Home Blog Page 414

सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को वैध करार दिया, इसके खिलाफ दायर 58 याचिकाएं खारिज

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को एक बड़े फैसले में 2016 में  नोटबंदी के फैसले को वैध करार दिया है। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने इससे जुड़ी 58 याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

याद रहे पीएम मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को एक राष्ट्रव्यापी प्रसारण में नोटबंदी की घोषणा की थी। इस फैसले को लेकर सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी गयी थी। इस गलत फैसला बताने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने आज फैसला सुना दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में 58 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने 7 दिसंबर को सुनवाई पूरी कर ली थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाती हुए 2016 की नोटबंदी को वैध करार दिया है। साथ ही सभी 58 याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि सरकार ने बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए अचानक 500 और 1000 के पुराने नोट प्रचलन से बाहर कर दिए थे।  इसके जवाब में सरकार ने कहा है कि यह टैक्स चोरी रोकने और काले धन पर लगाम लगाने के लिए लागू की गई सोची-समझी योजना थी। फैसला सुरक्षित रखते समय कोर्ट ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक को नोटबंदी के फैसले से जुड़ी प्रक्रिया के दस्तावेज सौंपने को कहा था।

जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने 7 दिसंबर को सुनवाई पूरी कर ली थी। जस्टिस नज़ीर के अलावा संविधान पीठ के अन्य 4 सदस्य जस्टिस बीआर गवई, एएस बोपन्ना, वी रामासुब्रमण्यम और बीवी नागरत्ना हैं।

यह कैसी शराबबंदी!

बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावज़ूद शराब उपलब्ध, मौतों पर सियासत

बिहार एक बार फिर अपनी शराबबंदी नीति के कारण चर्चा में है। इस चर्चा का मुख्य फोकस हाल ही में बिहार का सारण ज़हरीला शराब कांड है। बिहार सरकार के अनुसार, इस कांड में 38 लोगों की जान गयीं, जबकि सांसद व भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में दावा किया कि बिहार में ज़हरीली शराब पीने से 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस सूबे में सन् 2016 से लागू शराबबंदी नीति के बाद से आजतक ज़हरीली शराब पीने से मरने वालों व विकलांग होने की ख़बरें आती रहती हैं; लेकिन इस बार भाजपा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर अति अक्रामक रुख़ अपनाये हुए है। यह तेवर पटना में बिहार विधानसभा से लेकर दिल्ली में संसद में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। ऐसा लगता है कि जद(यू) नेता व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस मुद्दे के बहाने भाजपा घेर रही है और कहीं-न-कहीं अपनी ख़ुन्नस निकाल रही है, क्योंकि नीतीश कुमार ने एनडीए से बाहर निकल राष्ट्रीय जनता दल के साथ सरकार बना ली। सारण शराब कांड को लेकर राजनीति गरमा गयी है।

बहरहाल मुद्दा यह है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है और सुशासन बाबू के तमगे से मशहूर सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज में वहाँ ज़हरीली शराब के सेवन से लोग क्यों मर रहे हैं? ग़रीब लोगों तक यह शराब कौन पहुँचाता है? कैसे पहुँचती है? इस पर निगरानी रखने वाला तंत्र विफल क्यों है? बिहार पुलिस, राजनेता क्या करते हैं? इन सब की ओर से आँखें मूँदने, लापरवाही, कर्तव्य का ईमानदारी से पालन नहीं करने का $खामियाजा इस सूबे की ग़रीब, दलित जनता चुका रही है और किशोरों को इस धंधे में लपेटा जा रहा है। बिहार सरकार का दावा है कि वह शराब की बुराइयों को आम जनता तक पहुँचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाती है; लेकिन वह कितना कारगर है, यह कौन जानता है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि वह इस 25 दिसंबर से शराब पीने के ख़िलाफ़ जागरूकता यात्रा पर निकलेंगे। और वह अपने इस रुख़ पर सख़्ती से क़ायम हैं कि ‘जो शराब पीएगा, वह मरेगा।’ उन्होंने बिहार विधानसभा में साफ़ कहा कि शराब पीने से हुई मौत पर उनके परिवारजनों को मुआवज़ा नहीं दिया जाएगा। विपक्षी दल भाजपा मुआवज़ा की माँग कर रही है। मुख्यमंत्री ने इसके एवज में दलील दी कि कोई शराब पीये, और गंदी शराब पीये, उसको क्या हम लोग मदद करेंगे? सवाल ही पैदा नहीं होता है। शराब पीने वालों से कोई हमदर्दी नहीं होनी चाहिए।

सवाल यह है कि शासन का मुखिया होने के नाते उनकी इस सख़्ती का लहज़ा शराबबंदी को लेकर ज़मीनी स्तर पर अमल में क्यों नहीं नज़र आता? क्या नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री होने के नाते अपनी ग़लतियों व दूसरों की ग़लतियों से सबक़ नहीं लेना चाहिए? यह एक कड़वा सच है कि जहाँ भी शराबबंदी लागू की गयी और जिन राज्यों में आज भी है, वहाँ ज़हरीली शराब से मरने वालों की ख़बरें आती रहती हैं। वहाँ शराब मिलती है अंतर इतना है कि खुलेआम न मिलकर चोर दरवाज़े से मिलती है। मध्यम आयु वर्ग का तबक़ा व अमीर तबक़ा मानव के लिए सुरक्षित व महँगी शराब का इंतज़ाम आसानी से कर लेता है। वहीं ग़रीब तबक़ा अंतत: मानव के लिए असुरक्षित शराब के सेवन से कई बार अपनी जान गँवा बैठता है।

शराब के अति सेवन से कई आर्थिक दिक़्क़तें पैदा हो सकती हैं, सामाजिक बुराइयों का भी इससे नाता है, इंसान को हिंसक बना सकती है व स्वास्थ्य पर पडऩे वाले बुरे असर को लेकर भी डॉक्टर सचेत करते हैं। जहाँ तक बिहार की बात है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सन् 2015 में विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं से वादा किया था कि अगर वह सत्ता में लौटे यानी अगर उन्हें जीत मिलती है, तो वे राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करेंगे, ताकि ग़रीब, दलित, अति पिछड़े वर्ग की महिलाएँ व उनके बच्चों की जीवन स्तर सुधरे। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की माँग महिलाओं की तरफ़ से की गयी थी।

