वाराणसी में खुला आबे मेमोरियल कॉरिडोर: योगी ने कहा भारत–जापान की दोस्ती सिर्फ राजनयिक नहीं, आत्मीयता और भरोसे की दोस्ती है; आकी आबे हुईं भावुक

वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में योगी आदित्यनाथ और आकी आबे द्वारा आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन।
इस कॉरिडोर में शिंजो आबे की दिसंबर 2015 की वाराणसी यात्रा की तस्वीरें दिखाई गई हैं, जिनमें दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती की तस्वीर भी शामिल है। यह उस कार्यक्रम की एक प्रतिनिधि तस्वीर है।

वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की याद में बना फोटो गैलरी/कॉरिडोर बुधवार को जनता के लिए खोला गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मोदी और आबे का रिश्ता पद से ऊपर, निजी भरोसे और साझा सोच पर टिका था। आकी आबे ने कहा, “अगर वो आज होते तो इस जगह को देखकर बेहद खुश होते।”

योगी: “मोदी–आबे की दोस्ती पद से नहीं, भरोसे से बनी”

वाराणसी, 7 अक्टूबर। बुधवार को काशी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच का रिश्ता सिर्फ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं, बल्कि निजी भरोसे और सामान्य दृष्टि पर आधारित था।

योगी ने कहा कि समय के साथ पद बदलते रहे, लेकिन दोनों नेताओं के बीच की मित्रता वैसी ही बनी रही। उन्होंने भारत–जापान संबंधों को “दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच आत्मीयता और साझा विकास की साझेदारी” करार दिया और कहा कि अब यह रिश्ता काशी से क्योटो तक, आस्था से अर्थव्यवस्था तक की नई राह बना रहा है।

आकी आबे का भावुक संदेश: “उनकी गैरमौजूदगी खलती है”

जापान की पूर्व प्रथम महिला आकी आबे ने फोटो गैलरी का उद्घाटन करने के बाद कहा कि यह परियोजना शिंजो आबे की सोच और पहल का नतीजा है। उन्होंने कहा कि अगर शिंजो आबे आज ज़िंदा होते तो वाराणसी में इस स्मारक को देखकर बेहद संतुष्ट और खुश होते।

भारत–जापान संबंधों और मोदी–आबे की दोस्ती की बात करते हुए आकी आबे भावुक नज़र आईं। उन्होंने कहा कि उनका अब इस दुनिया में न होना उनके लिए काफी तकलीफदेह है, लेकिन यह केंद्र उनकी यादों को ज़िंदा रखेगा। आकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की वास्तुकला की भी तारीफ की और बताया कि इसकी दीवारों पर लगे 108 रुद्राक्ष का जापान में भी धार्मिक महत्व है।

यूपी–जापान: 90 हजार करोड़ के निवेश समझौते, नई तकनीक पर फोकस

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश अब तक जापानी कंपनियों के साथ लगभग 90,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौते कर चुका है। यह साझेदारी अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे उन्नत क्षेत्रों में फैल गई है।

योगी ने कहा कि जापान के पास उच्च तकनीक और सटीक इंजीनियरिंग है, जबकि भारत और विशेषकर उत्तर प्रदेश के पास बड़ी आबादी, युवा श्रमशक्ति और स्केल का फायदा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2027 में भारत–जापान के राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होंगे और यह मेमोरियल कॉरिडोर उस अमृत महोत्सव की पहली उपलब्धि में से एक है।

काशी और क्योटो: दो प्राचीन शहरों की सांस्कृतिक कड़ी

काशी और क्योटो को दोनों देशों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान माना जाता है। 2014 में काशी–क्योटो पार्टनर सिटी समझौते के बाद से दोनों शहरों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कला और पर्यटन सहयोग को बढ़ावा मिला है।

योगी ने कहा कि जापान की आस्था की यात्रा सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु और श्रावस्ती जैसे बौद्ध तीर्थों से होकर गुजरती है, जो उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। इस लिहाज़ से काशी–क्योटो की साझेदारी सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि आर्थिक और धार्मिक पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम का ब्यौरा: दोपहर 2 बजे हुआ उद्घाटन

यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में हुआ, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आकी आबे ने संयुक्त रूप से आबे मेमोरियल कॉरिडोर का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया।

इस फोटो गैलरी में दिसंबर 2015 में शिंजो आबे के वाराणसी दौरे की तस्वीरें रखी गई हैं, जिनमें गंगा आरती, घाटों की सैर और स्थानीय लोगों से मिलने की झलकियां शामिल हैं।