Home Blog Page 418

कोविड को लेकर केंद्र सरकार की समीक्षा बैठक: भीड़ में पहने मास्क, राज्य को जीनोम सिक्वेंसिंग की सलाह

चीन में लगातार कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत में भी अहम बैठक हुई हैं। इसी के चलते केंद्र सरकार कोरोना के मामलों पर नजर रखी हुई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शीर्ष अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ महामारी की स्थिति पर समीक्षा बैठक की हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया की बैठक में कोरोना पर हर हफ्ते स्वास्थ्य मंत्रालय की समीक्षा बैठक करने का निर्णय लिया गया हैं। साथ ही केंद्र सरकार ने लोगों से भीड़भाड़ में मास्क लगाने की सलाह दी हैं।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी के पॉल ने कहा कि, अभी पैनिक की जरूरत नहीं हैं भीड़भाड़ में मास्क लगाने की सभी को सलाह है हर हफ्ते स्वास्थ्य मंत्रालय में समीक्षा बैठक होगी। टेस्टिंग पर्याप्त मात्रा में हो रही हैं। बीच-बीच में स्वास्थ्य मंत्रालय निर्णय लेगा कि क्या और कदम उठाए जाने हैं? कोई नई गाइडलाइन फिलहाल जारी नहीं की जा रही हैं।

मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर कहा कि, “कुछ देशों में बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए हमने विशेषज्ञों व अधिकारियों के साथ देश में हालात की समीक्षा की। कोविड अभी गया नहीं है। सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें और निगरानी को मजबूत करें। हम किसी भी हालात से निपटने के लिए तैयार हैं।”

आपको बता दें, कोरोना के पॉजिटिव मामलों की जीनोम सीक्वेंसिंग फिर से शुरू की गई है। केंद्र सरकार के आदेश के बाद से दिल्ली सरकार के लोकनायक और आईएलबीएस अस्पताल में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पॉजिटिव सैंपलों को जुटाया जा रहा है जिससे पता चल पाएगा की कोरोना का कोई नया वेरिएंट तो नहीं पनप रहा हैं। वहीं जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, चीन और अमेरिका में कोरोना के नए मामले चिंताजनक तरीके से बढ़ रहे हैं।

विपक्षी दलों ने की भारत-चीन विवाद पर संसद में चर्चा की मांग, खारिज होने पर किया विरोध प्रदर्शन

लोकसभा में भारत-चीन विवाद पर चर्चा की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया हैं। लोकसभा और राज्यसभा के सभी विपक्षी दलों के सांसदों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत-चीन सीमा विवाद मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी।

अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ पर चर्चा की मांग को खारिज किए जाने के बाद से सभी विपक्षी दल संसद के अंदर गांधी प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही ‘प्रधानमंत्री हाउस में आओ, चीन की घुसपैठ पर चर्चा करो, राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा करो’ के नारे भी लगाए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि, “हम मांग करते हैं कि सदन में चर्चा हो। सदन को चीनी अतिक्रमण की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि देश के लोगों को इसकी सूचना दी जा सके। अगर चर्चा नहीं होती है और केवल एकतरफा प्रतिक्रिया होती है तो इसका क्या मतलब हैं?”

राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि दिन की कार्यवाही शुरू होने के बाद मुझे नियम 267 के तहत आज दो नोटिस मिले। एक नोटिस में डोला सेन ने मूल्य वृद्धि का मुद्दा उठाने के लिए नोटिस दिया हैं वहीं प्रमोद तिवारी ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाने के लिए नोटिस दिया हैं। और यह दोनों नोटिस नियम 267 के तहत आदेश में हैं।

 

मनसुख मंडाविया की राहुल गांधी को चिट्ठी- ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करवाएं, यदि संभव न हो तो यात्रा को देशहित में स्थगित करें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिट्ठी लिखी है और कहा है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से कोरोना प्रोटोकॉल टूट रहे हैं। दुनियाभर में कोरोना तेजी से फैल रहा है, इसलिए कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए।

