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मॉब लींचिंग : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कानून बनाये संसद

पिछले दिनों में हुई घटनाओं, जिसमें गौरक्षा के नाम पर लोगों को मार देने के घटनाएं भी शामिल हैं, पर देशव्यापी चर्चा के बीच मंगलवार को भीड़ की हिंसा पर नकेल कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने देश भर में चल रही मॉब लिंचिंग पर केंद्र और राज्य सरकारों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि भीड़तंत्र की इजाज़त नहीं दी जा सकती। साथ ही कोर्ट ने सरकार से इस मामले में सख्त कानून बनाने को भी कहा है।

गोरक्षा के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर सख्त नाराजगी जताते हुए शीर्ष अदालत  ने कहा कि कोई भी अपने हाथ में कानून नहीं ले सकता, चाहे वो भीड़ क्यों न हो। गौरतलब है की देश में पिछले छह साल में अकेले गौरक्षा के नाम पर ही करीब ८४ घटनाएं हुई है जिसमें  ३२ लोगों की मौत हुई है। अन्य मामले अलग से हैं। गोरक्षा के नाम पर हुई हिंसा से जुडी याचिका पर मुख्या न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ती एएम खानविलकर और न्यायमूर्ती डीवाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने इस मसले पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन एस पूनावाला और महात्मा गांधी के पौत्र तुषार गांधी समेत कई अन्य ने इस मामले में याचिका दायर की थी।

कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि शांति और विभिन्न समुदाओं के भारतीय समाज की रक्षा का जिम्मा  राज्य का है। मुख्या न्यायाधीश ने कहा कि संसद भीड़ की हिंसा के लिए अलग से कानून बनाने पर विचार करे। अपने निर्देश में उन्होंने राज्य की सरकारों से कहा कि भीड़ की हिंसा को रोकना उनकी भी  जिम्मेदारी है। शीर्ष अदालत २० अगस्त को इस मसले पर समीक्षा करेगी जब केंद्र की तरफ से इसपर कुछ जवाब दायर होगा।

तुषार गांधी ने शीर्ष अदालत में उसके कुछ मामले में पहले के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ राज्यों के खिलाफ मानहानि याचिका भी दायर की गयी हैं। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 6 सितंबर को सभी राज्यों से कहा था कि गौ-रक्षा के नाम पर हिंसा रोकने के लिये सख्त  कदम उठाये जाएँ।

एक और याचिकाकर्ता इंदिरा जयसिह ने कहा कि भारत में अपराधियों के लिए गोरक्षा के नाम पर हत्या करना गर्व की बात बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है और उन्हें जीवन की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रही है।

मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पीएस नरसिम्हा ने कहा था कि केंद्र सरकार इस मामले में सजग और सतर्क है, लेकिन मुख्य समस्या कानून व्यवस्था की है। उनहोंने कहा था कि कानून व्यवस्था पर नियंत्रण रखना राज्यों की जिम्मेदारी है और केंद्र इसमें तभी हश्तक्षेप कर सकता है जब राज्य इसके लिए उससे आवेदन करे।

मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि भीड़तंत्र की इजाज़त नहीं दी जा सकती। शांति और बहुलतावादी समाज की रक्षा राज्य का दायित्व है। चीफ जस्टिस ने कहा कि संसद भीड़ की हिंसा के लिए अलग से कानून बनाने पर विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि चार हफ्ते के भीतर ”मॉब लिन्चिंग” पर दिशा-निर्देश जारी करें।

अभिनेत्री रीता भादुड़ी का निधन

‘जूली’, ‘अनुरोध’, ‘फूलन देवी’, ‘घर हो तो ऐसा’, ‘बेटा’, ‘लव’, ‘रंग’, “दलाल’, ‘तमन्ना’ और ‘मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरने वाले अभिनेत्री  रीता भादुड़ी का मंगलवार निधन गया। उन्होंने कई टीवी सीरियल में भी काम किया। वर्तमान में रीता टीवी सीरियल ‘निमकी मुखिया’ में दादी का रोल कर रही थी और उन्हें काफी पसंद किया जाता था।

