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आशुतोष का ‘आप’ से इस्तीफा, लेकिन केजरीवाल की ‘न’

राज्य सभा के चुनाव में अपनी नजरअंदाजी के बाद से ही कुछ ख़फ़ा से चल रहे पत्रकार से नेता बने आशुतोष ने आखिर स्वतंत्रता दिवस पर आम आदमी पार्टी (आप) से आज़ादी पा ली। कहते हैं वे राज्य सभा में जाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने दो बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जिससे आशुतोष ही नहीं कुछ और नेता भी नाराज हुए थे। अब उन्होने आप को टाटा कह दिया है।
हालांकि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने आशुतोष के इस्तीफे वाले ट्वीट के बाद अपने ट्वीट में लिखा – ”हम आपका इस्तीफा कैसे स्वीकार कर सकते हैं। न, इस जन्म में तो नहीं”। फिलहाल आशुतोष की इसपर प्रतिक्रया का इन्तजार है। देखना है कि उनके इस्तीफे को केजरीवाल की तरफ से नकार दिए जाने के बाद आशुतोष क्या फैसला करते हैं।
इससे पहले आप से अपनी विदाई पर आशुतोष ने ट्वीटर पर लिखा –  ”हर सफर का एक अंत होता है। मेरा आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ाव अच्छा और क्रांतिकारी था, इसका भी अंत हो गया है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और पीएसी से इसे स्वीकार करने की अपील की है। यह शुद्ध रूप से बेहद व्यक्तिगत फैसला है। पार्टी और सहयोग देने वालों को धन्यवाद।” इस तरह आप को झटका लगा है। सम्भावना यही है कि वे पत्रकारिता में लौट आएंगे।
साल २०१४ के चुनाव के दौरान मोदी लहर में वह चांदनी चौक से तीन लाख से अधिक वोट पाकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री  हर्षवर्धन से एक लाख वोटों से हार गए थे। फिर भी वह कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से सवा लाख वोटों से आगे रहे। पार्टी नेतृत्व के साथ आशुतोष के मतभेद पिछले साल राज्यसभा चुनाव के दौरान उभरे, जब केजरीवाल ने सुशील गुप्ता जैसे उद्योगपति को टिकट दिया था। हालांकि पहले आशुतोष और संजय सिंह को राज्यसभा में भेजे जाना तय माना जा रहा था।
आशुतोष आप ही नहीं, राजनीति से भी संन्यास ले रहे हैं। आशुतोष के पत्रकारिता में दोबारा सक्रिय होने की संभावना है। आम चुनाव से महज आठ महीने पहले आशुतोष जैसे कद्दावर नेता का पार्टी से जाना आप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस पर आशुतोष ‘आप’ से विदा

राज्य सभा के चुनाव में अपनी नजरअंदाजी के बाद से ही कुछ ख़फ़ा से चल रहे पत्रकार से नेता बने आशुतोष ने आखिर स्वतंत्रता दिवस पर आम आदमी पार्टी (आप) से आज़ादी पा ली। कहते हैं वे राज्य सभा में जाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने दो बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जिससे आशुतोष ही नहीं कुछ और नेता भी नाराज हुए थे। अब उन्होने आप को टाटा कह दिया है।
आप से अपनी विदाई पर आशुतोष ने ट्वीटर पर लिखा –  ”हर सफर का एक अंत होता है। मेरा आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ाव अच्छा और क्रांतिकारी था, इसका भी अंत हो गया है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और पीएसी से इसे स्वीकार करने की अपील की है। यह शुद्ध रूप से बेहद व्यक्तिगत फैसला है। पार्टी और सहयोग देने वालों को धन्यवाद।” इस तरह आप को झटका लगा है। सम्भावना यही है कि वे पत्रकारिता में लौट आएंगे।
साल २०१४ के चुनाव के दौरान मोदी लहर में वह चांदनी चौक से तीन लाख से अधिक वोट पाकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री  हर्षवर्धन से एक लाख वोटों से हार गए थे। फिर भी वह कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से सवा लाख वोटों से आगे रहे। पार्टी नेतृत्व के साथ आशुतोष के मतभेद पिछले साल राज्यसभा चुनाव के दौरान उभरे, जब केजरीवाल ने सुशील गुप्ता जैसे उद्योगपति को टिकट दिया था। हालांकि पहले आशुतोष और संजय सिंह को राज्यसभा में भेजे जाना तय माना जा रहा था।
आशुतोष आप ही नहीं, राजनीति से भी संन्यास ले रहे हैं। आशुतोष के पत्रकारिता में दोबारा सक्रिय होने की संभावना है। आम चुनाव से महज आठ महीने पहले आशुतोष जैसे कद्दावर नेता का पार्टी से जाना आप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