मनसुख मंडाविया ने पत्र में लिखा है कि यात्रा में सिर्फ वैक्सीन ले चुके लोग ही हिस्सा लें, मास्क व सैनिटाइजर का उपयोग किया जाए साथ ही यात्रा में जुडने वाले पूर्व और बाद में यात्रियों को आइसोलेट किया जाए। यदि यह करना संभव न हो तो देशहित में यात्रा को स्थगित किया जाए।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ राजस्थान से हरियाणा में बुधवार को पहुंची हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, पार्टी के प्रदेश प्रमुख उदय भान सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने यात्रा का राज्य में स्वागत किया। यात्रा 23 दिसंबर तक राज्य के अलग-अलग इलाकों से गुजरेगी।

हरियाणा के नूंह जिले में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि, देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई नई बात नहीं हैं, यह हजारों साल से चली आ रही हैं।

राहुल गांधी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि, “आज लड़ाई दो विचारधाराओं के बीच है, एक विचारधारा चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाती हैं जबकि दूसरी अन्य लोगों जैसे किसानों और मजदूरों की आवाज उठाती हैं…और इस लड़ाई में कांग्रेस पार्टी की एक भूमिका है…”

भाजपा नेताओं के राहुल गांधी की पदयात्रा पर सवाल उठाने पर राहुल गांधी ने कहा कि, वे पूछते है कि कन्याकुमारी से यात्रा शुरू करने की क्या जरूरत थी? राहुल गांधी ने कहा कि, “मैं भारत जोड़ो यात्रा के जरिये नफरत के बाजार में प्यार की दुकान खोल रहा हूं…जब ये लोग देश में जाकर नफरत फैलाते हैं, तब हमारी विचारधारा वाले लोग बाहर निकलकर प्यार व स्नेह बांटते हैं.. ”

आपको बता दें, ‘भारत जोड़ो यात्रा’ 7 सितंबर में तमिलनाडु में कन्याकुमारी से प्रारंभ हुई थी। और यह तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से होकर हरियाणा पहुंची हैं।

‘भारत जोड़ो यात्रा’ फरवरी की शुरूआत में जम्मू एवं कश्मीर में सम्पन्न होगी। पूरी यात्रा के तहत 150 दिन में 3,570 किलोमीटर का सफर तय करने का लक्ष्य हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आजादी में भाजपा के योगदान वाले बयान पर संसद में हंगामा

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा जारी हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उनसे माफी की मांग कर रही हैं। किंतु मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर माफी मांगने से साफ इंकार कर दिया है और कहा कि ‘मैं अभी भी अपने बयान पर कायम हूं।‘

संसद के दोनों सदनों में सत्ता पक्ष के सांसद लगातार हंगामा कर रहे थे और खड़गे से लगातार माफी की मांग कर रहे थे। हंगामे की वजह से लोकसभा की कार्यवाही को 11.30 तक स्थगित कर दिया गया।

बता दें, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीते दिन अलवर के मालाखेड़ा में सोमवार को हुई जनसभा में आजादी में भाजपा की भूमिका पर एक बयान देते हुआ कहा था कि, “हमने (कांग्रेस पार्टी ने) देश को आजादी दिलाई और देश की एकता के लिए इंदिरा और राजीव गांधी ने अपनी जान की कुर्बानी दी हैं। उन्होंने भाजपा से सवाल करते हुए कहा कि हमारे पार्टी के नेताओं ने अपनी जान दी, आपने क्या किया? आपके घर में कोई देश के लिए कुत्ता तक मरा है? क्या किसी ने कोई कुर्बानी दी है?”

उन्होंने आगे कहा कि, भाजपा अपने आप को बहुत देशभक्त बताती है और हम कुछ भी बोलें तो हमें देशद्रोही करार कर देती हैं। और वर्तमान में ऐसी ही स्थिति हैं, देश का हाल यही हो रहा हैं। इस दौरान वह भाजपा पर जमकर बरसे।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने खड़गे की भाषा को अभद्र बताया है और उनके बयान पर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हो रहा हैं। वहीं विपक्ष चीन के मुद्दे पर बहस को लेकर सरकार को घेरने में लगा है और लगातार इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है, जिससे सरकार बचती नजर आ रही हैं।