महिलाओं ने उन्हें बताया था कि उनके पति अपनी कमायी का एक मोटा हिस्सा दारू पर ख़र्च कर देते हैं, इस पर जो पैसा ख़र्च होता है, उससे उनके बच्चों की पढ़ाई व उनका खान-पान प्रभावित होता है। यही नहीं, शराब पीने के बाद घरेलू हिंसा भी करते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सूबे को शुष्क राज्य यानी शराबबंदी लागू करने के पीछे सार्वजनिक तौर पर इसी वजह का ज़िक्र किया था। यह तथ्य हर कोई जानता है कि नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू करने से पहले सूबे की महिलाओं व लड़कियों के अधिकारों व कल्याण सम्बन्धित योजनाओं को सशक्त बनाने के लिए निवेश किया। लड़कियों के स्कूल छोडऩे की दर को कम करने के लिए साइकिल योजना व वज़ीफ़ा योजना शुरू की।

एक समझदार राजनेता की तरह अपनी राजनीतिक मानव पूँजी बनायी और शराबबंदी के ज़रिये भी यही मक़सद काम कर रहा था। सन् 2016 में बिहार मद्यनिषेध उत्पाद क़ानून लागू हुआ। इसके तहत सूबे में शराबख़ोरी, शराब की तस्करी करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी सज़ा का प्रावधान है। उस समय क़ानून में यह भी प्रावधान था कि कोई शराब पीते हुए पहली बार पकड़ा गया, तो उसे सज़ा होगी।

इस प्रावधान का नतीजा यह हुआ कि पकड़े जाने वालों में अधिकतर लोग ग़रीब, मज़दूर, दलित थे; उनके परिजनों के पास उनकी जमानत तक कराने के लिए रक़म तक नहीं थी और बिहार की जेलें ऐसे लोगों से भर गयीं। जब इस प्रावधान की कड़ी अलोचना होने लगी तो नीतीश कुमार को अपनी ग़लती का एहसास हुआ कि यह कैसा सामाजिक न्याय है? बीते साल इस क़ानून में संशोधन किया गया, शराब का सेवन करने वाले प्रतिबंध का पहली बार उल्लघंन करने पर अब 20,00-50,00 रुपये तक का आर्थिक दण्ड लग सकता है। इन संशोधनों में शराब पीने के जुर्म में जेल भेजे जाने के स्थान पर मजिस्ट्रेट के सामने तय ज़ुर्माना राशि को भरने के बाद छोड़े जाने का प्रावधान लागू किया गया है। ज़ुर्माना नहीं भरने की सूरत में अभियुक्त को जेल भेजा जाएगा। शराब बनाने व बेचने वालों के ख़िलाफ़ पहले की ही तरह कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

सन् 2016 वर्ष जब यह क़ानून लागू हुआ तब से इस अक्टूबर (2022) तक बिहार पुलिस व राजस्व विभाग ने क़रीब 4 लाख मामले दर्ज किये, 4.5 लाख लोगों को पकड़ा और इनमें से 1.4 लाख लोगों पर मुक़दमा चल रहा है। जिन लोगों पर मुक़दमा चला, उनमें से महज़ 1,300 लोग यानी महज़ एक प्रतिशत को ही सज़ा हुई। इन 1300 में से शराब की सप्लाई व यह धंधा करने वाले महज़ 80 लोग ही हैं। इससे साफ़ है कि शराबबंदी वाले इस सूबे में ग़ैर-क़ानूनी तरीके से शराब बनाने वाले, बेचने वाले किस तरह बच रहे हैं। पटना उच्च अदालत ने भी शराबबंदी के एक मामले में सुनवाई के दौरान बिहार सरकार को शराबबंदी की विफलता को लेकर फटकार लगायी थी। कहा था कि सरकारी अधिकारियों के जानबूझकर हाथ पर हाथ धरे रहने के कारण पूरे राज्य में शराब की तस्करी से लेकर शराब बनाने तक का काम बढ़ रहा है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू करने में राज्य सरकार की विफलता के कारण लोगों की जान को ख़तरे में डाल दिया है। दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।

इससे बिहार में एक अवैध शराब की एक समानांतर अर्थ-व्यवस्था बन गयी है। शराबबंदी के इन छ: वर्षों में ग़ैर-सरकारी आँकड़ें बताते हैं कि बिहार में ज़हरीली शराब पीने से 200 लोगों की जान गयी है, यह बात दीगर है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड शाखा 2016-2021 के दरमियान होने वाली ऐसी मौतों का आँकड़ा 23 बताता है। कारण यह सरकारी संस्था वहीं आँकड़े दर्ज करती है, जो राज्य सरकार व केंद्र शासित राज्य उन्हें भेजते है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड शाखा के अनुसार, ज़हरीली शराब सेवन से होने वाली मौतों में कमी आयी है। देश भर में वर्ष 2017 में यह आँकड़ा 1,510 था, जो कि 2018 में 1,361 हो गया। सन् 2019 में 1,296 और सन् 2020 में 947 था। जिन राज्यों में शराबबंदी लागू नहीं हैं, वहाँ भी ज़हरीली शराब के सेवन से मौते होती हैं। जहाँ शराबबंदी लागू है और जहाँ नहीं- इस बिन्दु से आगे जाकर यह सोचने की जरूरत है कि हरेक मानव की जान क़ीमती है, सरकार का दायित्व उसे बचाने का है।

जम्मू के राजौरी में दो आतंकी हमलों में 5 लोगों की मौत, 12 लोग गंभीर घायल

बहुत कोशिशों के बावजूद जम्मू कश्मीर में आतंकी वारदातों पर नकेल नहीं कसी जा सकी है। सूबे के राजौरी में आतंकियों ने रविवार शाम चार लोगों की गोलियां मार कर हत्या कर दी और सात अन्य को घायल कर दिया। यह सभी एक ही समुदाय के थे। आज वहां इस घटना के विरोध में बंद रखा गया है, हालांकि, जिस घर में कल आतंकी वारदात हुई थी वहां आज सोमवार (आज) बम फटने से एक बच्चे की मौत हो गयी और पांच घायल हो गए। इन घटनाओं से गुस्साए ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया है।