राइफलमैन औरंगज़ेब, मेजर आदित्य को मिलेगा शौर्य चक्र

अप्रतिम शौर्य दिखने वाले जम्मू कश्मीर के भारतीय सेना में राइफलमैन औरंगज़ेब जिन्हें आतंकवादियों ने अगवा कर यातनाएं देने के बाद शहीद कर दिया था, को भारत सरकार ने शौर्य चक्र देने का फैसला किया है। देश के लिए शौर्य दिखाने के लिए ही सरकार ने मेजर आदित्य कुमार को भी शौर्य चक्र का फैसला किया है।

गौरतलब है कि मेजर आदित्य ने इसी साल 27 जनवरी को जम्मू कश्मीर के शोपियां इलाके में पत्थरबाजों को रोकने के लिए गोलियां चलाने का आदेश दिया था जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई थी। इसके बाद उनके खिलाफ जम्मू कश्मीर पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया था। राज्य की तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसकी जांच कराने के आदेश दिए थे।

जहाँ तक राइफलमैन औरंगज़ेब की बात है उन्हें जून १४ को आतंकवादियों ने अगवा कर लिया था। औरंगजेब की आतंकवादियों ने पुलवामा से उस समय अगवा कर लिया था जब वह ईद की छुट्टी मनाने के लिए अपने घर जा रहा था। उसका अपहरण कर आतकवादी उसे अज्ञात स्थान पर ले गए थे।  बाद में उसका गोलियों से छलनी शव मिला था।

वे 44 राष्ट्रीय राइफल के साथ शोपियां के शादीमर्ग में तैनात थे। राजौरी जिले के मेंढर निवासी औरंगजेब ईद मनाने के लिए सुबह 9 बजे घर के लिए निकले थे। आतंकवादियों ने एक वीडियो भी जारी किया था जिससे जाहिर होता है की बहादुर औरंगज़ेब को टार्चर किया गया था। हालांकि वीडियो में बातचीत से साफ़ जाहिर होता था कि आतंकवादियों की गोलियों के सामने भी वह निडरता से उनके जवाब दे रहा था। अब भारत सरकार इस वीर सैनिक को मरणोपरांत शौर्य चक्र से नवाजेगी।  वे मेजर शुक्ला के साथ तैनात थे। मेजर शुक्ला ने मई में आतंकी समीर टाइगर को मुठभेड़ में मार गिराया था।
सरकार ने मेजर आदित्य कुमार को भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शौर्य चक्र से सम्मानित करने का फैसला किया है। मेजर आदित्य कुमार गढ़वाल राइफल्स के मेजर आदित्य जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। उन्होंने आतंकियों के खात्मे के लिए कई सफल ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाई। 27 जनवरी को सेना का काफिला सर्च ऑपरेशन से लौट रहा था। इसी दौरान शोपियां में प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। आदित्य ने पत्थरबाजों को रोकने के लिए गोलियां चलाने का आदेश दिया था जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई थी। इसके बाद उनके खिलाफ जम्मू कश्मीर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। सरकार ने सेना में उनकी सेवा को देखते हुए उन्हें सम्मानित करने का फैसला किया है।
गृह मंत्रालय ने मंगलवार को  स्‍वतंत्रता दिवस से पहले वीरता पुरस्कारों का ऐलान किया। इस साल कुल 942 पुलिस मेडल दिए जाएंगे। केंद्रीय अर्धसैनिक बल (सीआरपीएफ) के पांच जवानों को भी शौर्य चक्र मिलेगा। कश्मीर में शहीद सीआरपीएफ के दो जवानों- कॉन्स्टेबल शरीफुद्दीन और हेड कॉन्स्टेबल मो. तफैल को वीरता के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार (पीपीएमजी) मिलेगा। सीआरपीएफ के 89 जवानों को पुलिस पदक (पीएमजी) देने का ऐलान किया गया। वीरता के लिए 177 पुलिस पदक (पीएमजी) दिए जाएंगे। इनमें 37 मेडल के साथ जम्मू-कश्मीर सबसे आगे है।