आप से 97 करोड़ वसूली का आदेश, केजरीवाल को दिल्ली एलजी का बड़ा झटका

दिल्ली के एलजी ने मुख्य सचिव को आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपये वसूलने के निर्देश दिए हैं। आम आदमी पार्टी ने जो राजनीतिक विज्ञापन सरकारी विज्ञापन के तौर पर दिए उसके लिए 97 करोड़ रुपये चुकाएं।

बता दें दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने मुख्य सचिव को सरकारी विज्ञापनों के रूप में प्रकाशित राजनीतिक विज्ञापनों के लिए ये निर्देश दिया है। एलजी के निर्देश 2015 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश 2016 के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश और 2016 के सीसीआरजीए के आदेश के मद्देनजर आया है, जिसका आप सरकार पर उल्लंघन का आरोप हैं।

आपको बता दें, वर्ष 2015 में अरविंद केजरीवाल पूर्ण बहुमत के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और अपनी सरकार के कामों व फैसलों का उन्होंने प्रचार शुरू किया। मई 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से दिए जाने वाले विज्ञापन को लेकर एक आदेश जारी किया।

इस आदेश के आधार पर अप्रैल 2016 में एक तीन सदस्य कंटेंट रेगुलेशन कमेटी बनी। अगस्त 2016 में दिल्ली सरकार बनाम एलजी में दिल्ली सरकार हाईकोर्ट में केस हार गयी तो केजरीवाल सरकार के सभी फैसलों की जांच शुरू हुई। और केजरीवाल सरकार में जितने भी विज्ञापन दिए गए उन सभी को उस कमेटी को रेफर कर दिया गया।

सदस्य समिति ने आरोप लगाते हुए कहा था कि 97 करोड़ के जो विज्ञापन दिए गए थे, वे नियम के मुताबिक नहीं थे। उनका राजनीतिक विज्ञापन कहा गया इसलिए तभी से आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ वसूल करने के आदेश दिए गए।

यह मामला उस वक्त का है जब नजीब जंग उपराज्यपाल हुआ करते थे। और मौजूदा उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना है और यह आजकल सभी पुराने मामले उठा रहे हैं। उन्हीं मामलों मे से एक यह भी हैं।

उत्तर भारत में घना कोहरा, दिल्ली एयरपोर्ट ने विजिबिलिटी प्लान किया लॉन्च

उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश में घना कोहरा देखने को मिल रहा हैं। घने कोहरे की वजह से यातायात भी प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम दर्ज की गयी हैं।

मंगलवार की सुबह कई शहरों में पारा 5 डिग्री के नीचे दर्ज किया गया हैं। वहीं इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंगलवार सुबह कोहरे की मोटी परत से ढका रहा।

दिल्ली हवाई अड्डे की ओर से सुबह 4.30 बजे कोहरे को लेकर ट्वीट किया गया। इस ट्वीट में यात्रियों को कम दृश्यता प्रक्रियाओं को लागू करने के बारे में बताया गया।

ट्वीट में कहा गया कि, “दिल्ली हवाईअड्डे पर कम दृश्यता की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल सभी उड़ानें सामान्य हैं। यात्रियों से अनुरोध है कि वे अद्धतन उड़ान जानकारी के लिए संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें।”

वहीं भारत मौसम विभाग के अनुसार सुबह साढ़े पांच बजे दिल्ली के सफदरजंग इलाके में दृश्यता 50 मीटर दर्ज की गई। सैटेलाइट तस्वीरों में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तरी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में घना से लेकर बहुत घना कोहरा दिखा।

मौसम विभाग ने एक बयान में कहा था कि, “सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में निचले क्षोभमंडल स्तरों पर नमी और मंद गति की हवाओं के कारण पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में रात, सुबह के दौरान कई इलाकों में अगले तीन दिन के दौरान घना जबकि चौथे और पांचवें दिन बहुत अधिक घना कोहरा छाए रहने की संभावना हैं।”

महाराष्ट्र-कर्नाटक बॉर्डर विवाद: सीमा पर रोका गया शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के सदस्यों को

कर्नाटक में बीएस बोम्मई सरकार के अंतिम शीतकालीन सत्र के लिए आज शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के 300 से अधिक सदस्य बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। किंतु सभी को कर्नाटक पुलिस द्वारा वापस भेज दिया गया। जबकि कुछ को महाराष्ट्र पुलिस ने कांग्रेस पार्टी और शिवसेना नेताओं को हिरासत में भी लिया हैं।