पहली घटना रविवार देर शाम की है। आतंकियों ने गोलीबारी कर चार नागरिकों की हत्या कर दी। गोलीबारी में 7 अन्य आम नागरिक आतंकियों की गोलीबारी में घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गयी है। घटना के बाद सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सेना ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया।

उधर जिस घर में कल आतंकियों ने गोलीबारी कर लोगों को मार डाला था वहां आज आईईडी ब्लास्ट हो गया। इसमें एक बच्चे की मौत हो गयी और 5 लोग घायल हो गए। घायलों की हालत बेहद गंभीर बताई गयी है।

पुलिस के अनुसार रविवार देर शाम करीब सवा सात बजे राजौरी जिले के एक उच्च माध्यमिक विद्यालय के पास ऊपरी डांगरी इलाके में गोलीबारी की घटना हुई। इसमें एक महिला और एक बच्चे सहित 10 से अधिक लोग घायल हो गए। ज्यादा गंभीर लोगों में से 4 की बाद में मौत हो गयी।

मृतकों की पहचान सतीश, दीपक और प्रीतम के रूप में हुई है। अन्य का राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी), राजौरी में इलाज चल रहा है। एडीजीपी मुकेश सिंह  के मुताबिक राजौरी जिले के ऊपरी डांगरी इलाके में तीन घरों को आतंकवादियों के हमले में चार लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और जल्द ही आतंकवादियों को पकड़ लिया जाएगा।

इस आतंकी वारदात से गुस्साए लोगों ने सोमवार को राजौरी के डांगरी में मुख्य चौक पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि एलजी मनोज सिन्हा यहां आएं और हमारी मांगों को सुनें। आतंकियों के हमले के बाद राजौरी में सेना और स्थानीय पुलिस सर्च अभियान चला रही है।

पंजाब का निवेश उत्तर प्रदेश में!

पंजाब में स्थापित उद्योगों का पाँच लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश राज्य से बाहर जा रहा है। तो क्या पंजाब अभी औद्योगिक निवेश के लिए सुरक्षित नहीं या फिर राज्य सरकार की नीतियाँ ज़्यादा प्रतिकूल हैं। राज्य में गैंगस्टर गतिविधियों से राज्य में निवेश पर का$फी असर पड़ा है। कारोबारियों से फ़िरौती और हत्या जैसी कई घटनाओं ने बड़े घरानों को पंजाब इस समय निवेश के लिए ज़्यादा अनुकूल नहीं लग रहा। यही वजह है कि एक दर्ज़न से ज़्यादा उद्योगपितयों ने पिछले दिनों लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बैठक कर वहाँ निवेश की इच्छा जतायी है। दो लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के प्रस्ताव तो अब तक हो चुके हैं। मार्च तक यह लक्ष्य पाँच लाख करोड़ रुपये का रखा गया है। उधर मुख्यमंत्री भगवंत मान पूरी टीम के साथ राज्य में बाहरी राज्यों से निवेश की पुरज़ोर कोशिश कर रहे हैं। अभी वह तेलंगाना और तमिलनाडू के औद्योगिक घरानों को पंजाब में निवेश के लिए रिझाने में लगे हैं।

पंजाब कृषि प्रधान राज्य है यहाँ औद्योगिक निवेश और विस्तार की बहुत सम्भावनाएँ हैं। विशेषकर कृषि और फल संस्करण जैसे बड़े उद्योग यहाँ आसानी से लगाये जा सकते हैं। आप से पहले शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने इसके लिए बहुत प्रयास किये, जिसकी वजह से राज्य में जहाँ बड़े उद्योग लगे; वहीं रोज़गार के भी मौक़े पैदा हुए। आम आदमी पार्टी की सरकार का वादा पंजाब को उद्योग क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने का है। इसके लिए सरकार ने बाक़ायदा यहाँ के कारोबारियों से बेहतर माहौल बनाने के लिए सुझाव माँगे थे। राज्य सरकार निवेश के लिए हर तरह की सुविधा देने को तैयार है। क़िफ़ायती दरों पर ज़मीन, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं के साथ नीतियाँ उनके अनुकूल बनाने को तैयार है।

सरकार ने सभी सुझावों पर आधारित औद्योगिक और व्यापार विकास नीति-2022 को मंज़ूरी प्रदान की। यह निवेश के लिए बेहद अनुकूल है बावजूद इसके पंजाब के कारोबारी यहाँ विस्तार करने के इच्छुक नहीं है। हीरो समूह के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पंकज मुंजाल कहते हैं कि वह अपने उद्योग को पंजाब से बाहर शिफ्ट नहीं कर रहे। पंजाब उनकी कर्मभूमि है; लेकिन अब विस्तार के लिए नयी सम्भावनाएँ तलाशी जा रही है। उनका समूह उत्तर प्रदेश में बड़ा निवेश करने का इच्छुक है। यहाँ से एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल लखनऊ में वहाँ के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लम्बी चर्चा हुई। सदस्यों ने अपने-अपने प्रस्ताव दिये हैं। 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के निवेश की इच्छा रखने वाले कारोबारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश अब बहुत बदल गया है। अब वहाँ से उद्योगों का पलायन नहीं, बल्कि शानदार नीतियों और सुरक्षित माहौल की वजह से निवेश हो रहा है। सरकार बड़े स्तर पर सुविधाएँ मुहैया करा रही है। सबसे बड़ी बात वहाँ कामगार ज़्यादा सुलभ है। कच्चे माल की पहुँच से लेकर आपूर्ति के लिहाज से वह पंजाब से ज़्यादा बेहतर है।