भाजपा को झटका, एक साथ चुनाव पर आयोग की न

मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा है कि देश में लोक सभा चुनाव के साथ ११ राज्यों में विधानसभा चुनाव कराना संभव नहीं है क्योंकि आयोग के पास उतनी वीवीपैट नहीं हैं। आयोग के इस रुख से भाजपा को तगड़ा झटका लगा है जो लगातार एक साथ चुनाव की वकालत कर रही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एक रोज पहले ही विधि आयोग को एक साथ चुनाव की वकालत वाला पत्र लिख चुके हैं।

आयोग प्रमुख रावत ने एक निजी टीवी चैनल के साथ इंटरव्यू में कहा कि यदि एक साथ चुनाव करवाने हों तो इसके लिए एक-दो महीने के भीतर ज्यादा वीवीपैट के लिए ऑर्डर करना होगा। रावत ने कहा – ”हमारे पास २०१९ में एक साथ लोक सभा और ११ राज्यों में चुनाव करवाने लायक वीवीपैट मशीनें नहीं हैं। यदि ऐसा करना है तो इसके लिए ज्यादा वीवीपैट मशीनों की ज़रुरत रहेगी और इसके लिए भी एक-दो महीने के भीतर आर्डर करना होगा”।

गौरतलब है कि कांग्रेस भाजपा के एक साथ चुनाव की इन कोशिशों का विरोध कर रही है। उसका आरोप है कि देश में लगातार अपनी बढ़ती अलोकप्रियता के चलते भाजपा इस तरह की कोशिश कर रही है। विधि आयोग के सामने गोवा फारवर्ड पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, द्रमुक, तेलुगुदेशम, माकपा, भाकपा, फारवर्ड ब्लॉक और जनता दल (एस) ने भी एक साथ चुनाव कराने का विरोध किया है।

याद रहे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को ही विधि आयोग को अपने सुझावों के साथ लिखे पत्र में कहा था कि एक साथ चुनाव कराने से देश में चुनाव पर होने वाले बेतहाशा खर्च पर लगाम कसने का रास्ता साफ़ होगा और इससे संघीय ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। भाजपा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को विधि आयोग में जाकर देश में एक साथ चुनाव कराए जाने को लेकर अपना पक्ष रखा था। भाजपा प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे, महासचिव भूपेंद्र यादव और सांसद अनिल बलूनी शामिल थे। पार्टी का प्रस्तुतीकरण देने के साथ इन नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का पत्र भी विधि आयोग को सौंपा था।

शाह ने अपने पत्र में कहा है कि 1952 से 1967 तक देश में एक साथ चुनाव होते रहे थे। 1970 के बाद चुनाव का चक्र बिगड़ा। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने 1983 व विधि आयोग ने 1999 में और संसदीय समिति ने 2015 में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी अपने संबोधनों में इस विचार को रख चुके हैं। शाह ने कहा है कि इससे चुनाव पर सरकारी खर्च में कमी आएगी और आचार सहिंता से विकास कार्य रुक जाने से प्रगति में होने वाली बाधा को भी दूर किया जा सकेगा। शाह ने उदाहरण देते हुए कहा कि बीते समय में महाराष्ट्र में संसदीय विधानसभा, स्थानीय निकाय के लगातार चुनाव होने से राज्य में 365 दिनों में से 307 दिन आचार सहिंता लागू रही। शिरोमणि अकाली दल, अन्नाद्रमुक, सपा और टीआरएस हालाँकि एक साथ चुनाव कराने के हक़ में हैं।