वहीं कर्नाटक के बेलगावी में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे राकांपा के हसन मुश्रीफ और शिवसेना के कोल्हापुर जिला अध्यक्ष विजय देवाने को हिरासत में लिया गया हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारत को विभाजित करने का आरोप लगाया हैं।

नाना पटेल ने कहा कि, “केंद्र सरकार के कारण सीमा का मुद्दा हो रहा हैं पीएम मोदी महाराष्ट्र को विभाजित करना चाहते हैं। दोनों मुख्यमंत्रियों और गृह मंत्री अमित शाह के बीच बैठक के बावजूद नेताओं को वहां जाने की अनुमति क्यों नहीं है? इससे पता चलता है कि केंद्र सरकार इसके पीछे हैं। ”

आपको बता दें, कर्नाटक विधानसभा का 10 दिवसीय शीतकालीन सत्र सोमवार को शुरू हुआ हैं। इसी के चलते बेलगावी शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी गर्इ हैं और महाराष्ट्र के साथ सीमा-विवाद को लेकर विभिन्न समुदायों के विरोध के कारण व्यवधान की आशंका के बीच पूरे शहर को एक छावनी में तब्दील कर दिया गया हैं। शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पांच हजार पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया हैं।

वर्ष 2014 के बाद 6 हजार आतंकियों ने किया सरेंडर, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस- केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि, “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मोदी सरकार कामयाब रही हैं। मोदी सरकार ने आतंकवाद के खात्मे के लिए कई बड़े कदम भी उठाए हैं। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की घटनाओं में 168 फीसदी की कमी आई हैं। और वर्ष 2014 के बाद 6 हजार आतंकियों ने सरेंडर भी किया हैं।“

अनुराग ठाकुर ने पाकिस्तान पर हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2016 का सर्जिकल स्ट्राइक, वर्ष 2019 में बालाकोट का हमारा एक्शन इसके जीते जागते प्रमाण हैं। और कहा कि हमें उनसे नसीहत नहीं चाहिए। वहीं पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल का बिलबिलाना और किसी विदेशी देश के नेताओं का बोलना यह दिखाता है कि भारत ने आतंक के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई की हैं।

उन्होंने आगे कहा कि नॉर्थ ईस्ट में शांति, बोडो एग्रीमेंट, एनएलएफटी एग्रीमेंट, बीआरयू एग्रीमेंट, कारबी और असम-मेघालय ट्रीटी इसके प्रमुख उदाहरण है। आतंकवाद के खिलाफ कानून बनाने में भी मोदी जी अति महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पूरी दुनिया को एकजुट करना, नो मनी फॉर टेरर जैसे सांगठनिक काम किया। आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना। अफस्पा एक्ट को हमने नॉर्थ ईस्ट के ज्यादातर जगहों से हटा दिया, असम के भी 60 फीसदी जगहों से हटाया गया।“

केंद्रीय मंत्री ने पीएफआई पर निशाना साधते हुए कहा कि, मोदी सरकार ने सामाजिक कल्याण के बहाने कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले एक संगठन (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगाने में संकोच नहीं किया, हमने संगठन के खिलाफ गहन जांच की और उसके सदस्यों को गिरफ्तार किया। कट्टरपंथी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।“

ऑपरेशन गंगा के तहत साल 2021-22 में एक फरवरी से लेकर मार्च के बीच चला रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत यूक्रेन में फंसे 22 हजार 500 भारतीय नागरिकों को लाया गया। साथ ही वर्ष 2021 में ऑपरेशन देवी शक्ति के तहत अफगानिस्तान से 670 नागरिक लाए गए थे। और कोरोना महामारी के दौरान वंदे भारत के जरिए 1 करोड़ 83 लाख लोगों को स्वदेश लाया गया था।

वर्ष 2016 में ऑपरेशन संकट मोचन, ऑपरेशन नेत्री के तहत नेपाल से भारतीयों को लाया गया, ऑपरेशन राहत के जरिए यमन से भारतीय नागरिकों को लाया गया। भारत ने न केवल अपने ही नागरिकों को बल्कि विदेशी लोगों की भी जान बचाई हैं।

