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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, शीतकालीन सत्र में राजद्रोह क़ानून पर कर सकते हैं कुछ फैसला

केंद्र सरकार संसद के आने वाले शीतकालीन सत्र में राजद्रोह क़ानून को लेकर कोई  फैसला कर सकती है। इस तर्क के साथ केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले से जुड़ी सुनवाई टालने का आग्रह किया था। अब अदालत ने सोमवार को केंद्र के आग्रह को स्वीकार करते हुए जनवरी के दूसरे हफ्ते में सुनवाई का फैसला किया है। हालांकि, तब तक केंद्र सरकार को राजद्रोह क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट की पहली से लगी  रोक का पालन करना होगा।

सुनवाई के दौरान आज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के सुनवाई टालने के आग्रह को स्वीकार कर लिया। जिन याचिकाओं में पहले नोटिस जारी नहीं हुआ, अब उनमें भी नोटिस जारी किया गया है। केंद्र सरकार 6 हफ्ते में इनका जवाब देगी। सुप्रीम कोर्ट अगले साल जनवरी के दूसरे हफ्ते में इस मामले पर दोबारा सुनवाई करेगा।

प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच सुनवाई कर रही है। याद रहे मई में सर्वोच्च अदालत ने राजद्रोह कानून पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को राजद्रोह कानून की आईपीसी की धारा 124ए के तहत कोई मामला दर्ज नहीं करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सरकार को आईपीसी की धारा 124ए के प्रावधानों पर समीक्षा की अनुमति भी दी है।

हालांकि, अदालत ने कहा कि राजद्रोह कानून की समीक्षा होने तक सरकारें धारा 124ए में कोई केस दर्ज न करे और न ही इसमें कोई जांच करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कि अगर राजद्रोह के मामले दर्ज किए जाते हैं, तो वे पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र हैं। अदालतों को ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करना होगा।

भारत जोड़ो यात्रा रोक राहुल गांधी ने मोरबी हादसा पीड़ितों को दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजलि  

गुजरात के मोरबी में पुल टूटने से हुए हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा रुकवाकर दो मिनट का मौन  रखा। बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल कार्यकर्ता और आम लोग रुक गए और दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी।

राहुल गांधी और पार्टी के अन्य नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान गुजरात के मोरबी शहर में पुल हादसे में मारे गए लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखा। बाद में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर और सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ट्वीट में बताया – ‘भारत जोड़ो यात्रा का चौथा दिन शादनगर में सुबह साढ़े पांच बजे शुरू हुआ। भारत यात्रियों ने सरदार पटेल और इंदिरा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की और फिर गुजरात में मोरबी पुल त्रासदी में मारे गए लोगों की याद में दो मिनट का मौन रखा।’

इससे पहले पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ राहुल गांधी ने सोमवार सुबह यहां से पदयात्रा शुरू की और उनके करीब 22 किलोमीटर की दूरी तय करने का कार्यक्रम है। यह तेलंगाना में भारत जोड़ो यात्रा का छठा दिन है।

सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती वाली याचिकाओं पर 6 दिसंबर को होगी सुनवाई

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून 2019 (सीएए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अगली सुनवाई के लिए 6 दिसंबर को तारीख तय की है।

प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सोमवार को कहा कि तीन हफ्ते में असम और त्रिपुरा को जवाब दाखिल करना है। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील पल्लवी प्रताप और केंद्र की ओर से कनु अग्रवाल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। दोनों सारे दस्तावेज एक साथ कर मामलों का बंटवारा करेंगे और पक्षों को देंगे।

अदालत ने सभी पक्षों को तीन पेज की लिखित दलील देने को कहा है। अगले दो  हफ्ते में याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है। कुल 232 याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।

सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगाने से साफ तौर पर इनकार कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था और जवाब मांगा था।

याद रहे सीएए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के लिए कांग्रेस, त्रिपुरा राजपरिवार के वंशज प्रद्योत किशोर देव बर्मन और असम गण परिषद,  इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, असदुद्दीन औवैसी, सीपीआई, डीएमके, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू), पीस पार्टी, गैर सरकारी संगठन रिहाई मंच और सिटिजंस अगेंस्ट हेट, अधिवक्ता एमएल शर्मा और कानून के कई छात्रों की तरफ से याचिकाएं दायर की गईं हैं।