हिमाचल में तबाही, दो दिन में १९ लोगों की मौत

पिछले ४८ घंटे से हो रही बारिश पहाड़ी सूबे हिमाचल में बड़ी तबाही लेकर आई है। दो दिन में १९ लोगों की जान चली गयी है और प्रदेश के 6 नेशनल हाईवे चंडीगढ़-शिमला, चंडीगढ़-मनाली और पठानकोट-पालमपुर यह रिपोर्ट लिखे जाने तक बंद थे। प्रदेश में अब तक ७८० करोड़ रूपये के नुक्सान का आकलन किया गया है। दस जिलों में मंगलवार को भी लगातार दूसरे दिन स्कूल बंद रखने के आदेश सरकार ने दिए हैं। टोल फ्री नम्बर 1077 स्थापित किया गया है ताकि वर्षा के कारण हुए नुकसान पूर्वनुमान की सूचना उपलब्ध करवाई जा सके। शिमला में रास्ता बंद होने से मंगलवार को दूध, सब्ज़ी और अखबार नहीं पहुंचे।
प्रदेश में भू-स्खलन के कारण 923 सड़कें अवरूद्ध हैं, जिनमें 6 राष्ट्रीय उच्च मार्ग भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने प्रदेश में भारी वर्षा के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए वरिष्ठ  अधिकारियों की बैठक तालाब की और हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने राज्य उच्च मार्गों और राष्ट्रीय उच्च मार्गों पर भू-स्खलन से निपटने के लिए अधिकारियों को तत्काल श्रमशक्ति और मशीनरी तैनात करने के निर्देश दिए ताकि लोगों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। प्रदेश सरकार ने बचाव, बहाली और पुनर्वास कार्यों के लिए 96.50 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। प्रदेश में भारी बारिश के कारण ७८० करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार ने पुनःस्थापन कार्य के लिए अभी तक 229 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

राज्य मुख्यालय पर प्राप्त सूचना के अनुसार अब तक विभिन्न जिलों से १९ व्यक्तियों की मृत्यु की खबर है जिनमें सबसे ज्यादा जानी नुक्सान सोलन जिले में हुआ है जहाँ ८ लोगों की जान गयी है।  बिलासपुर और ऊना जिले में एक-एक, हमीरपुर में दो, मण्डी में चार और कुल्लू और लाहुल में ३ लोगों की मौत हो गयी है। प्रभावित परिवारों को जिला प्रशासन के माध्यम से अंतरिम राहत प्रदान की गई है।

बारिश के चलते प्रदेश के 10 जिलों में मंगलवार को भी स्कूल बंद रखने के आदेश प्रशाशन ने जारी किये हैं। शिमला, किन्नौर, कुल्लू, सोलन, सिरमौर, चंबा, बिलासपुर, हमीरपुर के सभी सरकारी और  निजी स्कूलों में 14 अगस्त की छुट्टी घोषित कर दी गई है। कांगड़ा और मंडी में सभी स्कूलों के साथ काॅलेज भी बंद रहेंगे। सोलन में भी कॉलेज बंद रहेंगे। कांगड़ा में आईटीआई भी बंद रहेंगी।

इस बीच मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सड़कों के अवरूद्ध होने के कारण सेब की ढुलाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं आना सुनिश्चित बनाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को सेब उत्पादक क्षेत्रों में अवरूद्ध सड़कों को तत्काल बहाल करने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने उपायुक्तों को खराब मौसम के पूर्वानुमान के दृष्टिगत विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए शिक्षण संस्थानों को 14 अगस्त को बंद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उपायुक्तों को सैलानियों और स्थानीय लोगों को नदियों के किनारे नहीं जाने देने के लिए कदम उठाने और ट्रैकिंग गतिविधियों पर नजर रखने के भी निर्देश दिए हैं । उन्होंने कहा कि सड़कों, जल और विद्युत आपूर्ति की बहाली के लिए पर्याप्त श्रमशक्ति और मशीनरी तैनात की गई है और उपायुक्तों और सम्बन्धित विभागों को धनराशि जारी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसी भी हिस्से में आवश्यक खाद्य सामग्री की कोई भी कमी नहीं है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व और लोक निर्माण मनीषा नंदा ने कहा कि प्रदेश में भू-स्खलन के कारण 923 सड़कें अवरूद्ध हैं, जिनमें 6 राष्ट्रीय उच्च मार्ग भी शामिल हैं। विभाग इन सड़कों को शीघ्रातिशीघ्र खोलने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि बचाव और राहत कार्यों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है और अगर आवश्यक हो तो उपायुक्त सड़कों को बहाल करने और  अन्य कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर भी मशीनरी किराये पर ले सकते हैं।

