
सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में जल्द ही बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। अगले महीने में कभी भी बदलाव की संभावना है। इसमें कई कद्दावर मंत्री बाहर होंगे। नए चेहरों और महिलाओं को ज्यादा स्थान हासिल होगा।
पीयूष गोयल की नई भूमिका से क्यों बढ़ी कैबिनेट फेरबदल की चर्चा?
सबसे बड़ा पेंच पीयूष गोयल को लेकर फंस गया है। भाजपा में एक व्यक्ति एक पद का सिद्धांत है। पेंच यही फंसा है। संगठन में कोषाध्यक्ष रहते हुए केंद्रीय मंत्री बनाए रखना संगठन में गलत संदेश देगा। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मलहोत्रा भी दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष बनाए गए हैं। उन्हे भी मंत्री बनाए रखना संभव नहीं होगा।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन साफ कर चुके हैं कि, संगठन और सरकार में ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओं को मौका मिले। इसके लिए जरूरी है कि एक व्यक्ति को एक से ज्यादा पद नहीं दिए जाएँ। ऐसे में पीयूष गोयल को मंत्री बनाए रखना संभव नहीं है। दूसरी प्रमुख बात है संघ और भाजपा के बीच विगत कई महीनों के संवाद में संघ इस बात पर जोर देता आ रहा है कि मूल कैडर के लोगों को ही प्राथमिकता दी जाए। हालांकि अन्य दलों से आए लोगों को भी जिम्मेदारी दी जाए, लेकिन बड़े पद पर कैडर के लोगों को ही रखा जाए।
हरदीप पुरी और एस. जयशंकर को लेकर क्या है अटकल?
ऐसे में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, विदेश मंत्री एस.जयशंकर आदि की जगह कैडर के लोगों को मंत्री बनाया जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि आधा दर्जन से ज्यादा कद्दावार मंत्रियों के विकल्प पर सरकार के अंदर विमर्श हो रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अपने विकल्प का नाम उन्ही मंत्रियों से सुझवाया जा रहा है जिन्हे मंत्री मंडल फेर बदल में हटाया जाना है।