कम लागत में ज़्यादा मुनाफ़े की सम्भावना के तहत पंजाब के कई बड़े घराने अब उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में विस्तार और निवेश करना चाहते हैं। कोई भी उद्योग साल दो साल के लिए नहीं दशकों तक होता है, उसके लिए बहुत कुछ देखना पड़ता है। उद्योगों के लिए इन सब बातों के अलावा सुरक्षित माहौल भी प्राथमिकता है। पंजाब में आप की सरकार के बाद क़ानून व्यवस्था की स्थिति कारोबारी घरानों को रास नहीं आ रही। वह खुलकर इसलिए नहीं बताना चाहते, क्योंकि उनका कारोबार यहाँ चल रहा है। सरकार विरोधी रवैया उनके लिए मुसीबत बन सकता है; लेकिन सच यह है कि गैंगस्टर गतिविधियों से यहाँ कारोबार जगत के लोगों में आशंकाएँ घर कर गयी है। पिछले दिनों ऐसे ही कारोबारी को फ़िरौती न देने पर सरेआम गोलियों से भून दिया गया। उसे पहले से धमकी मिली हुई थी, सरकार ने उसे सुरक्षाकर्मी भी मुहैया करा रखा था। हमले में उसकी भी मौत हो गयी। यह बिगड़ती क़ानून व्यवस्था का एक उदाहरण भर है। हालाँकि हमलावरों की गिरफ़्तारी हो चुकी है; लेकिन ऐसी घटनाएँ राज्य के मौज़ूदा माहौल में होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। पंजाब में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद सरकार ने गैगस्टरों पर कार्रवाई कर अपनी इच्छा शक्ति दिखायी है।

सरकार के गठन के नौ माह के दौरान पुलिस थाने और पुलिस दफ़्तर पर रॉकेट लॉन्चर से हमले हुए। सरकार के लिए क़ानून व्यवस्था का तो कोई मुद्दा ही नहीं था; लेकिन अब बन गया है ऐसे में विकास, रोज़गार और उद्योग के क्षेत्र में पंजाब को अग्रणी राज्य बनाने के मुद्दे कहीं पीछे रह गये हैं। निजी क्षेत्र में रोज़गार के अपार अवसर हैं, जबकि सरकारी नौकरियाँ सीमित हैं। इस ही ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान नये पंजाब की परिकल्पना में उद्योग को प्राथमिकता दे रहे हैं; लेकिन फ़िलहाल नतीजे आशानुकूल नहीं हैं। वे बाहरी राज्यों से निवेश से पहले यहाँ स्थापित उद्योगों को देखे।

जैसा की अभी प्रस्तावित है कि पंजाब से क़रीब पाँच लाख करोड़ रुपये का निवेश यहाँ से बाहर होगा, तो क्या इसे अब भी रोका जा सकता है। पूरा नहीं, तो कुछ भाग अब भी राज्य में निवेश हो सकता है। सरकार को इस दिशा में गम्भीरता से मनन करना होगा। 3,000 करोड़ रुपये के मुक़ाबले राज्य से हज़ारों करोड़ों रुपये निवेश बाहर जाना सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाता है। यही निवेश पंजाब में होता, उद्योग लगते लाखों युवाओं को रोज़गार मिलता। उद्योग केवल सीधे रोज़गार ही नहीं देता, बल्कि अपरोक्ष तौर पर रोज़ी-रोटी देता है। सरकार को बड़ा राजस्व मिलता है, वहीं उसकी प्रतिष्ठा भी बढ़ती है। कुछ माह पहले जर्मनी के दौरे के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बहुराष्ट्रीय कम्पनी बीएमडब्लू के पंजाब में निवेश की घोषणा की थी; लेकिन जल्द ही कम्पनी ने इसका खंडन कर दिया। इस वजह से उनकी और सरकार की $खूब आलोचना भी हुई।

वैसे पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के क़रीब नौ माह में कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ है। सरकार का दावा है कि 30,000 करोड़ रुपये के निवेश के लिए प्रस्ताव तैयार है, इनमें टाटा समूह जैसे बड़े घरानों के नाम हैं। अभी धरातल पर कुछ नहीं हुआ है, जबकि इसके विपरीत पंजाब के बड़े घरानों में हीरो समूह, एवन, नाहर और वीएपी समूह जैसे समूह पंजाब से बाहर निवेश के लिए बिलकुल तैयार हैं। लुधियाना के एक बड़े कारोबारी कहते हैं कि पंजाब की बनिस्बत अब उत्तर प्रदेश ज़्यादा सुरक्षित और ठीक है। वह मार्च से पहले 350 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे। वहाँ सरकार की नीतियाँ पंजाब के मुक़ाबले ज़्यादा ठीक है, सिंगल विंडों पर सभी काम हो रहे हैं। पंजाब से उद्योगों का पलायन तो नहीं; लेकिन भविष्य के लिए ख़तरनाक संकेत है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के अलावा देश के बाहरी राज्यों के उद्योगपतियों को पंजाब में निवेश के जबरदस्त प्रयास कर रहे हैं। वहीं उनके अपने राज्य के उद्योग बाहर जा रहे हैं। साइकिल उद्योग में नामी एवन समूह उत्तर प्रदेश में 500 करोड़ रुपये, हीरो समूह 350 करोड़ रुपये वीएपी समूह 2,000 करोड़ रुपये के निवेश की इच्छा जता रहे हैं। कुल मिलाकर 2,30,000 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी है। एक तरह से पंजाब का निवेश यहाँ से बाहर जा रहा है। आप सरकार को इस पर गम्भीरता से विचार करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान का उद्योग जगत में अग्रणी बनाने का सपना कहीं सपना बनकर ही न रह जाए।

 

“पंजाब उद्योग लगाने के लिए बेहतर राज्य है। सरकार की औद्योगिक और विकास नीति-2022 कारोबारियों के सुझावों पर आधारित है। टाटा स्टील, वेरबयो, फ्रूडेनबर्ग, संथान टेक्सटाइल जैसी कई कम्पनियों से राज्य में निवेश का अनुबंध हो चुका है। कई बड़े घरानों से सकारात्मक बातचीत चल रही है। पंजाब में बड़ा निवेश होगा और राज्य इसमें अग्रणी भूमिका निभाएगा। बाहरी राज्यों से कारोबारी कृषि आधारित संयंत्र राज्य में लगाएँगे। इससे निजी क्षेत्र में यहाँ के युवाओं को रोज़गार के मौक़े मिलेंगे। पंजाब के मौज़ूदा उद्योगपतियों से यहाँ निवेश के लिए तैयार किया जाएगा। सरकार का पूरा रोडमेप है। आने वाले समय में इसके नतीजे देखने को मिलेंगे।’’

                               भगवंत मान

मुख्यमंत्री, पंजाब

 

