
एक आईएएस का इस्तीफ़ा: क्यों छोड़ रहे हैं अफसर नौकरी?
किसी का इस्तीफ़ा देना उसका अपनी स्व-इच्छा का सम्मान करना होता है। समाज के हर कोने में कुछ बुरे तो कुछ अच्छे लोग होते हैं। अच्छे लोग समाज को रास्ता दिखाते हैं। महान दार्शनिक सुकरात ने कहा है कि “दूसरों के साथ अन्याय करने से बेहतर है आप खुद अन्याय सहन करें। एक अच्छा व्यक्ति कभी भी बुराई का जवाब बुराई से नहीं देता।”
यूपी कैडर में एक दर्जन से अधिक आईएएस ने छोड़ी सेवा
उत्तर प्रदेश कैडर में पिछले कुछ वर्षों में लगभग एक दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों ने या तो अपने पद से इस्तीफा (Resignation) दिया है या फिर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ली है।
दिव्या मित्तल: व्यक्तिगत प्राथमिकताएं और सपनों को नया आयाम
हाल के वर्षों में इस्तीफा देने या वीआरएस लेने वाले लोगों में दिव्या मित्तल (2013 बैच) पहली हैं, इन्होंने हाल ही में इस्तीफा दिया। दिव्या ने इसका कारण अपनी सेवा के लगभग 13 वर्ष पूरे होने के बाद व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और अपने सपनों को नया आयाम देने के लिए उठाया गया कदम बताया।
दिव्या मित्तल ने पूरे देश के लोगों का ध्यान उस समय अपनी ओर खींचा था जब वो मिर्ज़ापुर के ज़िलाधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। उन्होंने हलिया ब्लॉक स्थित लहुरियादह गांव में स्वतंत्रता के 75 साल बाद लगभग साढ़े सात दशकों से अधिक समय से पानी से वंचित लोगों के लिए पहली बार नल से जल पहुँचाया था।
अगस्त 2023 में तत्कालीन जिला अधिकारी (DM) दिव्या मित्तल ने जल जीवन मिशन के तहत कठिन पहाड़ी भूगोल को मात देकर इस गांव के 125 से अधिक घरों में पाइपलाइन से पानी पहुंचाया। इस खबर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस दौरान वहां के ग्रामीण जनता ने उनका स्वागत फूल माला पहना कर किया, जिससे लखनऊ में बैठे बड़े अफसर उनसे नाराज हो गए।
इस उद्घाटन समारोह और कार्यक्रम के दौरान भी प्रोटोकॉल को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके बाद उन्हें मिर्जापुर से स्थानांतरित कर दिया गया था। दिव्या को कई महीने तक पोस्टिंग नहीं दी गई। कई महीनों के बाद उन्हें देवरिया का डीएम बनाया गया, जहां से कुछ महीनों के बाद उन्हें वहां से भी हटा दिया गया।
दिव्या ने हमेशा बुराई से लड़ने का काम किया। शायद यही कारण है कि नेताओं को वो कभी काम के लिए मुफ़ीद नहीं लगी। दिव्या की ख़ासियत थी कि आप उन पर दबाव डालकर कोई ग़लत काम नहीं करवा सकते थे।
दिव्या ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने अपने इस सफर और देश सेवा के अपने अनुभवों का जिक्र किया, जो इनके किए गए काम और भारत के लिए इनकी खुली आँखों से देखे गए सपने का विस्तार है।
रींकू सिंह राही: नैतिक आधार पर इस्तीफा, फिर वापसी
रींकू सिंह राही, जो 2022 के अफ़सर हैं, इनकी कहानी हर किसी को प्रेरित करती है। जिन्होंने अपने पद से 2026 में इस्तीफा दिया था। उस समय उनका कारण उन्होंने लंबी अवधि तक महत्वपूर्ण पद या कार्य न मिलने (राजस्व परिषद से संबद्ध रखे जाने) और प्रशासनिक व्यवस्था में घुटन के चलते नैतिक आधार पर इस्तीफा देना बताया था। बाद में उन्होंने इस्तीफ़ा वापस ले लिया। उनकी नई जगह पोस्टिंग भी कर दी गई, पर इसके बाद वह लगातार विवादों में बने हैं।
अनामिका सिंह: व्यक्तिगत और करियर से जुड़े अन्य विकल्प