भादुड़ी के न‍िधन से इंडस्ट्री में शोक है और कई कलाकारों ने उनके निधन पर शोक जताया है। वह 62 साल की थीं। रीता टीवी और फिल्म इंडस्ट्री का जाना-माना चेहरा रहीं। उनके न‍िधन की जानकारी वरिष्ठ अभिनेता श‍िशि‍र शर्मा ने सोशल मीड‍िया पर साझा की । उन्होंने ल‍िखा – ”बड़े दुख के साथ मैं जानकारी दे रहा हूं कि रीता भादुड़ी हमारे बीच नहीं रहीं। उनका अंत‍िम संस्कार 17 जुलाई को दोपहर 12 बजे अंधेरी ईस्ट, मुंबई में होगा। हम सबके लिए वो मां की तरह थीं। उन्हें बहुत याद करेंगे ”.

प‍िछले द‍िनों रीता भादुड़ी की सेहत में गिरावट आई थी। उन्हें किडनी में समस्या थी, जिसकी वजह से उन्हें हर दूसरे दिन उन्हें डायलिसिस के लिए जाना पड़ता था। खराब सेहत के बावजूद रीता अपनी शूट‍िंग को पूरा कर रही थी। जब भी उन्हें खाली समय म‍िलता वो सेट पर ही आराम करती थीं। रीता की काम के प्रत‍ि लगन देखकर ही न‍िमकी मुखिया के शूट‍िंग शेड्यूल को उनकी सहूल‍ियत के ह‍िसाब से तय किया जाता था। रीता “निमकी मुखिया’ के अलावा ‘अमानत’, ‘कुमकुम’, ‘छोटी बहू’, ‘हसरतें’ जैसे कई टीवी शो में अहम भूमिका में आ चुकी हैं। उन्होंने कई फिल्मों में भी काम किया।

पत्नी की हत्या में गया जेल; मगर वो थी ज़िंदा; अब पुलिस शर्मिंदा

महाराष्‍ट्र के एक व्यक्ति पर पुलिस ने अपनी ही पत्‍नी की हत्‍या का आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया। अपराधी ने कथित तौर पर अपना जुर्म कबूल भी कर लिया।

अब अचानक पुलिस ने दीपक सोमकुवर  पर लगाए गए सारे चार्ज वापस ले लिए, क्योंकि दीपक की पत्नी शिल्पा पुलिस को जिंदा मिली है। वह केम्पटी में अपने एक रिश्तेदार के यहां रह रही थी।

बात पिछले साल अक्टूबर की है जब दीपक पर अपनी पत्नी शिल्‍पा के मर्डर का आरोप लगा था। रामटेक पुलिस ने कुछ दिनों पहले उसे गिरफ्तार करके नागपुर जेल भेज दिया।

अक्टूबर 2017 में सोमकुमार और शिल्पा का किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। इसके बाद शिल्पा पति को छोड़कर चली गई।

शिल्‍पा के घर छोड़ने के कुछ दिनों बाद ही पुलिस को एक सिर कटी महिला की लाश सतरापुर के बोंदरी गांव में मिली थी।

दीपक की पत्नी लापता थीं और पुलिस को उसके फोन का लोकेशन भी लाश के आसपास मिला था।

ऐसे में पुलिस का पहला शक दीपक पर गया। पुलिस ने महिला की सिर कटी लाश को शिल्पा मानकर दीपक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

पुलिस के होश तब उड़ गए, जब इस शख्‍स की जिंदा पत्‍नी लौट आई। ऐसे में पुलिस ने तुरंत इस शख्‍स को रिहा कर दिया और मामला वापस ले लिया। लेकिन नागपुर पुलिस के द्वारा हुई इस लापरवाही पर अब राजनीति शुरू हो गई है।

