तहलका डेस्क।
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिल रहा है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड बढ़त ने न केवल चुनावी समीकरण बदल दिए हैं, बल्कि राज्य के सत्ता केंद्रों, कालीघाट और नबान्न पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम करने को मजबूर कर दिया है।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा 195 सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करती दिख रही है, जबकि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस महज 92 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। इस राजनीतिक उलटफेर ने सड़कों पर भावनाओं का ज्वार ला दिया है।
दोपहर होते-होते मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निजी आवास कालीघाट के बाहर स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने वहां पहुंचकर “जय श्री राम” के नारों से माहौल गरमा दिया। सत्ता के शीर्ष केंद्र के इतने करीब नारों की गूंज ने प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं।
निर्वाचन आयोग ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल मुख्यमंत्री आवास और राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ के चारों ओर सुरक्षा घेरा सख्त करने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में इन संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर दी गई है, ताकि किसी भी संभावित हिंसक झड़प या कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके। प्रशासनिक स्तर पर कड़ाई का आलम यह है कि शांति भंग करने की कोशिश करने वालों को सीधी चेतावनी दी गई है।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग ने सोमवार को किसी भी प्रकार की विजय रैली या जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, मंगलवार से इन रैलियों की अनुमति होगी, लेकिन आज का दिन पूरी तरह से सतर्कता और नियंत्रण का है। बंगाल की फिजाओं में बदलती सत्ता की आहट स्पष्ट है, और प्रशासन की प्राथमिकता केवल यह सुनिश्चित करना है कि यह सत्ता परिवर्तन या चुनावी परिणाम किसी बड़ी अप्रिय घटना का सबब न बन जाए।