लाजवाब अर्जेंटीना और मेसी

विश्व कप फुटबॉल: एमबापे का खेल भी नहीं बचा सका फ्रांस को

लियोनेल मेसी की आँखों में खुशी की चमक विश्व कप ट्रॉफी से किसी भी तरह कम नहीं थी। ऐसा लग रहा था मानों दोनों अपनी चमक के लिए एक दूसरे को चुनौती दे रहे हों। फाइनल मैच के बाद यह दोनों ही चीजें मेसी के पास थीं – ट्रॉफी की चमक भी और उनकी आँखों की चमक भी। खचाखच भरे लुसैल स्टेडियम में अर्जेंटीना के समर्थकों का नृत्य जारी था और फ्रांस के समर्थक मायूसी से घिरे बैठे थे। रविवार की रात 36 साल बाद और कुल जमा तीसरी बार अर्जेंटीना ने विश्व कप फुटबॉल की ट्रॉफी जीत ली। मेसी, जिन्होँने पहले फाइनल के बाद संन्यास का संकेत दिया था, ने अपने समर्थकों को राहत की सांस देते हुए कहा कि अभी संन्यास के बारे में वे सोचेंगे। मेसी के हाथ में जब ट्राफी थी, उस समय फ्रांस के स्टार एमबापे मैदान में उदासी से घिरे बैठे थे और फ्रांस के राष्ट्रपति मेैक्रों उन्हें ढाढ़स बंधा रहे थे।
दोनों ही दो-दो बार के चैम्पियन थे और दोनों टीमें दिग्गज खिलाडिय़ों से भरी थीं। लेकिन सबकी निगाहें अर्जेंटीना के सुपर स्टार लियोनेल आंद्रे मेस्सी और फ्रांस के सुपर स्टार काइलियन एमबाप्पे पर थीं। दोनों ने शानदार खेल दिखाया लेकिन जीत का सेहरा बंधा मेसी के नेतृत्व वाली अर्जेंटीना की टीम के सिर। मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना ने 1986 से चले आ रहे फीफा विश्व कप जीत के सूखे को आखिर खत्म कर दिया। फ्रांस को पेनल्टी शूट आउट में हराने से पहले अर्जेंटीना को कुछ इम्तिहानों से गुजरना पड़ा। कारण था एमबापे का हार न मानना।

फ्रांस की टीम जीत जाती तो इटली, ब्राजील के बाद लगातार दो खिताब जीतने वाली तीसरी टीम बन जाती। इटली ने 1934 और 1938 में खिताब जीता था जबकि ब्राजील ने 1958 और 1962 में लगातार दो बार विश्व कप जीता था।

अर्जेंटीना रही हावी  

इसमें कोई संदेह नहीं कि निर्धारित 90 मिनट के खेल में 75 मिनट तक अर्जेंटीना का दबदबा मैच पर रहा। पहले हाफ में उसने दो गोल कर दिए थे। इसके बाद किलियन एम्बाप्पे ने दूसरे हाफ के आखिरी मिनटों में महज 97 सेकेंड्स में दो गोल कर फ्रांस को मैच वापस ला दिया। इसके बाद एक्स्ट्रा टाइम मिला। मेसी ने फिर एक गोल कर अर्जेंटीना को मैच में वापस ला दिया लेकिन एम्बाप्पे ने पेनल्टी को गोल में तब्दील कर फ्रांस को फिर बराबरी पर ला दिया।

मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट तक चला गया। पहली पेनल्टी में फ्रांस के एम्बाप्पे ने गोल में दाल दी। अर्जेंटीना के मेसी ने भी देश की पहली पेनल्टी को गोल में बदल दिया। फ्रांस के कोमैन की दूसरी पेनल्टी अर्जेंटीना के गोलकीपर मार्टिनेज ने रोक ली, लेकिन अर्जेंटीना के लिए डिबाला ने गोल कर उसे बढ़त दिला दी। मार्टिनेज ने फिर फ्रांस के चुआमेनी की किक बचा ली। इसके बाद अर्जेेंटीना के पेरेडेस ने गोल किया। इसके बाद फ्रांस के कोलो मुआनी ने गोल किया लेकिन अगली किक में अर्जेंटीना के मॉन्टियल ने अर्जेंटीना के लिए गोल कर उसे जीत दिला दी।