उपायुक्त कुल्लू ने बताया कि मनाली राष्ट्रीय उच्च मार्ग भू-स्खलन के कारण अवरूद्ध है और इस मार्ग को खोलने के लिए युद्धस्तर पर कार्य चल रहा है। कांगड़ा जिले में 85 सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ है, जिनमें से अधिकतर सड़कों को सोमवार सायं तक आरम्भ कर दिया जाएगा। पठानकोट- मण्डी सड़क मार्ग पर छोटे वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई है और लम्बागांव में फंसे लोगों को जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।

उपायुक्त सोलन ने बताया कि जिले में 8 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है और जिले में 102 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिनमें से 62 सड़कों को यातायात के लिए बहाल कर दिया गया है। कुमारहट्टी-नाहन सड़क को भी छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया है।
बिलासपुर जिले के स्वारघाट राष्ट्रीय उच्च मार्ग और बिलासपुर-शिमला सड़क पर यातायात बहाल कर दिया गया है, जबकि जिले के अंदरूनी सड़कों को खोलने का कार्य प्रगति पर है। किन्नौर जिले के मालिंग नाला और स्कीबा और सांगला घाटी की सड़क को  बहाल कर दिया गया है। वहां कुछ पर्यटक  फंसे हुए हैं। लाहौल-स्पीति जिला की समदो-काजा-ग्राम्फू सड़क भू-स्खलन के कारण अवरूद्ध है। राष्ट्रीय उच्चमार्ग-21 पर हनोगी के निकट मुख्य सड़क पर पानी भरने के कारण यातायात अवरूद्ध है।

लोकसभा चुनाव के साथ हो सकते हैं 11 राज्यों के मतदान

अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ ही हो सकते हैं 11 राज्‍यों के विधानसभा चुनाव। बीजेपी सूत्रों के अनुसार यह क़दम चुनावों के दौरान होने वाले खर्चों को कम करने के लिए उठाया जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, मिजोरम, छत्‍तीसगढ़ और हरियाणा जैसे राज्‍यों के चुनाव कराए जा सकते हैं।

पार्टी प्रमुख अमित शाह ने सोमवार को विधि आयोग को पत्र लिखकर कहा कि देश हर वक्त चुनाव के मोड में नहीं रह सकता है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार एक देश एक चुनाव की पैरवी करती रही है।

इस मुद्दे पर फैसला लेने के लिए सभी पार्टियों की बैठक बुलाई जा सकती है। याद रहे इस तरह से चुनाव कराने के लिए संविधान में संशोधन कराने की जरूरत भी नहीं है।

जहाँ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा के चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ ही होते हैं, वहीं राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और मिजोरम में लोकसभा चुनावों में छह महीने विधानसभा के लिए वोट डाले जाते हैं। ऐसे में इन राज्‍यों के चुनाव कुछ महीनों के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।

सूत्रों ने बताया कि हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के चुनाव भी लोकसभा के साथ कराया जा सकता है। इन सभी राज्यों में बीजेपी का शासन है। इन सभी राज्यों में लोकसभा चुनाव के बाद चुनाव होने हैं।

याद रहे कि 2014 का लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में हुए थे। सूत्रों ने बताया कि आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ ही होने हैं।

कहा जा रहा है कि बिहार विधानसभा का चुनाव भी समय से पहले कराए जा सकते हैं। यहां की विधानसभा का कार्यकाल 2020 के अंत तक है। नीतीश कुमार की अगुआई वाली जेडीयू सरकार में बीजेपी सहयोगी है।

