विदेशी रेमिटेंस मामले में 394 इकाइयां और 36 प्रोफेशनल्स आयकर विभाग की जांच के दायरे में

Income Tax Department investigates suspicious foreign remittances and Form 15CB certificates

एम. रियाज़ हाशमी/नई दिल्ली

छोटे कारोबार या बिना रिटर्न के बावजूद बड़ी विदेशी रेमिटेंस; 117 कंपनियां सीमावर्ती जिलों में, फॉर्म 15-सीबी जारी करने वाले 36 प्रोफेशनल्स भी जांच में तीन साल में बड़ी विदेशी रेमिटेंस, लेकिन रिकॉर्ड में मामूली कारोबार; विभाग को कई कंपनियां घोषित पते पर भी नहीं मिलीं

विदेश भेजी जा रही संदिग्ध रकम को लेकर आयकर विभाग ने देशव्यापी जांच शुरू की है। डेटा विश्लेषण और जमीनी सत्यापन में ऐसी इकाइयां सामने आई हैं, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में बड़ी रकम विदेश भेजी, जबकि उनका घोषित कारोबार बहुत कम था या उन्होंने आयकर रिटर्न ही दाखिल नहीं किया था। कई इकाइयां अपने घोषित पते पर संचालित होती भी नहीं मिलीं।
इसी आधार पर 394 इकाइयों और 36 प्रोफेशनल्स को विस्तृत सत्यापन के दायरे में लिया गया है। इनमें 117 इकाइयां अंतरराष्ट्रीय सीमा वाले राज्यों के जिलों में स्थित हैं। विभाग ने यह राष्ट्रव्यापी अभियान 18 अगस्त 2026 से शुरू किया है।

कम कारोबार के बावजूद बड़ी विदेशी रेमिटेंस पर जांच

शुरुआती जांच में पाया गया कि कई मामलों में घोषित कारोबार और विदेश भेजी गई रकम में बड़ा अंतर है। भुगतान को माल ढुलाई, सॉफ्टवेयर खरीद और सलाहकार सेवाओं के खर्च के रूप में दर्शाया गया, लेकिन जमीनी गतिविधियां इन बड़े भुगतानों से मेल नहीं खाईं। अब विभाग यह पता लगा रहा है कि इन संस्थाओं के पीछे वास्तविक लोग कौन हैं और रकम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ?
जांच का एक आधार पहले पकड़ा गया फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों का नेटवर्क भी है, जो फर्जी दान या योगदान के जरिये दूसरों के लेन-देन को कागजों पर वैध दिखाने में मदद कर रहा था। इसे ‘अकॉमोडेशन एंट्री’ कहा जाता है।

Form 15CB जारी करने वाले 36 प्रोफेशनल्स की भूमिका की जांच

डेटा विश्लेषण में पाया गया कि बड़ी संख्या में फॉर्म 15-सीबी अपेक्षाकृत कम संख्या वाले प्रोफेशनल्स ने जारी किए। इसलिए 36 प्रोफेशनल्स (चार्टर्ड अकाउंटेंट्स) भी जांच में शामिल हैं।
फॉर्म 15-सीबी में चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेश भेजे जा रहे भुगतान पर लागू टैक्स देनदारी और नियमों का परीक्षण करना होता है। विभाग देख रहा है कि संदिग्ध रेमिटेंस के मामलों में प्रमाणपत्र जारी करने से पहले खातों और जरूरी दस्तावेजों की पर्याप्त जांच की गई या नहीं?
मौजूदा नियमों में संबंधित प्रक्रिया फॉर्म 146 और रूल 220 से जुड़ी है। पुराने नियमों में फॉर्म 15-सीबी को रूल 37-बीबी से जोड़ा गया था। विभाग का कहना है कि प्रोफेशनल्स से केवल औपचारिक प्रमाणपत्र जारी करने की नहीं, बल्कि उचित जांच, सावधानी और पेशेवर विवेक के इस्तेमाल की अपेक्षा है।

फिलहाल विभाग ने जांच के दायरे में आई इकाइयों, प्रोफेशनल्स या विदेश भेजी गई कुल रकम का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। जांच पूरी होने के बाद ही टैक्स उल्लंघन और अन्य अनियमितताओं की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।