राघवेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली : बीते दिनों जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में हुए आंदोलन में शामिल गालीबाज प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माफ कर दिया है। अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों से गलती हो जाती है। जैसे दाँतों के बीच जीभ आ जाती है लेकिन दांत और जीभ दोनों हमारे हैं। उसी तरह से बच्चे भी तो अपने ही हैं। बच्चों को कोर्ट कचहरी के चक्कर कटवाने की जगह उनको समझाने और सही रास्ता दिखाने की जरूरत है।
आंदोलन के दौरान तमाम Gen-Z युवाओं ने विरोध प्रदर्शन में भाषा की सारी सीमाएं लांघी थीं। न सिर्फ बैनर और पोस्टर पर बने कई कार्टून बेहद निजी और अश्लीलता से भरपूर थे, बल्कि उनके नारे और स्लोगन भी बेहद फूहड़ किस्म के थे। एक लड़की का वीडियो तो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुआ था जिसमें वो प्रधानमंत्री मोदी और उनकी स्वर्गीय माता के लिए गली गलौच की भाषा बोल रही है। इसी तरह अन्य कई घटिया कंटेंट वाले वीडियो भी खूब वायरल हुए थे। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बाद माफी मांगने का दौर चला। जितने लोग अपने घटिया कंटेंट और भाषा की वजह से वायरल हुए थे लगभग उन सभी ने बाद में माफी मांगते हुए अपने अपने वीडियो पोस्ट किए। प्रधानमंत्री से माफी मांगी और कहा कि आगे से वो ऐसे वीडियो नहीं बनाएंगे। उन्हें माफ किया जाए। शायद इस कवायद के पीछे उनका हृदय परिवर्तन कम, संभावित कार्रवाई का डर ज्यादा होगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने बड़ा दिल दिखाते हुए सभी गालीबाज प्रदर्शनकारियों को माफ कर दिया। ये प्रधानमंत्री का बड़प्पन है। Gen-Z पीएम का नजरिया बदला हुआ है। अब मोदी शुरुआत में मित्रों नहीं, फ्रेंड्स बोलते हैं। हालिया जारी वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- “हाय फ्रेंड्स.. आज तो मन करता है आपसे ही बातें करूं। जंतर मंतर पर जो कुछ भी हुआ, देश और दुनिया से देखा है। कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी भद्दी गलियाँ बोलीं। किसी भी सभ्य समाज को शोभा न दें ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया। मुझे गलियाँ दी गईं, मेरी स्वर्गीय माता को भी गालियाँ दी गईं। न जाने कितना भद्दा स्वरूप था”
मोदी ने आगे कहा “बचपन में गलतियाँ होती हैं और सुधरने का अवसर भी होता है। यही तो बचपना है। मैं समाज के अंदर जो आक्रोश है उसे भली भांति समझ सकता हूँ। हमारी बच्चियां ऐसी भाषा कैसे बोल सकती हैं ? लेकिन ये समय है इन बच्चों को गले लगा कर राह दिखाने का। ये गुमराह बच्चे हैं इनको राह दिखाना हमारा काम है। सजा देना, अदालतों के चक्कर लगवाना, समाज में उन्हें प्रताड़ित करना, इससे हम परिस्थितियाँ नहीं बदल पाएंगे। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूँ। समाज भी इसे स्वीकार करे। कभी कभी दांतों तले हमारी जीभ आ जाती है खून निकल आता है लेकिन हम दाँत तोड़ते नहीं हैं, क्योंकि दाँत हमारे हैं और जीभ भी हमारी है। बच्चे भी हमारे हैं”
23 जुलाई के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर अपने 5 वीडियो पोस्ट किए जिनमें वो Gen-Z, छात्रों और युवाओं के सामने अपनी बात सीधे तौर पर रख रहे हैं। उन्हीं के अंदाज में बात कर रहे हैं जिससे उनकी बात प्रभावी ढंग से पहुंच सके। सेल्फी मोड में वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। मतलब तौर तरीके सब Gen-Z स्टाइल वाले।
मोदी को ये मालूम है कि नई उम्र के बच्चों की सोच भी नई है। हर इश्यू पर नए तरह से सोचते हैं और अपनी ही तरह की बातों को समझते हैं। जब तक युवाओं से युवा बन कर बात नहीं होगी, तब तक बात नहीं बनेगी। अब तक गाली के साथ वीडियो बनाने वाले और फूहड़ कंटेंट क्रिएटर्स के ऊपर कार्रवाई की तलवार लटक रही थी, पीएम मोदी ने बड़ा दिल दिखाते हुए उन्हें माफ कर दिया। ऐसे में उन सबको राहत मिली जो अपनी भद्दी भाषा और गालियों की वजह से वायरल थे। सोशल मीडिया पर मोदी की वीडियोज को जितना अच्छा रिस्पांस मिला है उससे एक बात और साफ है कि देखने सुनने वाले बात समझ रहे हैं और दूसरों के साथ शेयर भी कर रहे हैं।
