नेपाल में तबाही के बाद अब ‘दूसरे सैलाब’ का डर, दो नई झीलों ने बढ़ाई चिंता

नेपाल में बाढ़ के बाद बनी दो नई झीलें, दूसरे सैलाब का खतरा
नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन और हिमनद टूटने के बाद बनी दो नई झीलों ने दूसरे सैलाब की आशंका बढ़ा दी है।

एक झील से पानी निकल रहा, दूसरी लगातार फैल रही; 616 शव बरामद, करीब 2,500 लोग अब भी लापता, 320 भारतीयों का भी पता नहीं

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली

26 अगस्त की बाढ़ थमी, लेकिन खतरा बरकरार

नेपाल में 26 अगस्त को आया सैलाब थम गया है, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं हुआ। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन और हिमनद के टूटने से बनी दो नई झीलों ने राहत और बचाव अभियान के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। एक झील से पानी निकल रहा है, जबकि दूसरी का आकार बढ़ रहा है और उसका स्पष्ट निकास दिखाई नहीं दे रहा है। विशेषज्ञों को आशंका है कि दूसरी झील का प्राकृतिक बांध टूटा तो पहले से तबाह इलाकों में फिर अचानक बाढ़ आ सकती है।

दो नई झीलों में पानी की स्थिति पर नजर

नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक दोनों झीलें उसी क्षेत्र में बनी हैं, जहां 26 अगस्त को बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबे के सैलाब ने नदी तंत्र को प्रभावित किया था। उपग्रह तस्वीरों में पहली झील से पानी निकलता हुआ दिखा है, लेकिन ऊपर स्थित दूसरी झील में पानी बढ़ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों झीलों के पूरी तरह खाली होने तक खतरा बना रहेगा। निगरानी के लिए उपग्रह तस्वीरों के साथ टिमुरे जैसे निचले इलाकों में कैमरे और सेंसर लगाने की तैयारी है।

वैज्ञानिक की चेतावनी: दोनों झीलों का पानी और मलबा आ सकता है साथ

प्लेनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक जेफ्री कार्गेल ने चेतावनी दी है कि दूसरी झील का बांध टूटा तो उसका पानी नीचे मौजूद पहली झील में पहुंच सकता है। इससे दोनों झीलों का पानी और मलबा एक साथ नीचे आने पर नया बड़ा सैलाब पैदा हो सकता है। उन्होंने बचाव दलों को ऊंची जमीन पर रहने और किसी भी समय सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी है।

सड़कें और पुल पहले ही क्षतिग्रस्त

खतरा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पहली बाढ़ में सड़कें, पुल और संपर्क व्यवस्था पहले ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे में दूसरी बाढ़ आई तो बचाव और लोगों को सुरक्षित निकालना और मुश्किल होगा।

616 शव बरामद, हजारों लोगों का अब भी पता नहीं

तबाही का मानवीय चेहरा भी गंभीर है। नेपाल पुलिस के शनिवार सुबह के आंकड़ों के मुताबिक 616 शव बरामद किए जा चुके थे और 2,301 लोगों को सुरक्षित निकाला गया था। वहीं, शुक्रवार के आंकड़ों में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 579 मौतें और 2,482 लोग लापता बताए गए थे। इनमें 320 भारतीय शामिल हैं। करीब 400 भारतीयों के चीन की ओर सुरक्षित होने की जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय ने दी है।

पांच जिलों के 15 स्थानीय निकाय आपदा संकट क्षेत्र घोषित

नेपाल सरकार ने प्रभावित पांच जिलों के 15 स्थानीय निकायों को तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित किया है। राहत के बाद सड़क-पुल की बहाली और पुनर्वास बड़ी चुनौती होगी। नेपाल के वित्त मंत्री के मुताबिक पुनर्निर्माण की शुरुआती जरूरत 4 से 5 अरब डॉलर तक हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल: क्या नेपाल फिर झेलेगा सैलाब?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है-
पहली बाढ़ गुजर गई, लेकिन क्या दूसरी झील के टूटने से नेपाल एक और सैलाब का सामना करने जा रहा है?
जब तक दूसरी झील सुरक्षित तरीके से खाली नहीं होती, इस आपदा का खतरा खत्म नहीं माना जा सकता।