पंजाब में कर्मचारियों का गतिरोध खत्म, सरकार 8% डीए बढ़ोतरी पर राजी

जुलाई 2023 से लागू होंगी डीए की दो 4-4 फीसदी किस्तें; सितंबर के वेतन के साथ 1 अक्टूबर को होगा भुगतान, अनुशासनात्मक नोटिस भी वापस होंगे

पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध शुक्रवार को खत्म हो गया। सरकार ने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) की दो किस्तें, 4-4 फीसदी की दर से, जारी करने पर सहमति जताई। इस तरह कर्मचारियों को कुल 8 फीसदी डीए बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा।

बढ़ा हुआ डीए जुलाई 2023 से पूर्व प्रभाव से लागू होगा और इसका भुगतान 1 अक्टूबर को सितंबर के वेतन के साथ किया जाएगा। यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और बलजीत कौर तथा सांझा मुलाजिम मंच के तहत 12 कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई करीब एक घंटे की बैठक के बाद लिया गया।

अमन अरोड़ा ने बताया कि इस फैसले से राज्य के खजाने पर करीब 231 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार ने इसे कर्मचारियों के साथ सद्भावना के तौर पर उठाया गया कदम बताया है, जबकि उनकी अन्य मांगों पर बातचीत आगे जारी रहेगी।

सांझा मुलाजिम मंच के संयोजक गुरनाम सिंह विर्क ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की लंबित मांगों पर चर्चा के लिए अक्टूबर के पहले सप्ताह में फिर बैठक करने पर सहमति जताई है। इनमें पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करना, 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती कर्मचारियों के लिए अलग वेतन ढांचे को खत्म करना और परिवीक्षा अवधि के दौरान पूरा वेतन देने जैसी मांगें शामिल हैं।

हालांकि, पुराने डीए बकाये और वेतन संबंधी अन्य विवादों को लेकर चल रही कानूनी कार्यवाही पर इस समझौते का कोई असर नहीं पड़ेगा। पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के 3 अगस्त के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें 2016 से लंबित डीए बकाये को 15 दिनों के भीतर जारी करने का निर्देश दिया गया था। आदेश का पालन न करने की स्थिति में 18 फीसदी सालाना ब्याज देने की बात कही गई थी। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

इससे पहले 4 सितंबर को सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती किए गए करीब 85,000 कर्मचारियों का डीए 42 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग वेतन ढांचों के कारण पैदा हुए वेतन असमानताओं को दूर करना था। इनमें करीब 71,000 कर्मचारी मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में और लगभग 14,000 कर्मचारी पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान भर्ती हुए थे।

डीए और अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर कर्मचारी संगठनों के साथ सरकार का टकराव पिछले कई हफ्तों से बढ़ता जा रहा था। गतिरोध उस समय और गहरा गया जब 27 अगस्त को जालंधर में मुख्यमंत्री और कर्मचारियों के बीच प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी गई। मुख्यमंत्री ने बातचीत से पहले कर्मचारियों से अपना आंदोलन खत्म करने को कहा था।

इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने 8 सितंबर को सामूहिक आकस्मिक अवकाश का ऐलान किया और 30 सितंबर को पंजाब विधानसभा का सांकेतिक सत्र आयोजित करने तथा अक्टूबर में मंत्रियों के आवासों के बाहर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी।

मंच में पेंशनरों का प्रतिनिधित्व करने वाले सतीश राणा ने बताया कि सरकार ने 27 अगस्त और 8 सितंबर को ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों को जारी अनुशासनात्मक नोटिस वापस लेने पर भी सहमति जताई है।

सिविल सचिवालय कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुखचैन सिंह खेहरा ने कहा कि कर्मचारियों ने तत्काल डीए राहत के सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, लेकिन अन्य लंबित मांगों पर बातचीत जारी रहेगी। हालांकि, कर्मचारी मंच ने सरकार के उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जिसमें हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह कहा जाना था कि कर्मचारियों से जुड़े सभी विवादों का समाधान हो चुका है।

सरकार ने पहले कर्मचारियों की सभी मांगों को पूरा करने के वित्तीय प्रभाव का हवाला दिया था, जबकि कर्मचारी संगठन लंबे समय से लंबित डीए बकाये और वेतन विसंगतियों के समाधान की मांग करते रहे हैं। शुक्रवार का समझौता कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में से एक पर तत्काल राहत देता है, जबकि पुराने बकाये और सेवा शर्तों से जुड़े व्यापक मुद्दों पर बातचीत और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।