“मुख्यमंत्री भगवंत मान विदेशों और बाहरी राज्यों से निवेश के दावे कर रहे हैं, जबकि उनके यहाँ के कारोबारी बाहरी राज्य जा रहे हैं। सरकार क़ानून व्यवस्था बनाये रखने में नाकाम रही है। असुरक्षित माहौल में यहाँ के कारोबारी उत्तर प्रदेश में विस्तार के लिए निवेश कर रहे हैं। यह पंजाब के लिए अच्छी बात नहीं है। उद्योगों से पंजाब में खुशहाली आएगी; लेकिन आप सरकार अपनी नीतियों और कमज़ोर नेतृत्व के चलते अपने दावे पर खरी नहीं उतर सकेगी।’’

प्रताप सिंह बाजवा

वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पंजाब

 

“राज्य में बढ़ते अपराध, बिगड़ती क़ानून व्यवस्था और कमज़ोर नेतृत्व के चलते यहाँ होने वाला निवेश बाहरी राज्यों में जा रहा है। पंजाब के अप्रवासी भारतीय भी अब राज्य में निवेश नहीं कर रहे। मुख्यमंत्री भगवंत मान को निवेश पर झूठे दावे बन्द करने चाहिए। सच क्या है, वह लोगों के सामने आ रहा है।’’

अश्विनी शर्मा

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, पंजाब

महामारी के मामलों के चलते एक दर्जन से ज्यादा देशों के चीनी यात्रियों पर प्रतिबंध

कोरोना महामारी को देखते हुए दुनिया के एक दर्जन से ज्यादा देशों ने चीन के यात्रियों के लिए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन देशों ने अपने यहां पहुंचने वाले यात्रियों के लिए कोविड नेगेटिव रिपोर्ट को जरूरी कर दिया है।

पिछले साल के आखिरी महीने में वुहान शहर में बड़े पैमाने पर कोरोनोवायरस के मामले की रिपोर्ट्स सामने आने के बाद यह पाबंदियां लगाई जाने लगी हैं। चीन में महामारी फैलने की घटनाएं बीजिंग के लॉकडाउन और सामूहिक परीक्षण की अपनी जीरो कोविड पॉलिसी को हटाने से शुरू हुई हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि चीन में महामारी इस साल महामारी भयंकर रूप दिखा सकती है।

कई वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें चीन के अस्पतालों और श्मशानों में कोविड का देखा जा सकता है। हाल के दिनों में, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, स्पेन, जापान, दक्षिण कोरिया, भारत और ताइवान ने चीन से यात्रियों के लिए या तो एक कोविड नेगेटिव रिपोर्ट को जरूरी कर दिया है।

दो दिन पहले ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक संबोधन में दावा किया था कि महामारी की रोकथाम और नियंत्रण एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। हर कोई दृढ़ता से काम कर रहा है, और आशा की किरण ठीक हमारे सामने है। उधर संक्रमण में उछाल के बावजूद, शंघाई और वुहान में नए साल से पहले की शाम के जश्न के लिए अभी भी बड़ी भीड़ जमा हुई।

आडम्बर से नहीं मिलेगा परमानन्द

व्यक्ति कोई मक़सद लेकर पैदा नहीं होता। लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, उसके जीने और जीने के लिए इच्छाओं की पूर्ति के लिए मक़सद बनते चले जाते हैं। यह मक़सद समयानुसार बढ़ते भी रहते हैं और बदलते भी रहते हैं। जैसे- पैदा होने के बाद किसी बच्चे का मक़सद पेट भरना मात्र होता है। लेकिन जैसे-जैसे वह अपने आसपास के लोगों को पहचानने लगता है, उसका मक़सद पेट भरने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों का, मुख्यत: अपनी माँ का प्यार पाना भी हो जाता है। जब वह और बढ़ा होता है, तो उसका मक़सद पेट भरने, अपनों का प्यार पाने के अतिरिक्त खेलने-कूदने, हर चीज़ को समझने की कोशिश करने और उसे पा लेने का मक़सद बन जाता है। जब वह पढऩे लगता है, तो उसका मक़सद पहले के सभी मक़सदों के अतिरिक्त अच्छे अंक पाना होता है। जब बढ़ा होता है, तो इन सब मक़सदों से कुछ आगे निकलकर दोस्ती, प्यार और करियर उसके मक़सद में शामिल हो जाते हैं। विवाह होने के बाद, जन्म के रिश्तों से मोह कम और पत्नी बच्चों से मोह बढऩे लगता है और वह पैसा कमाने का मक़सद लेकर आगे चलता है। इसके बाद घर, पैसा, बच्चों का करियर, माँ-बाप की सेवा और अच्छी कमायी उसका मक़सद होता है। लेकिन जब उसके ये सारे मक़सद पूरे हो जाते हैं, तो उसके अपने मक़सदों में बच्चों के मक़सद शामिल हो जाते हैं। बच्चों से सेवा की आशा होती है। वही अपनी सत्ता की इच्छा होती है। सभी मक़सद पूरे करने के पीछे उसका मक़सद सुख अर्थात् आनन्द पाना होता है।

अगर उसके सभी मक़सद पूरे हो जाएँ, तो अन्त में वह परमानन्द पाने का मक़सद लेकर बाक़ी का जीवन व्यतीत करते हुए परम् आनन्द अर्थात् ईश्वर में विलीन हो जाना चाहता है। लेकिन आख़िर जीवन के हर मक़सद को पाने के पीछे उसका मक़सद आनन्द अर्थात् सुख की प्राप्ति ही होता है। यह आनन्द परमानन्द अर्थात् परम् सुख में बदल जाए, यह इच्छा ज़्यादातर लोग मन में पालकर रखते हैं। इसी परमानन्द को पाने के लिए कोई संसार के सभी भौतिक और क्षणिक सुख पाने के पीछे पड़ा रहता है, तो कोई ईश्वर की ओर अपनी-अपनी मनोवृत्ति, सोच और भक्ति भाव के हिसाब से परमानन्द की खोज करता है।