इससे पहले मेसी ने 23वें मिनट में अर्जेंटीना को मिली पेनल्टी को गोल में बदलकर टीम को बढ़त दिला दी। इसके बाद 36वें मिनट में डिमारिया ने दूसरा गोल कर फ्रांस को हक्का बक्का कर दिया। मेसी के पास गेंद आई जिन्होंने उसे मैक एलिस्टर को पास कर दिया जिन्होँने बाएं छोर से डिमारिया को पास दिया और गेंद गोलपोस्ट के अंदर। अर्जेंटीना 2-0 से आगे हो गया।

फ्रांस की टीम दूसरे हाफ में भी लय में नहीं दिखी। टीम ने मौके भी कम ही बनाए और अर्जेंटीना लगातार उसपर हावी दिख रहा था। अर्जेंटीना का डिफेंस लाजवाब था। फ्रांस कोच ने अचानक बदलाव किया और 73वें मिनट में ग्रीजमैन की जगह कोमैन को अंदर भेजा। इस बीच 79वें मिनट में अर्जेंटीना के ऑटोमेंटी की गलती के कारन फ्रांस को पेनल्टी मिल गयी और एम्बाप्पे ने इसका फायदा उठाते हुए टीम का अंतर कम कर दिया। अर्जेंटीना अभी इस गोल के दबाव से से उभरा भी नहीं था कि  81वें मिनट में एम्बाप्पे ने बेहतरीन फील्ड गोल कर टीम को बराबरी पर ला खड़ा किया।

निर्धारित समय में दोनों टीमों के बराबर रहने के बाद 15-15 मिनट के दो एक्स्ट्रा टाइम हुए। पहले एक्स्ट्रा टाइम में मेसी ने 108वें मिनट में गोल कर अर्जेंटीना को आगे कर दिया। मार्टिनेज की किक गोलकीपर से टकरा गई और मौके का फायदा लेते हुए मेसी ने गेंद बिना डरी किये नेट में डाल दी। सबको लग रहा था कि अर्जेंटीना जीत गयी लेकिन तभी 118वें मिनट में एम्बाप्पे ने फ्रांस को मिली पेनल्टी को गोल में बदल स्कोर फिर बराबर कर दिया। इसके बाद मैच पेनल्टी शूट आउट में चला गया जहाँ फ्रांस के दो मिस शॉट अर्जेंटीना को चैम्पियन बना गए।

क़तर में आयोजन पर विवाद

यह आश्चर्य ही है कि इस बार फीफा विश्व कप फुटबाल-2022 का आयोजन क़तर में किया गया, जहाँ वास्तव में फुटबाल की संस्कृति ही नहीं। लेकिन फिर भी इसे बेहतर तरीके से आयोजित किया गया; भले ही एक मुस्लिम राष्ट्र होने के कारण पाबंदियाँ खिलाडिय़ों और दर्शकों के लिए दिक़्क़त पैदा करने वाली रहीं। टूर्नामेंट की टाइमिंग भी काफ़ी लोगों को रास नहीं आयी। सन् 2010 में फुटबाल की शीर्ष संस्था फीफा ने क़तर को जब मेज़बानी दी थी, तब टूर्नामेंट गर्मियों में आयोजित होने का अनुमान था। लेकिन उस समय क़तर में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा हो जाता है।

इसके बाद सन् 2015 में फीफा ने क़तर विश्व कप नवंबर-दिसंबर में कराने का फ़ैसला किया, जिस पर काफ़ी विवाद हुआ। पिछले विश्व कप आमतौर पर जून-जुलाई में हुए हैं। यह पहली बार है कि टूर्नामेंट नवंबर-दिसंबर में खेला जा रहा है। चूँकि यूरोप की शीर्ष फुटबाल लीग सर्दियों में ही खेली जाती है, फुटबाल क्लबों को मन मसोसकर खिलाडिय़ों को विश्व कप में खेलने की मंज़ूरी देनी पड़ी। क्लब फुटबाल में फँसे होने के कारण खिलाडिय़ों को राष्ट्रीय टीमों के साथ तैयारी का वक़्त ही नहीं मिला।