सुप्रीम कोर्ट का टू फिंगर टेस्ट पर बड़ा फैसला; ऐसा करने वाले दोषी, एमबीबीएस से हटेगा  

रोक के बावजूद यौन उत्पीड़न पीड़ितों के टू-फिंगर टेस्ट जारी रहने पर सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को सख्त नाराजगी जताई है। इस टेस्ट पर सर्वोच्च अदालत ने 2013 पर पाबंदी लगा दी थी। सर्वोच्च अदालत ने एक बड़े फैसले में टू-फिंगर टेस्ट करने वाले व्यक्तियों को कदाचार का दोषी मानने और मेडिकल कॉलेजों में अध्ययन सामग्री से टू-फिंगर टेस्ट हटाने का आदेश दिया है।

सर्वोच्च अदालत ने इस मामले की सुनवाई पर कहा कि टू-फिंगर टेस्ट पीड़िता को दोबारा एक आघात से गुजरने पर मजबूर करता है। सर्वोच्च अदालत ने चेतावनी दी है कि दुष्कर्म के मामलों में टू-फिंगर टेस्ट करने वाले व्यक्तियों को कदाचार का दोषी माना जाएगा। सर्वोच्च अदालत ने एक आरोपी को बरी करने के हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

यही नहीं अदालत ने मेडिकल कॉलेजों में अध्ययन सामग्री से टू-फिंगर टेस्ट को हटाने का आदेश दिया है और कहा कि बलात्कार पीड़िता की जांच की अवैज्ञानिक आक्रामक विधि यौन उत्पीड़न वाली महिला को फिर से आघात पहुंचाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टू फिंगर टेस्ट इस पितृसत्तात्मक सोच पर आधारित है कि यौन रूप से सक्रिय महिला से रेप नहीं हो सकता।

एक मामले में फैसला सुनाते हुए एक दोषसिद्धि को बहाल करते हुए टू-फिंगर टेस्ट पर नाराजगी जाहिर करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा पीड़िता के यौन इतिहास के साक्ष्य मामले के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में इस प्रथा को असंवैधानिक माना था और कहा था कि ये टेस्ट नहीं किया जाना चाहिए।

गुजरात के मोरबी में पुल टूटने से मरने वालों की संख्या 140 के पार, कई घायल

गुजरात के मोरबी में पुल टूटने से हुए हादसे में अब तक 140 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मरने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे भी हैं। यह हादसा रविवार देर शाम तब हुआ जब बड़ी संख्या में लोग इसके ऊपर छुट्टी के दिन मस्ती के लिए थे। करीब 140 साल पुराने इस पुल को पांच दिन पहले ही मरम्मत के बाद खोला गया था।  रेस्क्यू जारी है। आरोप हैं कि बिना जांच के ही पुल को जनता के लिए खोल दिया गया जो हादसे का कारण बना। सरकार ने हादसे के जांच आदेश दिए हैं।  जिला प्रशासन ने लोगों की मदद के लिए 02822243300 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।

अधिकारियों के मुताबिक हाल ही में मरम्मत के बाद जनता के लिए चार दिन पहले ही फिर से खोले गए इस पुल पर लोगों की काफी भीड़ थी। उन्होंने बताया कि पुल शाम करीब साढ़े छह बजे टूट गया जिससे 400 के करीब लोग नदी में में जा गिरे। अभी तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक 140 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। भारतीय नौसेना के 50 कर्मियों के साथ एनडीआरएफ की 3 प्लाटून, भारतीय नौसेना के 30 जवानों को बचाव कार्य में लगाया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि जब पुल टूटकर गिरा तब उस पर कई महिलाएं, बच्चे और अन्य लोग थे, जो नीचे पानी में गिर गए। दीपावली की छुट्टी और रविवार होने के कारण प्रमुख पर्यटक आकर्षण पुल पर पर्यटकों की भीड़ थी। यह पुल पिछले 6 महीने से बंद था और 26 अक्टूबर को गुजराती नववर्ष दिवस पर जनता के लिए इसे फिर से खोला गया था।

ये पुल हाल में ही करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से दोबारा तैयार किया गया था।  दिवाली पर इसे आम जनता के लिए खोला गया था।  जिला प्रशासन ने लोगों की मदद के लिए 02822243300 ये हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इसके अलावा घायलों के इलाज के लिए मोरबी और राजकोट हॉस्पिटल में इमरजेंसी वार्ड बनाया गया है।

