
काशी अन्नक्षेत्र में चाकू के साथ पकड़ा गया युवक निकला भूखा मजदूर: मुगलसराय से पैदल आया था, पुलिस ने 6 घंटे जांचने के बाद खिलाया और घर भेजा
वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम के हाई-सिक्योरिटी जोन में अन्नपूर्णा मंदिर के पास चाकू के साथ पकड़े गए युवक की 6 घंटे तक LIU, ATS और IB ने की जांच; जांच में निकला भूखा मजदूर, पुलिस ने खिलाया और घर भेजा
वाराणसी । 13 सितंबर, 2026 काशी विश्वनाथ धाम के हाई-सिक्योरिटी जोन में शनिवार को कुछ घंटों के लिए हड़कंप मच गया लेकिन जांच खत्म होने तक सामने आई कहानी घटना से भी बड़ी थी। अन्नपूर्णा मंदिर के अन्नक्षेत्र (मुफ्त भोजनालय) के पास एक युवक सिर पर टोपी लिए घूम रहा था। चेकिंग में उसके पास से चाकू निकलते ही सुरक्षाकर्मी सतर्क हो गए और उसे दशाश्वमेध थाने ले जाया गया।
पूछताछ में खुली असली कहानी – भूख
शुरुआत में युवक ने अपना नाम शाहिद जमाल बताया और कहा कि वह चंदौली जिले के मुगलसराय का रहने वाला है। गहरी पूछताछ में पता चला कि वह असल में सत्यूर रहमान (28) है, जो शादी-ब्याह के आयोजनों में कैटररों के लिए मुर्गा/सब्जी काटने का काम करता है चाकू उसी काम का था। उसका कहना था कि लेबर मंडी में घंटों काम की तलाश के बाद भी दिहाड़ी नहीं मिली, जेब में खाने के पैसे नहीं थे, इसलिए भूख से बेहाल होकर वह पैदल मुगलसराय से काशी पहुंच गया और अन्नक्षेत्र का रुख किया जहां उसे पहले भी एक बार भरपेट भोजन मिल चुका था।
एक नहीं, कई एजेंसियों की छह घंटे की छानबीन
हाई-सिक्योरिटी जोन में पकड़े जाने की वजह से मामला हल्का नहीं लिया गया। दशाश्वमेध पुलिस के अलावा लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU), ATS और IB समेत कई एजेंसियों की टीमों ने छह घंटे तक उससे पूछताछ की। चंदौली पुलिस से क्रॉस-चेक करने पर उसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं मिला। इसी दौरान परिजनों से पूछताछ में उसका असली नाम सत्यूर रहमान सामने आया, साथ में यह भी पता चला कि वह मानसिक रूप से काफी कमजोर है, नशे का आदी है और छह महीने पहले शादी के कुछ ही समय बाद उसकी पत्नी मायके चली गई थी। उसके पिता कमरुद्दीन बुनकरी करते हैं।
कोई केस दर्ज नहीं, मिला भोजन और राहत
एजेंसियों की संयुक्त जांच में किसी भी तरह की संदिग्धता या साजिश की बात खारिज हो गई युवक के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। दिन की पूरी कसमसाम के बाद पुलिस ने उसे अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र से भोजन कराया और शाम को परिवार के लोगों को बुलाकर उसे घर के हवाले कर दिया। एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान त्रिपाठी ने पुष्टि की कि छानबीन में युवक सामान्य मजदूर निकलने के बाद उसे छोड़ दिया गया है।
यह घटना इस बात की मिसाल बनकर सामने आई कि सुरक्षा के मामले में पुलिस कितनी सतर्क है और उतनी ही मिसाल इस बात की भी कि संदेह के घंटों बाद भी कानून का आखिरी जवाब इंसानियत ही हो सकता है: एक भूखे आदमी को भरपेट खाना और घर लौटने का रास्ता।



