वाराणसी एयरपोर्ट पर लाइसेंसी पिस्टल से चली गोली: BCAS जांच में सुरक्षा प्रक्रिया की समीक्षा

वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का टर्मिनल भवन
वाराणसी एयरपोर्ट पर 16 अगस्त को लाइसेंसी हथियार की स्क्रीनिंग के दौरान गोली चलने से दो स्क्रीनर घायल हुए।

स्नेहल चौरसिया/नई दिल्ली
पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर 16 अगस्त को लाइसेंसी पिस्टल से गोली चल गई थी। अब ये मामला सिर्फ “गोली कैसे चली” तक सीमित नहीं रहा। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी यानी बीसीएएस अब पूरे सिस्टम की जांच कर रहा है। देख रहा है कि लाइसेंसी हथियार की जांच और उसे ले जाने की प्रक्रिया सही से हुई थी या नहीं। नागर विमानन मंत्रालय ने भी साफ कहा है कि जांच में यही सब शामिल होगा।

वाराणसी एयरपोर्ट पर 16 अगस्त को क्या हुआ था?


16 अगस्त की सुबह करीब 9:30 बजे एयर इंडिया एक्सप्रेस की वाराणसी-मुंबई फ्लाइट के लिए चेकिंग चल रही थी। यात्री कमलेश केदारनाथ राय ने खुद बताया था कि उनके पास 7.62 एमएम की पिस्टल और 21 कारतूस हैं।

नियम के मुताबिक उन्हें हथियार जमा कराने वाले खास काउंटर पर ले जाया गया। वहीं जांच के दौरान अचानक पिस्टल से एक गोली चल गई। इस हादसे में एयरपोर्ट की सुरक्षा में तैनात दो AAI-CISF स्क्रीनर घायल हो गए। दोनों को तुरंत अस्पताल भेजा गया।

BCAS की जांच में किन सुरक्षा प्रक्रियाओं की समीक्षा होगी?


सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब यात्री ने पहले ही हथियार बता दिया था, तो फिर स्क्रीनिंग के दौरान गोली कैसे चल गई? शुरुआती रिपोर्ट में पता चला है कि जांच के वक्त पिस्टल यात्री ही पकड़े हुए था। उसी दौरान फायर हुआ।

बीसीएएस ये भी खंगाल रहा है कि स्क्रीनिंग कर रहे स्टाफ ने सारे सुरक्षा नियम फॉलो किए थे या कोई चूक हुई।

फ्लाइट में लाइसेंसी हथियार ले जाने के नियम क्या हैं?


फ्लाइट में हथियार ले जाने की इजाजत होती है, लेकिन शर्तों के साथ।

  1. यात्री को पहले एयरलाइन को बताना होता है।
  2. हथियार केबिन में नहीं ले जा सकते। उसे सामान के साथ जमा करना पड़ता है।
  3. जांच के बाद ही उसे ले जाने दिया जाता है।

इस केस में यात्री ने हथियार पहले ही घोषित कर दिया था। अब जांच इसी बात पर है कि घोषणा के बाद कौन-कौन से स्टेप हुए और कहां गड़बड़ी हुई।

आगे क्या?
घटना के बाद एयरपोर्ट का काम सामान्य रहा। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए ये मामला बहुत गंभीर है। अगर जांच में नियम तोड़ने की बात सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल बीसीएएस की रिपोर्ट का इंतजार है। उसके बाद ही पता चलेगा कि ये सिर्फ हथियार को गलत तरीके से पकड़ने की वजह से हुआ या स्क्रीनिंग सिस्टम में भी कोई कमी थी।

सीधी बात ये है कि 16 अगस्त की घटना अब सिर्फ एक हादसा नहीं रही। जांच इस बात पर टिकी है कि लाइसेंसी हथियार की जांच की पूरी प्रक्रिया में चूक कहां हुई।