ओएसडी पर सीबीआई छापा, गांव में ढोल—मान सरकार पर बढ़ी सियासी आंच

असली सवाल सिर्फ यह नहीं कि सीबीआई जांच में क्या निकलता है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई पंजाब की चुनावी राजनीति में नया मोर्चा खोलेगी। मान सरकार इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला बता रही है, जबकि विपक्ष इसे कथित भ्रष्टाचार की जांच और जवाबदेही का मुद्दा बना रहा है।

पंजाब में चुनावी सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान के करीबी माने जाने वाले उनके ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन के घर पर सीबीआई की दस्तक ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। एक तरफ केंद्रीय एजेंसी भ्रष्टाचार और प्रभाव के कथित इस्तेमाल की जांच में जुटी है, तो दूसरी तरफ मान इसे भाजपा की चुनावी रणनीति और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग से जोड़ रहे हैं। इस बीच घुम्मन के गांव घराचों में सीबीआई टीम के पहुंचते ही फूल बरसे, मिठाइयां बंटी और ढोल बजने लगे।

मामला महज एक छापे तक सीमित नहीं है। सीबीआई ने घुम्मन और पांच अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और प्रभाव के कथित इस्तेमाल के आरोपों में 251 पन्नों की FIR दर्ज की है। एजेंसी ने मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय समेत आठ ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई।

FIR की जड़ एक जनहित याचिका में है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि सरकारी अधिकारियों के तबादलों के लिए कथित तौर पर मोटी रकम ली जाती थी और निजी पक्षों के हित में नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने के लिए नकद लेन-देन होता था। याचिका में ईडी की ओर से पंजाब सरकार को भेजे गए पत्रों का भी हवाला दिया गया था।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की प्रारंभिक जांच पूरी करने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगने की दलील नहीं मानी। उसने सीबीआई को तत्काल FIR दर्ज कर जांच शुरू करने और पंजाब पुलिस तथा सरकार को संबंधित दस्तावेज एजेंसी को सौंपने का आदेश दिया।

छापे पर गांव में जश्न ने बढ़ाई बेचैनी

संगरूर के घराचों में सीबीआई की कार्रवाई का जिस तरह स्वागत हुआ, उसने मामले को और राजनीतिक रंग दे दिया। विपक्षी दलों से जुड़े लोगों ने सीबीआई वाहनों पर फूल बरसाए और मिठाइयां बांटीं। वारिस पंजाब दे से जुड़े एक नेता ने आरोप लगाया कि गांव के लोग कथित भ्रष्टाचार की पूरी श्रृंखला से परिचित हैं और मामले की गहन जांच चाहते हैं।

पुलिस ने हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर कार्रवाई की। सीबीआई वाहनों पर फूल बरसाने वाले दो लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि ड्यूटी में कथित लापरवाही के आरोप में SHO यशपाल शर्मा को निलंबित कर दिया गया।

मान का पलटवार—‘हम डरने वाले नहीं’

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने छापे के अगले ही दिन सीबीआई कार्रवाई को भाजपा की राजनीतिक रणनीति करार दिया। उनका कहना था कि सात-आठ घंटे चली कार्रवाई के बावजूद एजेंसी को कुछ आपत्तिजनक नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव करीब आते ही भाजपा विपक्षी नेताओं और उनके करीबियों पर केंद्रीय एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करती है।

मान ने कहा कि उनकी सरकार जांच से भागने वाली नहीं है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों के जरिए “आर्म-ट्विस्टिंग” पंजाब में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली और हरियाणा में चुनावों से पहले हुई कार्रवाई के उदाहरण देते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा विवाद

सीबीआई जांच को लेकर पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे राज्य के प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर असर पड़ सकता है। उसने यह भी दलील दी कि सीबीआई को राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की खुली छूट देना संघीय ढांचे से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है।
इस बीच CBI ने घुम्मन को पूछताछ के लिए तलब किया है। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि उन्हें समन मिला ही नहीं, इसलिए वह एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। सीबीआई FIR में 2023 से 2026 के बीच कथित गड़बड़ियों के 61 मामलों का उल्लेख है। इसमें घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर दविंदर और आरएस नागरा के नाम हैं। एजेंसी ने ईडी की ओर से पंजाब पुलिस को भेजे गए पत्र और हाईकोर्ट के फैसले में दर्ज सामग्री को भी जांच का आधार बनाया है।

अब असली सवाल सिर्फ यह नहीं कि सीबीआई जांच में क्या निकलता है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई पंजाब की चुनावी राजनीति में नया मोर्चा खोलेगी। मान सरकार इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला बता रही है, जबकि विपक्ष इसे कथित भ्रष्टाचार की जांच और जवाबदेही का मुद्दा बना रहा है। जांच आगे बढ़ेगी तो आरोपों और राजनीतिक दावों के बीच की हकीकत भी सामने आएगी।