इस बीच केंद्र सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के निकट परिजनों को पीएमएनआरएफ के तहत दो लाख रुपए देने की घोषणा की है। वहीं प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये दिए जाएंगे, जबकि राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपए और प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये का मुआवजा देगी।

रेस्क्यू के लिए एसडीआरएफ औरएनडीआरएफ की टीमें मौजूद घटनास्थल पर हैं।  मोरबी सस्पेंशन ब्रिज घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है।  इसने राजकुमार बेनीवाल, आईएएस नगर प्रशासन आयुक्त श्री केएम पटेल, मुख्य अभियंता गुणवत्ता नियंत्रण), गोपाल टैंक, एचओडी स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज, अहमदाबाद, संदीप वसावा, सचिव सड़क और भवन, सुभाष त्रिवेदी, आईजी- सीआईडी क्राइम को जिम्मेदारी दी गई है।

मुर्मू, मोदी, राहुल सहित नेताओं ने मोरबी हादसे पर दुःख जताया; कांग्रेस ने पूछे सरकार से कई सवाल

गुजरात के मोरबी में हुए पुल हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अनेक नेताओं ने गहरा दुख जताया है और मरने वालों के परिजनों से संवेदना जताई है। इस बीच हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कांग्रेस ने  गुजरात सरकार पर निशाना साधा है और पूछा कि कुछ दिन पहले ही इस पुल को मरम्मत करके खोला गया तो यह कैसे गिर गया और इतने लोगों की जान चली गयी।

कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने इसे मानव निर्मित त्रासदी बताया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सवाल पूछा कि क्या गुजरात के मोरबी जिले में माच्छू नदी पर बने केबल पुल का गिरना दैवीय घटना है या धोखाधड़ी का कृत्य। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उसी वाक्य को दोहरा रहे थे जिसे उन्होंने 31 मार्च, 2016 को कोलकाता में विवेकानंद रोड फ्लाईओवर गिरने के बाद पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर कटाक्ष करते हुए एक रैली में इस्तेमाल किया था। उस घटना में भ्री कई लोग मारे गए थे।

भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य सुरजेवाला ने कई ट्वीट करके कहा – ‘मोरबी पुल हादसे में गई अनगिनत जानों की दर्दनाक खबर ने पूरे देश का दिल दहला दिया है। सभी शोक संतप्त परिवारों को संवेदनाएं। यह प्राकृतिक हादसा नहीं, मानव निर्मित त्रासदी है। गुजरात की भाजपा सरकार इस जघन्य अपराध की सीधे-सीधे दोषी है।’

उन्होंने कहा – ‘प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री गुजराती भाई बहनों की ज़िंदगी की क़ीमत 2 लाख रुपये लगा कर अपनी जिम्मेवारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और मोरबी विधायक और मंत्री बृजेश मेरजा को बताना होगा जब ये पुल 26 अक्टूबर को ही मरम्मत के बाद खोला गया तो पुल कैसे गिर गया?’

इस बीच हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अनेक नेताओं ने गहरा दुख जताया है और मरने वालों के परिजनों से संवेदना जताई है। सभी ने घायलों के जल्दी स्वस्थ होने की कामना की है।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी सभी को सुरक्षित बचाए जाने की ईश्वर से प्रार्थना की है। उप राष्ट्रपति सचिवालय ने धनखड़ के हवाले से एक ट्वीट में कहा, ‘गुजरात के मोरबी में दुखद घटना के बारे में सुनकर व्यथित हूं। मैं सभी के सुरक्षित बचने और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। मेरी संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैं।’

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट में कहा – ‘गुजरात से बेहद दुःखद खबर मिल रही है। मोरबी में ब्रिज टूट जाने से कई लोगों के नदी में गिर जाने की खबर है। भगवान से उनकी जान और स्वास्थ्य की प्रार्थना करता हूं।’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे में लोगों के हताहत होने पर दुख जताया है।  उन्होंने ट्वीट में कहा – ‘मोरबी में हुए हादसे से अत्यंत दुखी हूं। मैंने गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी और अन्य अधिकारियों से बात की है। स्थानीय प्रशासन पूरी तत्परता से राहत कार्य में लगा है, एनडीआरएफ की टीम भी शीघ्र ही घटनास्थल पर पहुंच रही है। प्रशासन को घायलों को तुरंत उपचार देने के निर्देश दिये गये हैं।’

मस्क के मालिक बनने के बाद ट्विटर से हटाए गए तीन अधिकारियों को मिलेंगे 104 मिलियन डॉलर!