जम्‍मू कश्‍मीर में अभी किसी की सरकार नहीं है। पीडीपी बीजेपी के अलग होने के बाद से वहां पर राज्‍यपाल का शासन है। ऐसे में वहां पर भी अगले साल चुनाव कराया जा सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ विपक्षी दल कांग्रेस एक साथ मतदान कराने के खिलाफ है। विपक्षी पार्टिया सरकार के प्रस्ताव को लोकतंत्र के विरूद्ध बता रही हैं।

राफेल पर फिर राहुल का मोदी पर बड़ा हमला

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान सौद्दे में एक बार फिर सीधे प्रधांनमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर हमला बोला है। पीएम के दो दिन पहले इस मसले पर सरकार का बचाव करने के बाद राहुल ने सोमवार को कर्नाटक के बीदर में किसान रैली को संबोधित करते हुए सीधे-सीधे मोदी और सीतारमण पर आरोप लगाया और उन्हें चुनौती दी। राहुल ने किसान क़र्ज़ माफी पर भी मोदी सरकार को ललकारा।  कहा – ”आपका सीना वाकई में 56 इंच का है तो कर्नाटक के किसानों के माफ हुए कर्ज का 50 फीसदी देकर दिखाएं”।

राफेल पर राहुल ने कहा – ”मेरा साफ़ आरोप है कि मोदी ने देश के साथ धोखा किया है। मैं उनसे इस मुद्दे पर आमने-सामने डिबेट करना चाहता हूं। एक तरफ मुझे खड़ा कर दीजिए दूसरी तरफ मोदी को। जितनी देर तक मुझसे डिबेट करना चाहें तब तक मुझसे डिबेट कर सकते हैं। वो मेरे सवालों का जवाब नहीं दे पाएंगे। मोदी लोक सभा में भी मेरे राफेल पर भाषण के दौरान दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे देखते रहे लेकिन मेरी आँख से आँख नहीं मिला पाए। ”

कांग्रेस अध्यक्ष ने करीब १५ मिनट तक राफेल पर बोला और इस दौरान वे मोदी और भाजपा सरकार के प्रति बहुत आक्रमक दिखे। उन्होंने अनिल अम्बानी का नाम लेकर आरोप लगाया कि ५६० करोड़ के जहाज़ के १५५० करोड़ उनकी जेब में डाल दिए गए जो कि देश की जनता का पैसा था।

राहुल ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि राफेल के मामले में रक्षा मंत्री ने देश से झूठ बोला है। ”अनिल अंबानी की कंपनी ने कभी हवाई जहाज नहीं बनवाया। जिस कंपनी को नरेंद्र मोदी ने ठेका दिलवाया वह 10 दिन पहले बनी थी। ये हवाई जहाज भारत में नहीं बनेंगे।” मैंने मोदी (पीएम) से लोकसभा में कहा कि देश की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन ने झूठ बोला कि हवाई जहाज के दाम बताये नहीं जा सकते क्योंकि एक गुप्त समझौता हुआ है। जब मैंने फ्रांस के राष्ट्रपति से पूछा तो उन्होंने साफ़ कहा कि जहाज़ों की कीमत न बताने को लेकर कोइ गुप्त समझौता नहीं हुआ है। इस मीटिंग में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह जी भी मेरे साथ थे।”

कांग्रेस नेता ने क़र्ज़ को लेकर भी मोदी सरकार पर प्रहार किया। उन्होंने कर्नाटक के किसानों का कर्ज माफ़ करने की कर्णाटक की कुमारस्वामी सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि ”हमने चुनाव में वादा किया था कि सरकार में आएंगे तो क़र्ज़ माफ कर देंगे। हम झूठ नहीं बोलते हैं हमने जो कहा वो करके दिखा दिया है”।

राहुल गांधी ने किसान रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी पर हमला बोला है। उन्होंने पीएम मोदी को चुनौती दी और कहा कि कर्नाटक सरकार ने किसानों का कर्ज माफ कर दिया है। अगर आपका सीना वाकई में 56 इंच का हैं तो कर्नाटक के किसानों के माफ हुए कर्ज का 50 फीसदी देकर दिखाएं।

