‘भतीजे बाहर, भतीजी भीतर’: BSP उत्तराधिकार की सागा में नया ट्विस्ट मायावती का ‘आखिरी फैसला’, अब दीपिका आनंद का नाम

'भतीजे बाहर, भतीजी भीतर': BSP उत्तराधिकार की सागा में नया ट्विस्ट — मायावती का 'आखिरी फैसला', अब दीपिका आनंद का नाम
मायावती ने BSP उत्तराधिकार को लेकर 'आखिरी फैसला' सुनाया है। भतीजे आकाश और ईशान आनंद को किसी भी राजनीतिक पद से बाहर रखा गया है, जबकि बेटी दीपिका आनंद को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

‘भतीजे बाहर, भतीजी भीतर’: BSP उत्तराधिकार की सागा में नया ट्विस्ट — मायावती का ‘आखिरी फैसला’, अब दीपिका आनंद का नाम


लखनऊ — 12 सितंबर, 2026 — उत्तर प्रदेश की राजनीति में BSP के भीतर चल रहा उत्तराधिकार का नाटक शनिवार को नए मोड़ पर पहुंच गया। पार्टी प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावनात्मक पोस्ट कर घोषणा की कि उनके छोटे भाई और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के बेटों आकाश आनंद और ईशान आनंद को अब BSP में छोटा हो या बड़ा, कोई भी राजनीतिक पद नहीं दिया जाएगा। उन्होंने इसे अपना ‘आखिरी फैसला’ और ‘संकल्प’ बताया, और यह भी कहा कि भतीजों के बच्चों को भी पार्टी में मौका नहीं मिलेगा।

दरवाजा खुला किसके लिए? वकालत पढ़ रही हैं दीपिका

फैसले की सबसे चौंकाने वाली लाइन आगे है। मायावती ने लिखा कि अगर आनंद कुमार को उनके साथ काम करते हुए मदद के लिए किसी और सदस्य की जरूरत हो, तो मौजूदा राजनीतिक हालात में वे अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं और फिर उनकी ईमानदारी, वफादारी और क्षमता को देखते हुए जरूरत के हिसाब से अपनी जिम्मेदारियां उन्हें सौंप सकते हैं। यानी, साफ संकेत हैं कि अगर परिवार में किसी को आगे बढ़ाना है, तो वह दीपिका ही होंगी।

कौन हैं दीपिका आनंद?

दीपिका आनंद अब तक पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से दूर रही हैं न कभी किसी कार्यक्रम में दिखीं, न राजनीति में कोई दिलचस्पी दिखाई। वह फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं और उनकी उम्र शुरुआती 20 के दशक में मानी जाती है। उनके पिता आनंद कुमार BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और हमेशा पर्दे के पीछे से काम करने वाले ताकतवर नेता माने जाते हैं। अचानक जिस नाम पर अब तक कोई चर्चा तक नहीं थी, उसी को उत्तराधिकार की दौड़ में रख दिया गया है।

और अगर दीपिका राजनीति के लिए तैयार नहीं हुईं?

मायावती ने इसका जवाब भी रखा है ऐसे में पार्टी की सहमति से किसी दलित समाज के ‘मिशनरी कार्यकर्ता’ को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

तीन साल में कैसे बदला पूरा मंजर

मायावती का यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि कुछ ही साल पहले बड़े भतीजे आकाश आनंद को उन्होंने खुद राजनीतिक उत्तराधिकारी तक घोषित कर दिया था। लेकिन पिछले तीन साल में आकाश तीन बार पदों से हटे 3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारियों से मुक्त हुए और 10 सितंबर को पार्टी से ही ‘पूरी तरह मुक्त’ कर दिए गए। दूसरे भतीजे ईशान आनंद को राजनीति में एंट्री दी गई और जिम्मेदारियां भी मिलीं, लेकिन अब उनके लिए भी दरवाजा बंद कर दिया गया है। यानी आकाश से ईशान और ईशान से अब दीपिका मायावती की उत्तराधिकार की कहानी हर कुछ महीनों में एक नया मोड़ लेती रही है।

पारिवारवाद के खिलाफ रुख, 2027 चुनाव से पहले नए चेहरे

मायावती ने इस फैसले को पारिवारवाद के खिलाफ अपने रुख के तौर पर पेश किया है और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पार्टी में नए और युवा चेहरों को आगे लाने की बात की है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से फेक न्यूज से बचने की अपील भी की है। बड़ा सवाल अब यही है क्या राजनीति से दूर रहीं दीपिका इस दावत को कबूल करेंगी, या BSP की कमान अंततः किसी पारिवार से बाहर के कार्यकर्ता के हाथ में जाएगी?