एलन मस्क के ट्वीटर का माइलक बनने के बाद बाहर किये गए तीन शीर्ष अधिकारी अच्छा ख़ासा पैसा लेकर जाएंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक नियमों के मुताबिक यह अधिकारी 104 मिलियन डॉलर से ज्यादा पैसा लेने के अधिकारी हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्विटर के सीईओ पराग अग्रवाल, जो एक साल पहले ही इस पद पर नियुक्त हुए थे, करीब 50 मिलियन डॉलर (411 करोड़ रुपये भारतीय मुद्रा) के पात्र हैं।

उनके अलावा मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) नेड सहगल और कानूनी, नीति और ट्रस्ट की प्रमुख विजया गड्डे भी क्रमशः 37 मिलियन डॉलर और 17 मिलियन डॉलर के पात्र हैं।

इस बीच एलन मस्क ने एक ट्वीट में कहा है कि सभी पक्षों को ट्विटर पर समाहित करने के लिए वह कंटेंट मॉडरेशन काउंसिल बनाएंगे। इस काउंसिल के निर्णय लेने से पहले ट्विटर पर कंटेंट या खातों (अकाउंट्स) को लेकर कोई बड़ा निर्णय नहीं होगा।  एलन मस्क ने ट्वीट में कहा – ‘पक्षी मुक्त है। अच्छे समय को जारी रखें।’

बिहार के औरंगाबाद में छठ त्यौहार के लिए प्रसाद बनाते हुए आग लगी, 30 लोग झुलसे

बिहार के औरंगाबाद में छठ त्यौहार के लिए प्रसाद बनाते समय एक घर में आग लगने से 30 से ज्यादा लोग झुलस गए जिनमें सात पुलिस कर्मी भी शामिल हैं। यह आग एलपीजी सिलेंडर के फटने से लगी। झुलसे  हालत गंभीर बताई। हादसा शनिवार तड़के हुआ।

जानकारी के मुताबिक शॉर्ट सर्किट की वजह से सिलेंडर फट गया। इसके बाद लगी आग में 30 से ज्यादा लोग झुलस गए जिनमें कई की हालत खराब है। घायलों में सात पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। सभी को अस्पताल में भर्ती किया गया है। यह घटना नगर थाना क्षेत्र के शाहगंज मोहल्ले के वार्ड नं 24 की है जहाँ तड़के करीब ढाई बजे एक घर में छठ पर्व मनाया जा था।

परिवार के सदस्य प्रसाद बना रहे थे कि अचानक शार्ट सर्किट के कारण सिलेंडर में ब्लास्ट हो गया। इससे वहां आग लग गयी। गैस रिसने से आग तेजी से आग भड़क गई। इसे के बाद वहां भगदड़ मच गयी। लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन उसपर काबू नहीं पा सके।

इस बीच किसी ने पुलिस और दमकल को सूचना दी। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और दमकल टीम आग बुझाने की कोशिश  जल्दी ही आग ने पूरे घर को चपेट में ले लिया। इस बीच वहां ब्लास्ट हो गया। हादसे में 30 से अधिक लोग झुलस कर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को औरंगाबाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

चिंतन शिविर का दूसरा दिन, पीएम मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर रहे है संबोधित

हरियाणा के सूरजकुंड फरीदाबाद जिले में चल रहे सभी राज्यों के गृह मंत्रियों के चिंतन शिविर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित कर रहे हैं। दो दिवसीय चिंतन शिविर का आज अंतिम दिन हैं।

सूरजकुंड में चर रहे चिंतन शिविर में करीब 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया हैं। इसके अलावा 16 राज्यों से डिप्टी सीएम और गृह मंत्री भी इसका हिस्सा बने हैं। इसकी अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं।

पीएम ने कहा कि, आजकल देश में उत्सव का माहौल है ओणम, दुर्गा पूजा, दशहरा और दीपावली सहित अनेक उत्सवों को देशवासियों ने सौहार्द से मनाया हैं। और अभी छठ पूजा सहित कई अन्य त्योहार भी हैं। विभिन्न चुनौतियों के बीच इन त्योहारों में देश की एकता का सशक्त होना आपकी तैयारियों का भी प्रतिबिंब हैं।