कांग्रेस कार्यकर्ता और ऐक्टिविस्ट उदयसिंह यादव ने नेता विपक्ष राधाकृष्णा विखे पाटिल को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में ग्रामीण पुलिस की लापरवाही झलकती है।

प्रधानमंत्री की सभा में टेंट गिरा : २५ घायल

पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर जिले में सोमवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा के दौरान मंच के पास जनता को धुप और बारिश से बचाने के लिए लगाए गए टेंट का बड़ा हिस्सा गिर गया जिसमें २५ से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। मोदी बाद में घायलों का हाल जानने अस्पताल गए।

भाजपा ने इस बात की जांच करने का फैसला किया है की टेंट कैसे गिरा और इसमें किसकी लापरवाही है। यह भाजपा की तरफ से आयोजित कार्यक्रम था। टेंट का हिस्सा गिरने से २५ से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। घायलों को स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया है हालाँकि बताया जा रहा है की इनमें से दो की हालत गंभीर है।

प्रधानमंत्री की सभा पश्चिम बंगाल के वेस्ट मिदनापुर में थी और भाजपा ने इसे किसान रैली का नाम दिया था। मोदी जब रैली को संबोधित कर रहे थे तभी उनकी सभा के एक हिस्से में पंडाल (टेंट) गिर गया। टेंट गिरते ही वहां अफरा-तफरी मच गई। इसमें कमसे काम २५ लोग घायल हुए हैं। घायलों को तुरंत मिदनापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रैली के बाद मोदी घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे और जख्मी हुए लोगों से मिल उनका हालचाल जाना। एक घायल महिला को हौसला देते हुए मोदी ने उनके जल्द ठीक हो जाने की प्रार्थना की।
पंडाल उस वक्त गिरा जब मोदी भाषण दे रहे थे। जैसे ही टेंट गिरा और मोदी ने महसूस किया कि इसमें लोग हुए हो सकते हैं उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात एसपीजी के जवानों को घायलों की मदद करने का इशारा किया। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे पर दुख जताया है और घायलों के जल्दी स्वस्थ होने की कामना की है। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से घायलों के इलाज के लिए हर संभव मदद की बात कही है। कांग्रेस और माकपा ने हादसे पर दुःख जताया है।

कुपवाड़ा में आतंकी ढेर, दो सैनिक घायल

राज्यपाल शासन लगने के बाद भी जम्मू कश्मीर में आतंवादियों की घुसपैठ और उनके हमलों में कमी नहीं आई है। सोमवार को कश्मीर के कुपवाड़ा इलाके में आतंवादियों ने हमला कर दिया। सुरक्षा वालों की जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी ढेर हो गया जबकि दो सैनिक घायल हुए हैं।

यह खबर लिखे जाने तक सेना और आतंकियों में मुठभेड़ जारी थी। कुछ दिन पहले कुपवाड़ा के जंगलों में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ सर्च अभियान चला रखा है। सोमवार सुबह शुरू हुई मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर हो गया। उसके पास से एक एके-47 राइफल भी बरामद हुई है।

मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार सुबह कुपवाड़ा के साफावाली गली में नियंत्रण रेखा के पास आतंकियों और सुरक्षाबलों में मुठभेड़ शुरू हो गई। मुठभेड़ में एक आतंकी को सेना ने मार गिराया। आतंकी के पास से एके-47 राइफल बरामद की गई है। कुछ दिन पहले कुपवाड़ा जिले के जंगलों में आतंकी गतिविधि के इनपुट मिले थे। कुपवाड़ा के हलमतपोरा इलाके के जंगलों में शनिवार को सर्च ऑपरेशन चलाया गया था।