यह एक कटु सत्य है कि संसार के कुछ विरले लोगों को छोड़ दें, तो परमानन्द की खोज में लगे ज़्यादातर लोग इसके लिए धर्म की सहायता चाहते हैं और इसी मक़सद से वे धर्म के प्रति आस्थावान रहते हैं। लेकिन जिन किताबों के दिशा-निर्देशों को ये लोग धर्म मानते हैं, उसी धर्म के चक्कर में ही उलझकर व्यक्ति सुख-शान्ति गँवा देता है और बहस, तर्क-वितर्क यहाँ तक कि कुतर्क के माध्यम से ख़ुद को परम् ज्ञानी और धार्मिक सिद्ध करने लगता है। यहीं से उसके परमानन्द की प्राप्ति के रास्ते बन्द हो जाते हैं। जीवन भर भौतिक सुखों की तलाश में भटकने वाला आख़िरकार अशान्ति और दु:ख की दलदल में फँस जाता है और धर्म भी उसे सही रास्ता नहीं दिखन पाते। आनन्द से परमानन्द की तरफ़ बढऩे के बजाय वह दु:ख, अशान्ति, क्लेश, चिन्ता और अवसाद में घिर जाता है। और इस तरह धर्मों की किताबों और आडंबर को धर्म समझकर सिर पर लादकर उम्र भर ढोने वाले व्यक्ति को उसका धर्म भी नहीं बचा पाता। इस तरह व्यक्ति परमानन्द से वंचित रह जाता है।

क्या कहा जाए, जो धर्म सुख, शान्ति, परमानन्द और परम् पिता अर्थात् ईश्वर की प्राप्ति के लिए बने हैं, क्या वही लोगों को भटका देते हैं? और अगर धर्म लोगों को सही रास्ता दिखाते हैं, तो फिर उन्हें भटकाता कौन है? इसका उत्तर स्पष्ट है- धर्म के ठेकेदार, जो वास्तव में अल्पज्ञानी होते हैं। सदैव किताबों और पुरानी कहानियों को रटकर उनसे सीख लिये बग़ैर ही सुनाते हैं। धर्म को सही मायने में अमल में नहीं लाते। दूसरे के लोगों धर्म के प्रति उग्र रहते हैं और हमेशा बेतुकी बातें करते हैं। ऐसे लोग न ख़ुद धर्म पर होते हैं और न ही धर्मानुयायियों के लिए सही रास्ता दिखा पाते हैं। यही कारण है कि न तो लोगों को आनन्द मिल पाता है और न ही परमानन्द। न जीवन रहते हुए और शायद न जीवन के बाद ही। ऐसे तथाकथित धर्माचार्यों और उनके कहने पर उनके मार्गदर्शन में चलने वाले, लोगों के लिए सन्त कबीर दास ने गुरु-शिष्य की उपमा देते हुए ख़ूब कहा है :-

‘‘जाका गुरु आँधला, चेला निपट निरंध।

अन्धे अन्धा ठेलिया, दोनों कूप पड़ंत।।’’

सही ही कहा है। जिन्हें ख़ुद ही परमानन्द नहीं प्राप्त हुआ है। जो भौतिक सुखों को ही परमानन्द समझते हैं। सिवाय आडंबर के धर्म का एक भी काम नहीं करते हैं। बिलकुल सामान्य लोगों की तरह जीवन जीते हैं। वे अपने पीछे चलने वालों को कैसे उस परम् सुख की अनुभूति करा सकते हैं। ऐसे लोग भेड़ों की तरह ही हैं। इन्हें धर्म का सही रास्ता तब तक नहीं दिखेगा, जब तक इन्हें इनके अपने-अपने धर्मों के अनुसार सज़ा नहीं मिलेगी।

जमीन पर भाजपा के खिलाफ है माहौल, अगला चुनाव नहीं जीत पाएगी – राहुल गांधी

राहुल गांधी की अगुवाई वाली ‘भारत जोड़ो यात्रा’ सुर्खियों में बनी हुई हैं। अभी भारत जोड़ो यात्रा दिल्ली के पड़ाव पर है इसी बीच शनिवार को राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता को 9वीं बार संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य देश को एक नया दृष्टिकोण देने का है। राहुल ने दावा किया कि अगले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए जीत बेहद मुश्किल होगी और जमीन पर भाजपा के खिलाफ बड़े पैमाने पर सत्ता विरोधी माहौल है।

राहुल गांधी ने कहा कि, भारत जोड़ो यात्रा दिल्ली तक पहुंच गई है और हम सबको इसमें बहुत कुछ सीखने को मिला है। यात्रा का लक्ष्य हिंदुस्तान में फैलाई जा रही डर, नफरत, बेरोजगारी और हिंसा के खिलाफ हैं। हम नफरत और गुस्से को स्नेह, प्रेम और सद्भाव से लड़ते हैं और हम इस देश को एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि, जब मैंने यह यात्रा शुरू की तो मेरी यह सोच थी कि यह कन्याकुमारी से कश्मीर तक एक यात्रा है किंतु कुछ समय बाद यह पता चला कि इस यात्रा की एक आवाज है इसकी फीलिंग्स है। और इससे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। और इस यात्रा को न सिर्फ देश की जनता बल्कि विपक्ष का पूरा समर्थन मिल रहा है।

राहुल ने आगे कहा कि, मैं आरएसएस और भाजपा के मित्रों का भी धन्यवाद करना चाहता हूं कि वो जितना भी मुझ पर हमला करते हैं, मैं उतना बेहतर होता जा रहा हूं। भाजपा और आरएसएस के लोग मेरे गुरु हैं, वो मुझे ट्रेनिंग दे रहे हैं  क्योंकि जितना वो आक्रमण करते है उतनी ही हमको अपनी स्थिति को सुधारने का मौका मिलता हैं। वो मुझे रास्ता दिखा रहे है कि क्या नहीं करना चाहिए।‘

उन्होंने कहा कि यात्रा के बाद, ये यात्रा हमें कुछ बताने की कोशिश कर रही है और यदि हम उसे सुने बिना कुछ और काम कर देंगे तो वो उस यात्रा का अपमान है। किंतु विपक्ष हमारे साथ खड़ा है। और भारत जोड़ो यात्रा के दरवाजे सभी के लिए खुले है। नफरत, हिंसा और मोहब्बत में सिमिलैरिटी नहीं होती। किंतु बहुत सारे लोग है और उनमें से अखिलेश जी मायावती जी सभी भारत जो मोहब्बत का हिंदुस्तान चाहते है और नफरत मिटाने का रिश्ता है उनके साथ।