हिमाचल में भारी बारिश, ५ जिलों में स्कूल बंद

हिमाचल के ज्यादातर जिलों में पिछले १२ घंटे से जारी भारी बारिश ने पूरा जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। पांच जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और काम से काम १८५ बड़ी और छोटी सड़कें बंद हो गयी हैं। पिछले ४८ घंटों में बारिश की बजह से बने कारणों से ६ लोगों की मौत हो गयी है जिनमें बरोटीवाला में एक ही परिवार के ३ लोग भी शामिल हैं। शिमला में पिछले १२ घंटे से जारी बारिश के कारण कई जगह पेड़ गिरने और रस्ते बंद होने की सूचना है। चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे भी बंद पड़ा है। मलवा गिरने से प्रदेश भर में कम से कम एक दर्जन वाहन मिट्टी के नीचे दब गए हैं। शिमला-चंडीगढ़ मार्ग भी चक्की मोड़ के पास बंद हो गया है।

रविवार रात से जारी भारी बारिश के बाद शिक्षा विभाग और प्रसाशन ने सोमवार सुबह पांच जिलों में स्कूलों को बंद रखने का आदेश जाई किया है। इनमें शिमला, सिरमौर, कुल्लू, काँगड़ा, मंडी और सोलन जिले शामिल हैं। फिलहाल एक दिन की छुट्टी घोषित की गयी है। शिमला के उपायुक्त अमित कश्यप के मुताबिक शिमला जिले में भारी बारिश के कारण प्रशासन ने 13 अगस्त को जिला के सभी सरकारी और निजी स्कूलों (जमा दो तक) को बंद रखने का निर्णय किया है। इस संबंध में सभी उपमंडल अधिकारियों को भी निर्देश जारी किए गए हैं।

उधर एडीएम सोलन विवेक चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि भारी बरसात के चलते जिला सोलन के सभी स्कूलों, कॉलेजों व आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी कर दी गई है। तेज बारिश के चलते जलस्तर काफी बढ़ गया है। लोग नदी किनारे भी न जाएं। भूस्खलन होने का अंदेशा हर समय बना हुआ है। कालका-शिमला हाईवे में बार-बार बड़ी चट्टानें और मलबा बारिश के चलते सड़कों पर गिर रहा है जिसके कारण बार-बार लम्बा जाम लग रहा है। ऐसे में लोग देख कर सफर करें। उन्होंने कहा कि हो सके तो निर्माणधीन नेशनल हाईवे में दोपहिया वाहनों से सफर करने से बचें। उन्होंने लोगों से अपील की कि बरसात के चलते नदी-नालों से दूर रहें ताकि जानमाल के नुकसान से बचाव हो सके।

मंडी जिला में भारी बारिश का कहर छाया हुआ है। डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि भूस्खलन के चलते एनएच 20 और 21 भी बंद हैं इसके अलावा अधिकतर संपर्क मार्ग भी बंद हो गए हैं। प्रशासन ने लोगों से ऐहतियात बरतने को कहा है। हमीरपुर की उपयुक्त ऋचा वर्मा ने कहा अगर शाम तक मौसम साफ न हुआ तो 14 अगस्त स्कूलों में भी रहेगी छुट्टी। डीसी कांगड़ा संदीप कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि भारी बरसात के चलते 13 अगस्त को कांगड़ा जिला में सभी स्कूल बन्द रहेंगे।

इस बीच सोमवार तड़के करीब ४ बजे चिंतपूर्णी शम्भू बैरियर के समीप सड़क धंसने के कारण श्रद्धालुओं से भरी एक कार खाई में जा गिरी। हादसे में तीन वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। हादसे के बाद कार एक पेड़ पर अटक गई थी जिससे कार सवार अन्य तो बच गए लेकिन बच्ची की मलबे में दबने से मौत हो गई। काफी मशक्कत के बाद बच्ची को ढूंढा गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

पूरा परिवार पंजाब के कपूरथला का रहने वाला बताया जा रहा है जो कि चिंतपूर्णी माथा टेकने आया था। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। उधर सोलन जिले के बरोटीवाला में रविवार तड़के एक झुग्गी पर दिवार आ गिरने से एक ही परिवार के ३ लोगों की मौत हो गयी। इनमें चार साल की बच्ची और उसके माता-पिता शामिल हैं।

पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का निधन

सोमनाथ दा के नाम से मशहूर रहे वरिष्ठ नेता और लोकसभा की पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का सोमवार सुबह निधन हो गया। वे ८९ वर्ष के थे और कुछ समय से कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती थे। सोमनाथ चटर्जी दस बार लोकसभा के सदस्य रहे जबकि वे २००४ से 2009 तक लोकसभा के स्पीकर रहे।

सोमनाथ को कोलकाता के अस्पताल में पिछले मंगलवार भर्ती कराया गया था, जहां उनको दिल का दौरा पड़ा था। वे आईसीयू में भर्ती थे। पीएम मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कई बड़े नेताओं ने सोमनाथ के निधन पर शोक जताया है। चटर्जी १९७१ में पहली बार लोक सभा के लिए चुने गए थे। सोमनाथ का जन्म 25 जुलाई, 1929 को तेजपुर में हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक, चटर्जी का इलाज करीब 40 दिन से चल रहा था। सुधार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी लेकिन उनको मंगलवार को फिर से भर्ती कराया गया था। जहां उनकी डायलिसिस की जा रही थी। वे गुर्दे की समस्या से जूझ रहे थे।

दस बार लोकसभा के सदस्य रहे सोमनाथ दा माकपा की केंद्रीय समिति के भी सदस्य रहे। वे २००४ से 2009 के बीच लोकसभा के अध्यक्ष रहे। हालांकि इसी बीच उनकी पार्टी के साथ अनबन भी हो गई जब उनकी पार्टी ने यूपीए की पहली सरकार (२००४-२००९) से समर्थन वापस ले लिया। उस वक्त सोमनाथ चटर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था और तब 2008 में उन्हें माकपा से निष्कासित कर दिया गया था।

माकपा के साथ राजनीतिक करियर की शुरुआत चटर्जी ने ब्रिटेन में लॉ की पढ़ाई करने के बाद कलकत्ता हाइकोर्ट में प्रैक्टिस की थी और उसके बाद राजनीति में कदम रखा था। सीपीआई के साथ राजनीतिक करियर की शुरुआत 1968 में की और 2008 तक इस पार्टी से जुड़े रहे थे। यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी सोमनाथ के निधन पर शोक जताया है।

बाढ़ ग्रस्त केरल को मिलेगी 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि

केंद्र सरकार ने बारिश और बाढ़ से जूझते केरल को 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान करने का वादा किया है।

याद रहे कि पिछले महीने केंद्र सरकार ने संकट की इस घड़ी में केरल की राहत पहुंचने हेतु 80.25 करोड़ रुपये की पहली इंस्टालमेंट जारी किया था।

रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने केरल के दो बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है।

राजनाथ ने भीषण बाढ़ के कारण पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र की ओर से राज्य को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘मैं राज्य सरकार को आश्वस्त करना चाहता हूं कि बाढ़ की चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी.’ उन्होंने कहा कि इस स्थिति में केंद्र सरकार राज्य की सरकार के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ी है।

दूसरी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उन लोगों के पासपोर्ट मुफ्त में दोबारा से बनाकर देने का ऐलान किया है जिनके पासपोर्ट बाढ़ के चलते नष्ट हो गए हैं। बाढ़ पीड़ितों से इस संबंध में पासपोर्ट केंद्रों से संपर्क करने की अपील की गई है।

सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया, “केरल में बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। हमने फैसला लिया है कि जब हालात सामान्य हो जाएंगे तो उन लोगों के पासपोर्ट को मुफ्त में बदलकर दोबारा दिया जाएगा जिनके पासपोर्ट बाढ़ के चलते नष्ट हो गए हैं।”

बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 24 घंटे राहत-बचाव कार्य चलाया जा रहा है। भारतीय सेना ने बताया कि बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित कन्नूर, वायनाड, कोझिकोड, इडुक्की और मल्लपुरम के क्षेत्र हैं। 40 से अधिक राहतकर्मियों की 10 टीमें 24 घंटे राहत-बचाव कार्य में जुटी हैं।

गृह मंत्रालय ने ट्वीट के ज़रिये बताया मौजूदा हालात से निपटने के लिए एनडीआरएफ 14 टीमें लगी हैं।