गौरतलब है कि इससे तीन दिन पहले ही कुपवाड़ा में 30 घंटे से अधिक समय तक सेना ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए एक आतंकी को मार गिराया था। इस कार्रवाई के दौरान पैरा स्पेशल फोर्सेज के जवान मुकुल मीणा शहीद जबकि एक जवान घायल हो गया था।

भूस्खलन से चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे बंद

हिमाचल की पर्यटन स्थल मनाली के पास बहुत ज्यादा भूस्खलन होने से इसका देश के बाकी हिस्से से सड़क संपर्क टूट गया है। कुल्लू-मनाली हाईवे पर रांगड़ी में भारी भूस्खलन के चलते कुल्लू-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग -२१ (नेशनल हाईवे) सोमवार को अवरुद्ध हो गया जिसके बाद उस पर यातायात बंद कर दिया गया है। भूस्खलन से किसी जान माल के नुक्सान की खबर नहीं है।

भूस्खलन के चलते सोमवार सुबह 6 बजे से यह रिपोर्ट लिखे जाने तक नेशनल हाईवे बंद है। मार्ग बंद हो जाने से सड़क के दोनों ओर ट्रैफिक जाम लग गया है। फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी हाईवे को बहाल करने में जुटी हुई है। दूसरी ओर मनाली-लेह मार्ग पर जिंगजिंग बार के पास भूस्खलन का दौर जारी है, जिससे पर्यटकों सहित राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पिछले कुछ रोज से जारी बारिश के बाद हिमाचल के कमसे काम तीन दर्जन संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं। कुछ जगह बसों के फंसे होने की भी जानकारी मिली है। लगातार हो रही बारिश से राहगीरों और पर्यटकों की परेशानियां बढ़ गई हैं। इसके कारण मनाली-कुल्लू मार्ग में भी काफी जोखिम बढ़ गया है। बूढ़ा केंप, रांगड़ी, बांहनु, आलू ग्राउंड, क्लॉथ, 17 मील, 15 मील, पतलीकूहल पुल, डोभी, रायसन सहित अनेक स्थानों पर लगातार पत्थर और मलबा पहाड़ियों से गिर रहा है।

इस बीच कुल्लू प्रशासन ने पर्यटकों को सलाह दी है कि वे जिले के किसी भी हिस्से में जोखिम उठाकर जाने की कोशिश न करें क्योंकि पहाड़ियों से बारिश के कारण लगातार मलवा गिर रहा है।

जल्द ही बढ़ सकता है गरीब रथ के टिकट के दाम बढ़ना तय

सस्ते किराये की सुविधा के साथ शुरू की गई वातानुकूलित ट्रेन गरीब रथ एक्सप्रेस के टिकट के दाम में ही बेडरोल का दाम जल्द ही जोड़ा जा सकता है।

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार रेलवे एक दशक पहले तय हुए बेडरोल के 25 रूपये के किराये को भी बढ़ाने पर विचार कर रहा है जिससे किराये में खासी बढ़ोतरी हो सकती है।

अधिकारी के मुताबिक़ कपड़े के रखरखाव की लागत में तीव्र बढ़ावा होने से यह समीक्षा दूसरी ट्रेनों में भी लागू हो सकती है।

गरीब रथ ट्रेनों की तरह दूसरी ट्रेनों में भी बेडरोल की कीमतों में एक दशक में कोई इजाफा नहीं हुआ है।

उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के कार्यालय से एक नोट आने के बाद यह विचार किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार इस नोट में पूछा गया था कि गरीब रथ में किराये का पुनरीक्षण क्यों नहीं किया गया और अनुशंसा की कि बेडरोल की लागत को ट्रेन के किराये में शामिल किया जाए।

मुकेश अम्बानी बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के चेयरमैन मुकेश अंबानी, ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं।

नए इंडेक्स के मुताबिक़ शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज की कुल संपत्ति 44.3 अरब डॉलर आंकी गई थी।