चीन के मुद्दे पर राहुल ने कहा कि- यूपीए-2 ने कभी भी पाकिस्तान और चीन को एक नहीं होने दिया और आज पाकिस्तान और चीन एक हो रहे है जो की बहुत ही खतरनाक बात हैं। इन्होंने हमारी सरकार में की विदेश नीति को अप्रभावी तरीके से संभाला है। चीन-पाकिस्तान एक होकर तैयारी कर भी रहे है और यह मामूली बात नहीं है। इन्होंने पहला कदम डोकलाम और दूसरा कदम लद्दाख में लिया। मुझे लग रहा है कि यह तैयारी कर रहे है। हमारी सरकार को वायु, थल और नौसेना की बात सुननी होगी और सेना का राजनीतिक इस्तेमाल बंद करना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि, चीन हमारा 2000 किमी क्षेत्र ले गया और पीएम जी कह रहे है कि कोर्इ नहीं आया। अगर मैं आपके घर में घुस गया और आप कहे कि कोई नहीं घुसा तो इससे क्या संदेश जाएगा? सरकार इस पर जनता को भ्रमित कर रही है यदि सरकार इसपर जनता को खुलकर बताएं तो सभी पार्टियां सरकार के साथ है।

बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर राहुल ने कहा कि- महंगाई और बेरोजगारी अहम है भारत के कुछ लोग बहुत कम समय में सबसे अमीर व्यक्ति बन गए है किंतु देश के ज्यादातर लोग गरीब हो गए हैं। सरकार की कमियां बेरोजगारी, नोटबंदी, चीन, इकॉनॉमिक मिसमैनेजमेंट, गलत जीएसटी ये सरकार की गलतियां है। किंतु मैं यह सोचता हूं कि हम हिंदुस्तान को एक सोचने का और जीने का नया तरीका दे।

सुरक्षा को लेकर राहुल ने कहा कि – भाजपा चाहती है कि मैं बुलेटप्रूफ गाड़ी के साथ भारत जोड़ो यात्रा करूं, लेकिन आप मुझे ये समझाइये कि बीपी गाड़ी में बैठ कर मैं यात्रा कैसे करूं क्योंकि यह तो भारत जोड़ो यात्रा है और पैदल ही होगी। बार-बार मेरे खिलाफ अफवाह फैलाई जा रही है कि मैं सुरक्षा के प्रोटोकॉल तोड़ता हूं। किंतु उनके नेता तो जब बीपी गाड़ी से बाहर आ जाते है, खुली जीप में गए जो प्रोटोकॉल के खिलाफ है तो उन्हें चिट्ठी नहीं जाती। उनके लिए प्रोटोकॉल अगल और मेरे लिए अलग ये कैसे। सभी सीआरपीएफ जवान जानते है कि मेरी सुरक्षा के लिए क्या करना है। यह सब तो केवल केस बना रहे है कि राहुल गांधी सिक्योरिटी तोड़ता रहता हैं।

सर्दी न लगने के पर राहुल ने कहा कि – मुझे ये समझ नहीं आता कि लोगों को मुझसे इतनी दिक्कत क्यों हैं। अगर सच कहूं तो भारत जोड़ो यात्रा के दौरान अभी तक मुझे ठंड नहीं लगी, यदि मुझे जब भी ठंड लगनी शुरू होगी तो मैं स्वेटर पहनना शुरू कर दूंगा। मेरा ध्यान इस विचार पर है कि भारत को एक होना चाहिए।

भाजपा और कांग्रेस पर कहा कि- यह दोनों ही पार्टी कभी भी एक नहीं हो सकती क्योंकि इन दोनों की विचारधारा अलग-अलग है। और असल में उस विचारधारा को हराने के लिए एक विचारधारा जरूरी है।

शहीदों के लिए कहा कि- मैं शहीद परिवार से हूं और मैं जानता हूं कि जब एक युवा अपनी जान देता है तो उसके परिवार पर क्या गुजरती है। लेकिन भाजपा के शीर्ष नेता यह सब नहीं जानते। हम नहीं चाहते कि हमारी सेना से कोई जवान शहीद हो। हम नहीं चाहते कि इस चीज को लापरवाही से लें और सेना राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल की जाए। सेना का नुकसान हमारे जवानों और उनके परिवारों को हो।

आपको बता दें, ‘भारत जोड़ो यात्रा’ फिलहाल दिल्ली में विराम दिया गया है। यात्रा 3 जनवरी से फिर शुरू होगी और दिल्ली से उत्तर प्रदेश होतो हुए पंजाब और जम्मू-कश्मीर में 26 जनवरी को समाप्त होगी।

डब्ल्यूएचओ ने चीन से अस्पताल में भर्ती लोगों, मरने वालों, वैक्सीनेशन का सारा डाटा मांगा

मीडिया में कोविड-19 से करोड़ों लोगों के चपेट में आने की रिपोर्ट्स के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चीन से दोबारा नियमित तौर पर संक्रमण संबंधी वास्तविक आंकड़ा साझा करने को कहा है। डब्ल्यूएचओ ने चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि वे जीनोम अनुक्रमण के अलावा कोविड-19 के चलते अस्पताल में भर्ती होने वालों, मरने वालों और वेक्सिनेशन से जुड़ा सारा डेटा साझा करे।

दुनिया भर में संक्रमितों की संख्या में बड़ी वृद्धि को देखते हुए कोविड-19 की स्थिति पर अधिक जानकारी हासिल करने और डब्ल्यूएचओ की विशेषज्ञ और अन्य सहायता की पेशकश करने के लिए चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई है।

इसके बाद जारी बयान में कहा गया है – ‘डब्ल्यूएचओ ने एक बार फिर से महामारी की स्थिति पर विशिष्ट और वास्तविक समय के आंकड़ों को नियमित रूप से साझा करने के लिए (चीन से) कहा है। इसमें जीनोम अनुक्रमण का अतिरिक्त डेटा और संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने वालों, आईसीयू में इलाज हासिल करने वालों, वायरस से दम तोड़ने वालों और टीके लगवाने वालों से संबंधित आंकड़े शामिल हैं।’

इस बयान में आगे कहा गया है – ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अधिक संवेदनशील लोगों को गंभीर संक्रमण और मौत से बचाने के लिए टीकाकरण और एहतियाती खुराक लगवाने के महत्व को दोहराया है। बैठक में चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के उच्च अधिकारियों ने महामारी, इसके स्वरूप की निगरानी, टीकाकरण, क्लीनिक देखभाल, संचार और अनुसंधान और  विकास के क्षेत्रों में चीन की रणनीति और उसके कार्यों के बारे में डब्ल्यूएचओ को जानकारी दी गयी।’