क़तर विश्व कप के मैच जहाँ हुए, उसके आठ में से सात स्टेडियम नये हैं। मेज़बानी हासिल करने के बाद क़तर में युद्ध स्तर पर काम करके यह सात नये स्टेडियम बनाये गये। एक का रंग-रूप बदला गया। यही नहीं, नया हवाई अड्डा, नयी मेट्रो और सडक़ें बनायी गयीं। इस सारे काम में क़रीब 30,000 लोगों को जोड़ा गया। क़तर में टूर्नामेंट के विरोध का एक बड़ा कारण मानवाधिकार संगठन भी थी।

सन् 2021 में ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि क़तर में विदेशी कामगारों के वेतन में अवैध कटौती की जाती है और उनसे तय समय से ज़्यादा काम लिया जाता है। वेतन भी कभी समय पर नहीं दिया जाता। फरवरी, 2021 में तो मीडिया ने दावा किया था कि विश्व कप की मेज़बानी पाने के बाद क़तर में एशियाई देशों भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांगलादेश और श्रीलंका के 6,500 प्रवासी कामगारों मौत हो चुकी है। हालाँकि क़तर का कहना है कि सन् 2014 से सन् 2020 के बीच वल्र्ड कप स्टेडियम बनाने वाले मज़दूरों में 37 की मौतें हुई हैं और इनमें ज़्यादातर काम की वजह से नहीं मरे।

इसके अलावा समलैंगिक भी क़तर में आयोजन के विरोधी थी; क्योंकि इस मुस्लिम देश में समलैंगिक सख़्त रूप से अवैध है। एल.जी.बी.टी. समुदाय के अधिकारों के समर्थक समूहों ने समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने, क़तर में प्रवेश का अधिकार देने और एल.जी.बी.टी. से जुड़े मुद्दों की चर्चा पर पाबंदी नहीं लगाने की मांग की थी। लेकिन इसे यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया गया कि समलैंगिकों और ग़ैर-समलैंगिकों की तरफ़ से स्नेह का सार्वजनिक प्रदर्शन देश की परम्परा का हिस्सा नहीं है।

अविवाहित युवक-युवतियों के लिए होटलों में कमरा लेना भी मुश्किल रहा, क्योंकि क़ानून तोडऩे पर सात साल की जेल की सज़ा का ख़तरा था। आयोजक क़तर ने स्टेडियम में महिलाओं को कन्धे और घुटने ढकने का आदेश जारी किया। ऐसे में फुटबॉलर्स की वेग्स (पत्नी या गर्लफ्रैंड) को समुद्र में खड़े क्रूज में ठहराना पड़ा। उन्होंने वहीं पर पार्टी की। जहाँ वेग्स को ठहराया गया उन लग्जरी शिप का किराया एक बिलियन पाउंड है। इन क्रूज में 33 रेस्टोरेंट और 75 मीटर की इनडोर स्लाइड है। साथ ही छ: स्विमिंग पूल भी। क्रूज में 2,633 केबिन हैं, जिनमें 6,762 लोग को ठहर सकते हैं।

मेसी का बचपन

मेसी बचपन में ग्रोथ हार्मोन डेफिशियेंसी नाम की बीमारी के शिकार थे। तब डॉक्टरों ने उन्हें कहा था कि वे फुटबॉल नहीं खेल पाएंगे। फुटबॉल के दीवाने मेसी के लिए यह किसी हादसे से कम नहीं था। कारण था कि यह बीमारी शरीर का विकास रोक देती है। वे उस समय फुटबाल खेलते थे। परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था, लिहाजा मेसी के इलाज के हर महीने का बड़ा खर्च निकालना मुश्किल था। नेवल्स ओल्ड बॉय क्लब, जो मेसी के खेल से प्रभावित था, ने उनकी यह दिक्कत जानकार बार्सिलोना क्लब को इसकी जानकारी दी आखिर बार्सिलोना उनके इलाज का पूरा खर्च इस शर्त के साथ करने के लिए तैयार हो गया कि वे यूरोप में ही रहेंगे। बहुत लोगों को यह पता नहीं होगा कि उन्होंने एक नैपकिन पर क्लब से अपना कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। इस तरह विकट परिस्थितियों से पार पाते हुए फुटबॉल के इस सितारे का उदय हुआ था।
 