रिपोर्ट्स की मानें तो अम्बानी ने अलीबाबा समूह के संस्थापक जैक मा को पीछे छोड़ दिया है जिनकी कुल संपत्ति 44 अरब डॉलर आंकी गई।

इस साल अंबानी की कुल संपत्ति में चार अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई जबकि जैक मा के अलीबाबा समूह को इस साल 1.4 अरब डॉलर का घाटा झेलना पड़ा।

रिलायंस की पेट्रोकैमिकल्स क्षमता दोगुनी करने का फायदा कंपनी के चेयरमैन मुकेश अम्बानी को मिला है।

हाल ही में आयोजित हुई रिलायंस इंडस्ट्रीज की एजीएम में मुकेश अंबानी ने कहा था कि साल 2025 तक रिलायंस दोगुना हो जाएगा।

देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के 100 अरब डॉलर (करीब 6.85 लाख करोड़ रुपये) की कंपनी बनने के बाद अब रिलायंस भी इस क्लब में शामिल हो गई है।

बृहस्पतिवार को शेयर बाजार की तेजी के बाद रिलायंस 100 अरब डॉलर की कंपनी बनने में सफल रही है। इसका बाजार पूंजीकरण करीब 6.89 लाख करोड़ रुपये हो गया।

फीफा वर्ल्ड कप २०१८ : फ्रांस सरताज, फाइनल में क्रोएशिया को ४-२ से हराया

फीफा वर्ल्ड कप 2018 का फाइनल। रूस की राजधानी मॉस्को के लुज्निकी स्टेडियम में फ्रांस और क्रोएशिया के समर्थकों के अलावा बड़ी संख्या में फुटबाल प्रेमियों की भीड़। मैच शुरू होने से पहले सभी को लग रहा था बहुत ज़बरदस्त मुकाबला होगा। शायद पूरे समय तक कोइ भी टीम गोल न कर पाए और एक्स्ट्रा समय या शूट आउट में फैसला हो। लेकिन यह क्या ! मैच के १८ वें मिनट में ही फ्रांस ने पहला गोल कर दिया। हाफ टाइम आते-आते तीन गोल हो चुके थे। पूरे ४४ साल के बाद यह पहला मौका था जब हाफ टाइम से पहले ही तीन गोल हो गए। दूसरे हाफ में भी तीन गोल हुए। और जब मैच खत्म हुआ स्कोर बोर्ड पर अंकित था – फ्रांस : ४, क्रोएशिया : २ गोल। बीस साल के बाद फ्रांस फिर विजेता की पायदान पर खड़ा था। और क्रोएशिया पहली बार फाइनल खेलने के गौरव को भीतर संजोने के बावजूद निराशा के सागर में था। टीवी पर करीब १४९ करोड़ फुटबाल प्रेमियों ने यह मैच देखा।

फ्रांस का पिछले साल में यह तीसरा फाइनल था। १९९८ में वे जीत चुके थे और ४१ लाख की आबादी वाले क्रोएशिया का फाइनल में पहुँचने का यह पहला अवसर था। क्रोएशिया अपने पहले ही फीफा फुटबाल विश्व कप में सेमीफाइनल में पहुँच गया था।

पहले हाफ में १८ वें मिनट में फ्रांस ने पहला गोल किया वो भी क्रोएशियाई खिलाड़ी मानजुकिच के आत्मघाती गोल से। मारियो मानजुकिच ने फ्रांस के एंटॉनियो ग्रीजमैन की फ्री-किक को क्लियर करने की कोशिश की लेकिन गेंद उनके सिर से लगकर गोल पोस्ट में चली गई। यह वर्ल्ड कप फाइनल में पहला सेल्फ गोल था। लेकिन १० मिनट बाद २८ मिनट में इवान पेरिसिच ने क्रोएशिया को बराबरी पर ला खड़ा किया। शानदार स्ट्राइक का परिचय देते हुए सीधे विरोधी खेमे में धावा बोला इवान पेरिसिच ने और फ्रांस के खेमे में पहुंचकर गोल दाग दिया। हतप्रभ रह गए इस गोल से फ्रांस के समर्थक। अब मुकाबला १-१ की बराबरी पर था।