बैठक को लेकर जारी बयान के मुताबिक चीनी वैज्ञानिकों को डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व वाले कोविड-19 विशेषज्ञ नेटवर्क में नजदीक से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें कोविड-19 नैदानिक प्रबंधन नेटवर्क भी शामिल है।

चलती बस में चालक को दिल का दौरा, इससे हुए हादसे में गयी 9 की जान

एक भीषण हादसे में शनिवार सुबही को गुजरात के नवसारी जिले में 9 लोगों की जान चली गयी जबकि 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। हादसा तब हुआ जब चलती गाड़ी में बस के चालक को दिल का दौरा पड़ गया। इससे बस अनियंत्रित होकर एक एसयूवी से जा टकराई।

जानकारी के मुताबिक हादसा तब हुआ जब सूरत में चल रहे प्रमुख स्वामी महाराज शताब्दी महोत्सव समारोह से लोग एक बस में वापस लौट रहे थे। बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 दिसंबर को अहमदाबाद में प्रमुख स्वामी महाराज शताब्दी महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया था।

लोगों से भरी बस के चालक को अचानक दिल का दौरा पड़ा जिससे बस उसके नियंत्रण से बाहर हो गयी और उसने नवसारी राष्ट्रीय राजमार्ग (हाइवे) संख्या 48 पर एक टोयोटा फॉर्च्यूनर कार को टक्कर मार दी।

चालक को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी भी मौत हो गई। कार में सवार 9 लोगों में से आठ की मौत हो गई, जबकि बस में सवार 28 लोग घायल हो गए। इनमें से 11 को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है।

बस सूरत से वलसाड जा रही थी। पुलिस के मुताबिक हादसा वेसमा गांव के पास हुआ। एसयूवी विपरीत दिशा से आ रही थी जिसमें गुजरात के अंकलेश्वर के निवासी बैठे थे। वे वलसाड से अपने गृहनगर वापस जा रहे थे।

फुटबॉल के भगवान कहे जाने वाले पेले का निधन, दुनिया भर के लोगों ने जताया शोक

इसी साल फ़ुटबाल स्टार माराडोना की मौत के बाद गुरूवार देर रात ‘फ़ुटबाल के भगवान’ कहे जाने वाले महान पेले को भी खो दिया। ब्राजील के खेल मंत्री पेले (82) कैंसर से जूझ रहे थे और हाल के हफ़्तों में उनकी हालत खराब हो गयी थी। उनके निधन पर दुनिया भर के प्रेमियों ने शोक जताया है।

पेले की केली नेसिमेंटो ने अपने पिता के निधन की पुष्टि एक इंस्टाग्राम पोस्ट में की है। पेले कोलन कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट का जवाब देना भी बंद कर दिया था। पेले को हाल ही में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पता चला कि उन्हें रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन भी है।

पेले को फुटबॉल का सर्वकालिक महान खिलाड़ी कहा जाता था। तीन बार के विश्व कप विजेता रह चुके हैं। बेटी केली नेसिमेंटो ने इंस्टाग्राम पर लिखा – ‘हम जो कुछ भी हैं, आप ही की बदौलत हैं। हम आपसे बहुत प्यार करते हैं। रेस्ट इन पीस।’

मिनस गेरैस राज्य में जन्मे दिग्गज फुटबॉलर पेले आज तक सेलेकाओ (ब्राजील) के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने 92 मैचों में 77 गोल किए। एक पेशेवर फुटबॉलर के रूप में पेले ने कुल तीन बार फीफा विश्व कप (1958, 1962, 1970) जीता जो अभी भी एक व्यक्तिगत फुटबॉलर के लिए एक रिकॉर्ड है।

उनका असली नाम एडसन अरांटिस डो नासिमेंटो था, लेकिन वह पेले के नाम से मशहूर हुए। उनका जन्म 23 अक्टूबर, 1940 को ब्राजील के ट्रेस कोराकोएस में हुआ था। फीफा ने उन्हें ‘द ग्रेटेस्ट’ का शीर्षक भी दिया था। पेले ने तीन शादियां कीं। उनके कुल सात बच्चे हैं।

काफी समय से उनकी कीमोथेरेपी भी चल रही थी। उन्हें 29 नवंबर को सांस लेने में तकलीफ होने पर साओ पोलो के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, उन्होंने कीमोथेरेपी का जवाब देना बंद कर दिया। पेले को पिछले साल सितंबर में उनके कोलन से ट्यूमर हटा दिया गया था और तब से वे नियमित रूप से अस्पताल में इलाज करवा रहे थे।

पेले ने अपने करियर में (1956-1974) काफी समय तक ब्राजीलियाई क्लब सांतोस का प्रतिनिधित्व किया। इस क्लब के लिए उन्होंने 659 मैचों में 643 गोल किए। अपने फुटबॉल करियर के अंतिम दो वर्षों में पेले ने यूएसए में न्यूयॉर्क कॉसमॉस के लिए खेला।

उन्होंने छह मौकों (1961, 1962 1963, 1964, 1965 और 1968) में ब्राजीलियाई लीग खिताब (कैम्पियोनाटो ब्रासीलेरो सेरी ए) जीता और 1962 और 1963 में दो बार कोपा लिबर्टाडोरेस खिताब जीता। वह सैंटोस के ‘गोल्डन एरा’ (1959-1974) के प्रमुख खिलाड़ियों में से एक रहे और उन्हें 1962 और 1963 में दो इंटरकॉन्टिनेंटल कप खिताब तक पहुंचाया। दोनों मौकों पर फाइनल में सैंटोस ने पुर्तगाली क्लब बेनफिका को हराया।

इसी साल जब महान फुटबॉलर माराडोना का निधन हुआ था तब पेले ने एक ट्वीट में कहा था – ‘एक दिन, मैं उम्मीद करता हूँ, हम आसमान में साथ फ़ुटबाल खेलेंगे’। उन्होंने हाल में अर्जेंटाइना के फीफा विश्व कप जीतने पर टीम को बधाई संदेश भी भेजा था।