रम्मीकल्चर ऐप केस: ईडी ने 442 करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं, अब तक 2,843 करोड़ पर प्रहार

रम्मीकल्चर ऑनलाइन गेमिंग मामले में ईडी की संपत्ति कुर्की का प्रतीकात्मक दृश्य
ईडी ने रम्मीकल्चर से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में नई संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। यह प्रतिनिधि तस्वीर है।

गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज के शेयरधारकों के परिवारों, निजी ट्रस्टों और संबंधित कंपनियों की संपत्तियां भी जांच के दायरे में; ऑनलाइन रम्मी में बॉट के इस्तेमाल, निकासी पर शुल्क और गेम कैश के जरिए यूजर्स को फंसाने के आरोप

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली

ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग (पैसे लगाकर खेले जाने वाले ऑनलाइन खेल) से जुड़े रम्मीकल्चर ऐप मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों के परिवार के सदस्यों, निजी फैमिली ट्रस्टों और उनसे जुड़ी विभिन्न कंपनियों के नाम पर मौजूद लगभग 442.35 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है।

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (अस्थायी संपत्ति कुर्की आदेश) जारी किया। एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में अब तक जब्त, फ्रीज और अटैच की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 2,843 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

3 करोड़ यूजर्सः बॉट से खेल में धोखाधड़ी का आरोप

ईडी की जांच में सामने आया है कि गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और रम्मीटाइम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन रम्मी गेम और टूर्नामेंट संचालित कर रही थीं। रम्मीकल्चर, रम्मीप्राइम, प्लेशिप और रम्मीटाइम जैसे ब्रांड के तहत चलने वाले इन प्लेटफॉर्म का देशभर में लगभग 3 करोड़ यूजर्स का आधार था। इन प्लेटफॉर्म पर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे उन राज्यों के भी बड़ी संख्या में यूजर्स मौजूद थे, जहां ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगाया गया था।

ईडी की जांच में कंपनियों की यूजर एक्विजिशन (नए ग्राहकों को जोड़ने) और रिटेंशन (पुराने ग्राहकों को बनाए रखने) की रणनीतियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। कंपनियों ने नए यूजर्स को जोड़ने के लिए मार्केटिंग और प्रचार अभियानों पर लगभग 1,035 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके तहत बोनस, रेफरल इंसेंटिव, मुफ्त टूर्नामेंट एंट्री और प्रमोशनल रिवॉर्ड जैसे ऑफर दिए गए, ताकि यूजर्स लगातार गेम खेलें और ज्यादा रकम जमा करें।

बॉट ऐसे स्वचालित प्रोग्राम या एल्गोरिदम होते हैं, जो इंसान की तरह गेम खेल सकते हैं। आरोप है कि कंपनियों ने यूजर्स की जानकारी और सहमति के बिना इनका इस्तेमाल किया, जिससे खिलाड़ियों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और कंपनियों के लिए अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) पैदा हुई।

1,035 करोड़ मार्केटिंग खर्च, बार-बार खेलने का लालच

ईडी की जांच में कंपनियों की यूजर एक्विजिशन (नए ग्राहकों को जोड़ने) और रिटेंशन (पुराने ग्राहकों को बनाए रखने) की रणनीतियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। कंपनियों ने नए यूजर्स को जोड़ने के लिए मार्केटिंग और प्रचार अभियानों पर लगभग 1,035 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके तहत बोनस, रेफरल इंसेंटिव, मुफ्त टूर्नामेंट एंट्री और प्रमोशनल रिवॉर्ड जैसे ऑफर दिए गए, ताकि यूजर्स लगातार गेम खेलें और ज्यादा रकम जमा करें।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में यूजर्स से रकम निकालने पर 5 से 10 प्रतिशत तक निकासी शुल्क लगाया गया।