श्रेष्ठ खिलाड़ी और पैसा
गोल्डन बूट अवॉर्ड के लिए अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी और फ्रांस के कीलियन एम्बाप्पे के बीच टक्कर थी जो दोनों फाइनल से पहले तक 5-5 गोल कर चुके थे।
गोल्डन बूट एक गोल ज्यादा (कुल 8) करने के लिए फ्रांस के कीलियन एम्बाप्पे के हिस्से आया जो टूर्नामेंट के इतिहास में फाइनल में हैट्रिक लगाने वाले दूसरे खिलाड़ी बने। मेसी ने 7 गोल किये। उधर गोल्डन बॉल पुरस्कार अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी
के हिस्से आया। गोल्डन बॉल पाकर मेसी दो बार अवॉर्ड पाने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए। गोल्डन ग्लव अवार्ड टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर अर्जेंटीना के एमिलियानो मार्टिनेज को मिला जिन्होँने कमाल का प्रदर्शन किया। फीफा यंग प्लेयर अवॉर्ड मिला अर्जेंटीना के मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज को जिन्होँने टीम को कई गोल में असिस्ट किया। फेयर प्ले ट्रॉफी इंग्लैंड को मिली सबसे कम कार्ड्स मिलने के कारण। उधर विजेता अर्जेंटीना को 347 करोड़ रुपये, उपविजेता फ्रांस को 248 करोड़ रुपये, तीसरे नंबर की टीम क्रोएशिया को – 223 करोड़ रुपये और चौथे नंबर की टीम मोरक्को को 206 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली।

रूस के अब तक के सबसे बड़े हमले में यूक्रेन में हुई तबाही, ब्लैकआउट जारी

रूस के शुक्रवार को यूक्रेन पर किये गए हमले में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक अब तक के सबसे बड़े हमले में रूस ने यूक्रेन पर 70 से अधिक मिसाइलें दागीं और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर में बिजली सप्लाई ठप कर दी। उन्होंने कहा इस हमले ने कीव को आपातकालीन ब्लैकआउट लागू करने के लिए मजबूर कर दिया।

रूस के हमलों में अधिकारियों ने मध्य क्रीवी रिह में तीन लोगों की मौत होने की पुष्टि की है। इसके अलावा दक्षिण के खेरसॉन में गोलीबारी में एक अन्य की मौत की बात स्वीकार के है। उधर पूर्वी यूक्रेन इलाके में रूसी-स्थापित अधिकारियों ने कहा कि यूक्रेनी गोलाबारी से 12 लोगों की जान चली गयी है।

हमले के कुछ घंटों के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदीमीर ज़ेलेंस्की ने कहा – ‘रूस के पास अभी भी कई बड़े पैमाने पर हमलों के लिए पर्याप्त मिसाइलें हैं। हम फिर से पश्चिमी सहयोगियों से कीव को अधिक और बेहतर वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति करने का आग्रह करते हैं।’

ज़ेलेंस्की ने कहा – ‘यूक्रेन युद्ध में वापसी करने के लिए पर्याप्त शक्ति रखता है। मॉस्को के मिसाइलों के पुजारी जितनी भी कोशिश कर लें, युद्ध में शक्ति का संतुलन नहीं बदलेगा।’

काफी विशेषज्ञों का मानना है कि रूस यूक्रेन युद्ध को लंबा खींचे रखने की रणनीति पर काम कर रहा है और आने वाले समय में और बड़े हमले यूक्रेन पर कर सकता है। यूक्रेन पहले ही काफी नुकसान झेल चुका है और उसके बिजली प्रोजेक्ट्स से लेकर अन्य अहम संस्थान रूसी हमलों में तबाह हो चुके हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो रूसी सेना ने यूक्रेन के लगभग पांचवें भाग पर कब्जा कर लिया है।

भले यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की हिम्मत भरे बयान दे रहे हैं, लेकिन वे भई जानते हैं कि उनके देश ने काफी कुछ खो दिया है और उनके लोग मुश्किल परिस्थितियों में रह रहे हैं। ज़ेलेंस्की यूक्रेन के लोगों से धैर्य रखने का आग्रह कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि भयंकर सर्दियों में बिजली बंद होने से उन्हें कितनी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।