
स्नेहल चौरसिया | नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ आज एक अहम फैसला सुनाने जा रही है। यह फैसला इस बात पर होगा कि कानून में ‘उद्योग’ (इंडस्ट्री) की परिभाषा क्या होगी और किन संस्थानों को इसके दायरे में माना जाएगा।
‘इंडस्ट्री’ की परिभाषा से जुड़ा मामला क्या है?
यह मामला 1978 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, क्लबों और सरकारी कल्याणकारी विभागों को भी उद्योग की श्रेणी में रखा गया था। इससे इन संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को श्रम कानूनों के तहत सुरक्षा और अधिकार मिले थे।
अब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की पीठ यह तय करेगी कि पुरानी परिभाषा को बरकरार रखा जाए या उसमें बदलाव किया जाए।
अस्पतालों, स्कूलों और सरकारी विभागों पर क्यों पड़ेगा असर?
इस फैसले का असर लाखों कर्मचारियों, सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों पर पड़ सकता है। साथ ही, 2020 की औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code) के लागू होने के बाद भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भविष्य में श्रम कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर नई दिशा तय कर सकता है।