उन्होंने आगे कहा कि, कानून और व्यवस्था राज्यों की जिम्मेदारी है, लेकिन यह राष्ट्र की एकता और अखंडता से भी जुड़े हुए हैं। राज्य एक-दूसरे से सीख सकते है, एक-दूसरे से प्रेरणा ले सकते हैं और देश की बेहतरी के लिए एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं। यह संविधान की भावना है और हमारे नागरिकों के प्रति हमारा कर्तव्य हैं।

पीएम ने कहा कि, आजादी का अमृतकाल हमारे सामने हैं। और आने वाले 25 वर्ष देश में एक अमृत पीढ़ी के निर्माण के हैं। और यह अमृत पीढ़ी पंच प्राणों के संकल्पों को धारण करके निर्मित होगी। विकसित भारत का निर्माण, गुलामी की हर सोच से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और एकजुटता, और नागरिक कर्तव्य इन पंच प्राणों का महत्व आप सभी जानते हैं, समझते हैं। ये एक विराट संकल्प है, जिसको सिर्फ और सिर्फ सबके प्रयासों से ही सिद्ध किया जा सकता हैं।

राज्य सरकार से केंद्रीय जांच एजेंसियों का सहयोग करने की भी अपील की है और कहा कि कई बार केंद्रीय एजेंसियों को कई राज्यों में एक साथ जांच करनी पड़ती है, दूसरे देशों में भी जाना पड़ता है। इसलिए हर राज्य का दायित्व है कि चाहे राज्य की एजेंसी हो या केंद्र की एजेंसी हो सभी एजेंसियों को एक-दूसरे को पूरा सहयोग देना चाहिए।

आपको बता दे, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 अक्टूबर को चिंतन शिविर को संबोधित किया था। और उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए कहा था कि वर्ष 2024 तक हर राज्य में एनआईए का ऑफिस होगा। हमारे संविधान में कानून-व्यवस्था को संभालने का जिम्मा राज्य को दिया गया है, लेकिन अब तकनीक के बढ़ावे के साथ कई ऐसे कानून भी अस्तित्व में आए हैं जिनकी कोई भी सीमा नहीं हैं। और सीमा रहित अपराधों का मुकाबला करने के लिए सभी राज्यों को इस पर रणनीति बनानी होगी।

ट्विटर के मालिक बने एलन मस्क, आते ही चार शीर्ष अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाया

आखिर काफी लंबी जद्दोजहद के बाद एलन मस्क ने सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर का जिम्मा संभाल लिया। ट्विटर का नया मालिक बनते ही मस्क ने कंपनी के चार शीर्ष कार्यकारी अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें सीईओ पराग अग्रवाल, कानूनी मामलों के कार्यकारी अधिकारी विजय गड्डे, मुख्य वित्तीय अधिकारी नेड सहगल और जनरल काउंसल सियान एजेंट हैं।

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक पिछले साल ट्विटर के सीईओ नियुक्त किए गए अग्रवाल की मस्क के साथ सार्वजनिक और निजी रूप से कहासुनी हो गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक शेयरधारकों को प्रति शेयर 54.20 डॉलर का भुगतान किया जाएगा, और ट्विटर अब एक निजी कंपनी के रूप में काम करेगा।

बता दें कि अमेरिका की डेलावेयर कोर्ट ने एलन मस्क और ट्विटर की कानूनी लड़ाई पर कुछ समय के लिए विराम लगाते हुए ट्विटर खरीद की डील को पूरा करने के लिए एलन मस्क को 28 अक्टूबर, 2022 शाम पांच बजे तक का समय दिया था। इसे उन्होंने अब पूरा कर लिया है।

ट्विटर का मालिक बनते ही मस्क ने चार बड़े अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। सियान एजेट को इमारत से बाहर निकाला गया जो साल 2012 से कंपनी से जुड़े हुए थे। इसी तरह अग्रवाल पिछले साल नवंबर में कंपनी के सह-संस्थापक जैक डोर्सी के इस्तीफे के बाद ट्विटर का सीईओ नियुक्त किया गया था।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बॉम्बे और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके अग्रवाल ने एक दशक से अधिक समय पहले ट्विटर में नौकरी शुरू की थी. उस समय कंपनी में 1,000 से भी कम कर्मचारी हुआ करते थे।