अनामिका सिंह, 2004 बैच की अफसर हैं, उन्होंने VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के लिए आवेदन किया/सेवा छोड़ी। उनका कारण व्यक्तिगत और करियर से जुड़े अन्य विकल्प बताया गया।
आमोद कुमार: चुनौतियों को स्वीकार करना पसंद
आमोद कुमार, जो किताब पढ़ने के शौकिन हैं, नया काम करना और चुनौतियों को स्वीकार करना उन्हें पसंद है। वह 1995 बैच के अफसर हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के बाद समय से पहले सेवानिवृत्ति (VRS) ली। अखिलेश सरकार में बहुत ताक़तवर रहे, पर बाद में मन मुताबिक़ काम ना मिलना वीआरएस लेने का बड़ा कारण बना।
अभिषेक सिंह: फिल्मी कहानी, कला और राजनीति का सपना
अभिषेक सिंह, जो कि 2011 बैच के आईएएस अफसर रहे, इनकी कहानी भी पूरी फिल्मी है। इन्होंने भी सेवा से इस्तीफा दिया। प्रशासनिक सेवा से इतर कला, अभिनय और अन्य क्षेत्रों में अपनी रुचि व करियर को आगे बढ़ाना मकसद बताया। राजनीति में आने का सपना भी इस्तीफ़ा देने के कारणों में एक था। इनकी पत्नी दुर्गा शक्ति नागपाल आजकल एक जज से बातचीत के कारण विवादों में हैं।
अन्य अधिकारियों के इस्तीफे और वीआरएस
- विकास गोठवाल (2003 बैच): कंसल्टेंसी और अन्य व्यक्तिगत कारणों से।
- विद्या भूषण (2008): चिकित्सीय (Medical) और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया।
- मोहम्मद मुस्तफा (1995): जिन्होंने मायावती के शासन काल में राजा भइया पर कार्रवाई कर खूब सुर्खियां बटोरी थीं, ने काम में अधिक रुचि न होने का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया।
- रेणुका कुमार (1987 बैच) और जुथिका पाटनकर (1988): प्रतिनियुक्ति के दौरान ही वीआरएस के लिए आवेदन किया।
- रिग्ज़िन सैम्पफेल (2003 बैच), राजीव अग्रवाल (1993 बैच) और जी. श्रीनिवासुलु (2005 बैच): निजी क्षेत्रों के अवसरों या व्यक्तिगत/पारिवारिक कारणों से सेवा छोड़ी (इनमें से कुछ के आवेदन और फैसले बाद में भिन्न रहे)।
क्यों छोड़ रहे हैं अफसर नौकरी?
ये सच है कि हर किसी को अपने सपने को जीने का हक है। कुछ तो कॉरपोरेट जगत, पब्लिक पॉलिसी या अन्य क्षेत्रों में नए अवसर तलाशना चाहते थे। तो कुछ कई बार राज्य और केंद्र के बीच एनओसी (NOC) या प्रतिनियुक्ति के मामलों में गतिरोध और मनमुताबिक पोस्टिंग न मिलने के कारण भी इस स्थिति को पहुँच गए।
कई अधिकारियों ने अपने इस्तीफे में पारिवारिक जिम्मेदारियों या स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया है।
बड़ा सवाल: क्या सपने छोड़कर नौकरी छोड़ी जा सकती है?
यहाँ पर सवाल यह उठता है कि आईएएस बनने के सपने को पूरा करने के लिए इन सभी लोगों ने दिन रात एक कर दिया होगा। कई रातें जागकर बिताई होगी। सालों अपने परिवार से दूर रहने का काम किया होगा। ना जाने कितनी इच्छाओं को दमन कर दिया होगा। लेकिन कोई उस वर्षों के देखे सपने को एक पल में कैसे छोड़ सकता है? यह बहुत बड़ा सवाल है, जिसने मुझे इस लेख को लिखने के लिए प्रेरित किया।
नई कहानियां, नए किरदार
यह भी सच है कि कोई कहानी कभी मुक्कमल नहीं होती है। उसमें हमेशा नए किरदार जुड़ते रहते हैं। इन लोगों के जीवन की आने वाली कहानी रोमांचक होगी, ऐसा मेरा यकीन है।
दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे कहते हैं, “अस्तित्व से अधिकतम आनंद और सार्थकता प्राप्त करने का केवल एक ही रहस्य है—खतरे में जीवन जीना।”