ईडी का आरोप है कि कंपनियां ‘सुपर बूस्टर’ ऑफर के जरिए यूजर्स को अपनी निकासी योग्य रकम को ऐसी ‘गेम कैश’ राशि में बदलने के लिए प्रेरित करती थीं, जिसे सीधे निकाला नहीं जा सकता था। भारी आर्थिक नुकसान उठाकर गेम छोड़ चुके और लंबे समय से निष्क्रिय यूजर्स को भी दोबारा गेमिंग की ओर आकर्षित करने के लिए इंस्टेंट कैश क्रेडिट, प्रमोशनल ऑफर, पुश नोटिफिकेशन, एसएमएस अभियान और टेलीमार्केटिंग कॉल का सहारा लिया जाता था। इन तौर-तरीकों ने ऐसा गेमिंग वातावरण तैयार किया, जिसमें यूजर्स बार-बार दांव लगाने के लिए प्रेरित होते थे और कंपनियां प्लेटफॉर्म कमीशन के जरिए भारी रकम अर्जित करती थीं।

शेयर बायबैक, डिविडेंड और फैमिली ट्रस्ट से रकम छुपाई

ईडी की जांच केवल गेमिंग प्लेटफॉर्म पर यूजर्स से रकम अर्जित करने तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने कथित अपराध से अर्जित आय को कंपनियों और शेयरधारकों के बीच स्थानांतरित करने तथा उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने के तरीके की भी पड़ताल की है। जांच के अनुसार, गेमिंग से अर्जित कथित अपराध की रकम को शेयरधारकों को डिविडेंड (लाभांश) देने और शेयर बायबैक (कंपनी द्वारा अपने ही शेयर वापस खरीदने) के जरिए आगे बढ़ाया गया।

इसके बाद इस रकम को म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, कन्वर्टिबल नोट्स, इक्विटी शेयरों, चल संपत्तियों और महंगी अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।

ईडी का आरोप है कि संपत्तियों को परिवार के ट्रस्टों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से भी रखा गया, ताकि उन्हें बेदाग और वैध स्रोत से अर्जित संपत्ति के रूप में प्रदर्शित किया जा सके। ताजा कार्रवाई में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा रकम, व्यावसायिक दुकानें, एक विला और कई आवासीय संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां शेयरधारकों के परिवार के सदस्यों, निजी फैमिली ट्रस्टों और संबंधित संस्थाओं के नाम पर दर्ज हैं।

पहले 1,906 करोड़ की संपत्तियां अटैच, अब 495 करोड़ की फ्रीज

ईडी ने इस मामले में इससे पहले भी कई चरणों में कार्रवाई की है। एजेंसी के मुताबिक, 7 से 14 मई 2026 और फिर 20 से 21 जून 2026 के बीच गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज के कार्यालय परिसरों तथा कंपनी के निदेशकों और प्रमुख कर्मचारियों के आवासीय परिसरों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया गया था। पीएमएलए की धारा 17 के तहत की गई इन तलाशी में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए। ईडी के अनुसार, ये सामग्री जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बनी हैं।

इससे पहले लगभग 495 करोड़ रुपये की चल संपत्तियों को पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज किया गया था। इसके अलावा 11 लाख रुपये नकद और लगभग 2.30 किलोग्राम वजन की सोने-हीरे की ज्वेलरी तथा बुलियन भी जब्त किए गए थे। ईडी ने इससे पहले लगभग 1,906 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच करने का प्रोविजनल ऑर्डर भी जारी किया था।

ताजा 442.35 करोड़ रुपये की कार्रवाई के बाद एजेंसी के अनुसार, मामले में अब तक अटैच, फ्रीज और जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 2,843 करोड़ रुपये हो गया है।

तेलंगाना की एफआईआर से शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

ईडी ने यह जांच तेलंगाना में विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत धोखाधड़ी के अपराधों का उल्लेख है, जिन्हें पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध माना गया है।

फिलहाल 442.35 करोड़ रुपये की संपत्तियों की कुर्की अस्थायी है। मामले में आगे की जांच जारी है।