इस बीच ३६ वे मिनट में पेरिसिच के हैंड बॉल की वजह से फ्रांस को पेनल्टी मिली। वीएआर के जरिये इसका फैसला हुआ। इससे पहले 28 में से 21 पेनल्टी गोल में तब्दील हो चुकी थीं लिहाज़ा क्रोएशियाई गोल कीपर तनाव में दिख रहे थे। ३९ वें मिनट में ग्रीजमैन ने पेनल्टी मारी और क्रोएशियाई गोल कीपर ने अनुमान से बाईं तरफ डाइव लगा दी। लेकिन ग्रीजमान की किक दाईं तरफ से सीधे गोल में जा घुसी। फ्रांस ने समर्थकों के जोशीले शोर के बीच २-१ की बढ़त बना ली।

इसके बाद हाफटाइम तक क्रोएशियाई खिलाड़ियों ने बराबरी की भरपूर कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सके।

दूसरे हाफ में फ्रांस ने एक बार फिर गोल किया और क्रोएशिया पर 3-1 से बढ़त बना ली। पॉल पोग्बा ने फ्रांस के लिए 59वें मिनट में यह गोल दागा। फ्रांस की बढ़त 3-1 होते ही उसके समर्थकों और कोच ने एक तरह से नृतय कर अपनी खुशी मनाई। इस गोल के बाद फ्रांस की स्थिति काफी मजबूत हो गई।

और 65वें मिनट में फ्रांस ने एक और गोल दाग दिया। एम्बाप्पे ने अपनी टीम को 4-1 से एक तरह से अजय बढ़त दिला दी।

हालांकि ६९वें मिनट में मारियो मांडजुकिक ने गोल करते हुए फ्रांस की बढ़त को कम कर दिया और क्रोएशिया के खेमे में उम्मीद की किरण जगाये रखी। मांडजुकिक ने अकेले ही गेंद ले जाकर गोलकीपर को छकाकर गेंद गोल में डाल दी। यह नजारा देखने लायक था।  फ्रांस के गोलकीपर को भी नौमान नहीं लगा पाया कि मांडजुकिक एक चतुर शिकारी की तरह उनके पास पहुँच चुके हैं। फ्रांस की डिफेंस उस समय पूरी तरह चूक गयी थी। मुकाबले में फ्रांस अब भी 4-2 से आगे था। और उसकी यह बढ़त अंत तक बनी रही।

विंबलडन २०१८ : जोकोविक पुरुष, केर्बर महिला चैंपियन

तीन बार के चैंपियन सर्बिया के नोवाक जोकोविच ने रविवार रात विम्बल्डन टेनिस चैंपियनशिप के पुरुष एकल फाइनल में केविन एंडरसन को 3-० से हराकर ख़िताब जीत लिया। तीसरे सेट को छोड़कर एंडरसन पहले दो सेट में जोकोविक का बेहतरीन मुकाबला नहीं कर पाए।

जोकोविच ने पहला सेट ६-२ से और दूसरा सेट ६-2 से जीतकर मनोविज्ञानिक बढ़त बना ली थी।  हालाँकि तीसरे सेट में एंडरसन ने बेहतरीन खेल दिखाया।  ५-५ की बराबरी पर दोनों में कड़ा मुकाबला दिखा जबकि एक मौके पर एंडरसन ६-५ की बढ़त बनाकर सेट जीतने के कगार पर थे लेकिन जोकोविक ने मुकाबला ६-६ की बराबरी पर ला दिया।

