हैदराबाद मुक्ति दिवस का जश्न मना रहा देश

Sardar Patel
78th liberation day of Hyderabad

सुजीत ठाकुर/ नई दिल्ली।

ऑपरेशन पोलो के बाद आज ही के दिन भारत में मिला था हैदराबाद

देश में आज (17 सितंबर) तीन जश्न मनाए जा रहे हैं। पहला विश्कर्मा पूजा का। दूसरा पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का। तीसरा हैदराबाद मुक्ति दिवस का।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन तेलंगाना में हैदराबाद मुक्ति दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। चार दिनों की सैन्य कार्यवाई के बाद 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद में निजामशाही का अंत हुआ था और भारत के साथ औपचारिक रूप से इसका विलय इसी दिन हुआ था। 1947 में देश की आजादी और विभाजन के बाद हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान ने भारत या पाकिस्तान में शामिल होने की जगह एक स्वतंत्र देश के रूप में रहने का फैसला किया था।

देश के लिए यह बड़ा खतरा था। भारत की भौगोलिक बीचोबीच एक स्वतंत्र रियासत का होना देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा था। रियासत की आम जनता भारत में शामिल होने का पक्षधर थी। लेकिन निजाम इसके लिए तैयार नहीं था। ऐसे में निजाम की निजी मिलिशिया जिसे रजाकार के नाम से जाना जाता था उसने आम लोगों और भारतीय समर्थकों में जुल्म करना शुरू कर दिया। सैकड़ों आम नागरिकों की हत्या कर दी गई और अत्याचार की पराकाष्ठा हो गई।

पटेल ने निजामशाही को क्यों कहा था भारत के पेट का अल्सर

इस स्थिति में देश के तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने हैदराबाद को भारत के पेट में अल्सर बताते हुए सैन्य कार्यवाई का फैसला लिया। 13 सितंबर 1948 को मेजर जनरल जेएन चौधरी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने कई दिशाओं से हैदराबाद में प्रवेश किया। भारतीय सेना के सामने रजाकर सिर्फ 5 दिन ही टिक पाए 17 सितंबर 1948 को निजाम ने आत्म समर्पण कर दिया। इसी दिन से हैदराबाद आधिकारिक रूप से भारतीय संघ का हिस्सा बन गया।

ऑपरेशन पोलो नाम देने के पीछे क्या थी वजह

भारतीय सेना के इस ऑपरेशन का नाम पोलो रखा गया था। आखिर इसका नाम ऑपरेशन पोलो अनायास नहीं रखा गया था। चूकिं उस वक्त हैदराबाद में सबसे ज्यादा पोलो ग्राउंड हुआ करते थे। दुनियां में कहीं भी पोलो के मैदान हैदराबाद से अधिक नहीं थे। इसलिए इसका नाम ऑपरेशन पोलो रखा गया था।