवालों से भी जुड़ा है, जिन्हें कनाडा के जॉन मेजर आयोग ने वर्षों बाद अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया था।
23 जून 1985: हवा में बिखर गया था कनिष्क, 329 लोगों की मौत
23 जून 1985 को एयर इंडिया का बोइंग 747 विमान कनिष्क मॉन्ट्रियल से लंदन की ओर जा रहा था। विमान आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर पहुंचा, तभी उसमें बम विस्फोट हो गया। विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 268 कनाडाई नागरिक थे। संजय लाजर ने एयर इंडिया फ्लाइट 182 में हुए बम विस्फोट में अपने पिता, सौतेली मां और छोटी बहन को खो दिया था। उस समय उनकी उम्र करीब 17 वर्ष थी। कनाडा के इतिहास में यह सबसे घातक आतंकवादी हमला बना हुआ है। विमान में रखा बम हवा में फटा और मलबा समुद्र में गिर गया। हादसे की जांच में विमान के आगे वाले कार्गो होल्ड में विस्फोट के प्रमाण मिले। इस घटना की जांच भारत और कनाडा दोनों में हुई और बाद में यह कनाडा की सबसे लंबी तथा महंगी आपराधिक जांचों में शामिल हुई। कनिष्क हमले से पहले जापान के नारिता हवाई अड्डे पर एक सूटकेस में रखा बम फट गया था। इसमें दो बैगेज हैंडलर मारे गए। जांच में दोनों घटनाओं के बीच संबंध सामने आया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि साजिश का दायरा सिर्फ एक विमान तक सीमित नहीं था।
जांच में खुफिया सूचनाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे थे सवाल
कनिष्क विस्फोट के बाद कनाडा की खुफिया एजेंसी सीएसआईएस (कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलीजेंस सर्विसेज) और आरसीएमपी की भूमिका पर सवाल उठे। जॉन मेजर की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग का उद्देश्य हमले से पहले और बाद की सरकारी कार्रवाई, सुरक्षा तंत्र की कमियों और जांच की प्रक्रिया की समीक्षा करना था। आयोग ने 17 जून 2010 को अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी की। इसमें सरकारी विभागों, आरसीएमपी और सीएसआईएस की गलतियों की एक श्रृंखला को हमले को रोकने में विफलता और उसके बाद की जांच की कमियों से जोड़ा गया। आयोग ने खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, एजेंसियों के समन्वय, गवाह सुरक्षा और विमानन सुरक्षा में सुधार की सिफारिशें की।
कनिष्क जांच की वर्तमान स्थिति और 2026 में उठे पांच सवाल
1. आरसीएमपी की वर्तमान जांच स्थिति क्या है? आरसीएमपी की ओर से जांच को सीमित करने और समर्पित टास्क फोर्स का आकार घटाने की संभावित योजना की जानकारी परिवारों को दी गई थी। आरसीएमपी के किसी औपचारिक आदेश, जांच समाप्ति अधिसूचना या अंतिम रूप से जांच बंद किए जाने का प्रमाण सामने नहीं आया है। लेकिन परिवारों ने जांच समेटे जाने की आशंका जताई है और इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण की जरूरत है।
2. 12 सितंबर 2026 की बैठक में वास्तव में क्या कहा गया? संजय लाजर के के अनुसार, 12 सितंबर की बैठक पीड़ित परिवारों के साथ जांच की प्रगति पर चर्चा के लिए थी। यह लगभग 20 वर्षों में परिवारों के साथ हुई पहली ऐसी बैठक थी, जिसमें जांच की प्रगति की जानकारी दी जानी थी। यहीं परिवारों को यह संकेत मिला कि जांच में आगे बढ़ने के लिए नए सुराग उपलब्ध नहीं हैं और टास्क फोर्स को छोटा करके मामले को निष्क्रिय स्थिति में रखा जा सकता है।
3. क्या टास्क फोर्स के आकार या बजट में कोई आधिकारिक बदलाव हुआ है? यह इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण अनुत्तरित सवालों में से एक है। मीडिया रिपोर्टों में जांच टास्क फोर्स को छोटा करने की संभावित योजना का उल्लेख है, लेकिन उपलब्ध सामग्री से यह प्रमाणित नहीं होता कि आरसीएमपी ने वास्तव में कितने अधिकारियों को हटाया है, जांच का बजट कितना घटाया गया है या कोई औपचारिक प्रशासनिक आदेश जारी किया गया है।
4. जॉन मेजर आयोग की सिफारिशों पर कनाडा सरकार ने क्या कार्रवाई की? आयोग की रिपोर्ट 2010 में प्रकाशित हुई थी, जिसने कनाडा के सुरक्षा और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली में सुधार की कई सिफारिशें की। खुफिया एजेंसियों और पुलिस के बीच समन्वय, आतंकवाद से संबंधित अभियोजन, गवाह सुरक्षा और विमानन सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। रिपोर्ट का व्यापक उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए संस्थागत व्यवस्था मजबूत करना था।
5. 1995 के इनाम की वर्तमान स्थिति क्या है और क्या इसे बढ़ाने का कोई निर्णय हुआ? संजय लाजर ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि कनाडा सरकार और आरसीएमपी ने जून 1995 में एयर इंडिया 182 बम विस्फोट के अपराधियों की जानकारी देने वालों के लिए 1 मिलियन डॉलर के इनाम की घोषणा की थी। वह इस इनाम को बढ़ाकर दोबारा जारी करने की मांग करते हैं। लेकिन इस समीक्षा में 1995 की मूल इनाम अधिसूचना की वर्तमान वैधता, बाद में हुए किसी संशोधन या 2026 में इनाम बढ़ाने के आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है। क्योंकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या 1995 का इनाम अब भी प्रभावी है?
1991: इंदरजीत सिंह रियात को सजा, लेकिन मलिक और बागरी बरी
नारिता बम विस्फोट से जुड़े मामलों में इंदरजीत सिंह रियात को दोषी ठहराया गया। बाद की कनिष्क जांच और मुकदमों में उनकी भूमिका फिर सामने आई। रिपुदमन सिंह मलिक और अजीब सिंह बागरी को 2005 में एयर इंडिया मामले में बरी कर दिया गया। अभियोजन के लिए आवश्यक प्रमाण के मानक को पूरा करने में कठिनाई सामने आई। लेकिन अब एक बार फिर कुछ अनुत्तरित सवाल उठ खड़े हुए हैं- क्या कनिष्क जांच के सभी संभावित सुरागों की समीक्षा पूरी हो चुकी है? क्या आरसीएमपी ने जांच को निष्क्रिय स्थिति में रखने का औपचारिक निर्णय लिया है? जॉन मेजर आयोग की सभी सिफारिशों के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति क्या है? 1995 के इनाम की वर्तमान स्थिति और 2026 में किसी नए निर्णय का आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है?
संजय लाजर की चिट्ठी में भारत और कनाडा के पीएम से क्या मांगें हैं?
एयर इंडिया-182 बम विस्फोट में अपने परिजनों को खोने वाले संजय लाजर ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों को भेजे पत्र में मांग की है कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की जांच को कमजोर या बंद न किया जाए। उन्होंने जांच को आगे बढ़ाने, उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर जांच की जिम्मेदारी अधिक सक्षम एजेंसियों को सौंपने की बात कही है। पत्र में वर्ष 1995 में घोषित 10 लाख कनाडाई डॉलर के इनाम को बढ़ाने, दोषियों की तलाश के लिए नया सार्वजनिक अपील अभियान चलाने और कनाडाई पुलिस व खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई मजबूत करने का भी अनुरोध किया गया है।