ड्यूज के बाद पहला अंक गवाने के बाद जोकोविक ने लगातार पांच अंक अर्जित किये जिसके बाद एंडरसन ने एक अंक लिया। लेकिन जोकोविक ने वापसी की और ७-६ से जीत लिया।  विजेता बन कर ही सांस ली। यह उनका चौथा ख़िताब है।

इससे पहले एंडरसन ने पहले ‍सर्विस की, लेकिन वे पहले ही गेम में अपनी सर्विस बरकरार नहीं रख पाए। 30-40 के स्कोर पर एंडरसन ने डबल फॉल्ट किया और गेम जोकोविच के कब्जे में चला गया। इसके बाद जोकोविच ने दूसरा गेम जीतते हुए 2-0 की बढ़त बनाई। जोकोविच ने इसके बाद पांचवें गेम में भी एंडरसन की सर्विस भंग की और वे देखते ही देखते 4-1 से आगे हो गए। इसके बाद उन्होंने कुल ‍29 मिनट में पहला सेट 6-2 से जीता।

जोकोविच ने दूसरे सेट में भी दबदबा बनाए रखा। उन्होंने पहले गेम में एंडरसन की सर्विस भंग की। इसके बाद उन्होंने पांचवें गेम में भी केविन की सर्विस भंग करते हुए सेट में 4-1 की बढ़त बनाई। इसके बाद जोकोविच ने आठवें गेम में सर्विस बरकरार रखते हुए यह सेट 6-2 से अपने नाम किया।

एंडरसन पहली बार इस चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचे थे जबकि जोकोविच ने सेमीफाइनल में दो बार के चैंपियन रफेल नडाल को 6-4, 3-6, 7-6 (9), 3-6, 10-8 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। आज जोकोविच ने करिअर का १३वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीता।

केर्बर ने सेरेना को हराया

उधर महिला वर्ग में पूर्व नंबर एक जर्मनी की एंजेलिक केर्बर ने सात बार की चैंपियन अमेरिका की सेरेना विलियम्स को ६-3, 6-3 से हराकर विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप में पहली बार महिला वर्ग का  खिताब जीत लिया। ३६ साल की सेरेना मां बनने के बाद अपने पहले ग्रैंड स्लेम और आठवें विंबलडन खिताब की तलाश में थीं लेकिन हार के साथ उनका २४ वां ग्रैंड सलेम खिताब जीतने का सपना टूट गया।

इस टूर्नामेंट में इस बार उन्हें  25वीं वरीयता मिली थी। सेरेना शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में तो पहुंची। केर्बर ने पूरे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया और पूर्व नंबर एक सेरेना को कहीं टिकने नहीं दिया। केर्बर 5-3 के स्कोर पर खिताब के लिए सर्विस करते हुए नर्वस दिखाई दे रहीं थीं लेकिन उनके पहले चैंपियनशिप अंक पर सेरेना का बैकहैंड जैसे ही नेट से टकराया वह खुशी से उछल पड़ीं।

11 वीं वरीयता प्राप्त केर्बर का यह तीसरा ग्रैंड स्लेम खिताब है। इससे पहले उन्होंने 2016 में ऑस्ट्रेलियन ओपन और यूएस ओपन के खिताब जीते थे। टॉप 10 वरीय खिलाडिय़ों के बाहर हो जाने के बाद केर्बर महिला वर्ग में केर्बर शीर्ष वरीय खिलाड़ी रह गयी थीं और उन्होंने अपनी वरीयता के साथ पूरा न्याय किया। इसके साथ ही वह 1996 में स्टेफी ग्राफ की कामयाबी के बाद विंबलडन का खिताब जीतने वाली पहली जर्मन खिलाड़ी बन गयीं। फाइनल में हारने के बाद सेरेना ने विंबलडन के अपने प्रदर्शन को सभी मांओं को समर्पित किया। विंबलडन खिताब जीतने वाली आखिरी मां ऑस्ट्रेलिया की इवोन गुलागोंग थीं जिन्होंने 1980 में यहां खिताब जीता था।