मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने खुले और बिना पैकिंग वाले खाद्य तेल की बिक्री के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई को एक साल के लिए टाल दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छोटे कारोबारियों और पारंपरिक तेल विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्था बदलने के लिए समय दिया है।
यह फैसला FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में शुरू की गई कार्रवाई के बाद आया है। FDA ने खुले या बिना सत्यापित पैकेजिंग वाले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक लगाने और तेल को सीलबंद, छेड़छाड़-रोधी तथा सही लेबल वाली पैकेजिंग में बेचने का निर्देश दिया था।
2011 से लागू है प्रतिबंध
FDA का कहना है कि खुले खाद्य तेल की बिक्री पर रोक कोई नया नियम नहीं है। विभाग के अनुसार, यह प्रावधान खाद्य सुरक्षा एवं मानक कानून, 2011 के तहत देशभर में लागू है। महाराष्ट्र में पहले कारोबारियों को कुछ समयबद्ध छूट या मोहलत दी गई थी, लेकिन ऐसी छूट 2020 तक ही थी।
मुंढे ने कहा था कि खुले तेल में निर्माता, उत्पादन तिथि और स्रोत से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होती। इससे मिलावट या खाद्य विषाक्तता की शिकायत होने पर तेल की आपूर्ति और जिम्मेदार कारोबारी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
कारोबारियों को एक साल का समय
मुख्यमंत्री फडणवीस के फैसले के बाद छोटे व्यापारियों और विक्रेताओं को तत्काल कार्रवाई से एक साल की राहत मिली है। इस दौरान वे पैकेजिंग, लेबलिंग और अन्य खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपनी व्यवस्था तैयार कर सकेंगे।
सरकार ने FDA और खाद्य तेल कारोबारियों की संयुक्त समिति से बिक्री के लिए विस्तृत दिशानिर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार करने को कहा है। इसका उद्देश्य मिलावट पर रोक लगाना और पारंपरिक कारोबारियों के लिए व्यावहारिक व्यवस्था तय करना है।
एक साल बाद नहीं मिलेगी अतिरिक्त छूट
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल एक साल के लिए है और इसके बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। संक्रमण अवधि खत्म होने के बाद कारोबारियों को कानून के तहत तय पैकेजिंग और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
FDA की मूल कार्रवाई केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं थी। इसमें तेल निकालने वालों, रिफाइनर, निर्माताओं, ब्लेंडरों, री-पैकर्स, आयातकों, थोक विक्रेताओं, परिवहनकर्ताओं, खुदरा विक्रेताओं और ई-कॉमर्स विक्रेताओं को भी शामिल किया गया था।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
20-21 अगस्त को FDA ने खुले खाद्य तेल की बिक्री और खाना पकाने के तेल के बार-बार इस्तेमाल के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई शुरू की थी। विभाग ने खाद्य मिलावट और उपभोक्ताओं की सुरक्षा का हवाला देते हुए सख्त अनुपालन आदेश जारी किया।
बाद में व्यापारियों और तेल कारोबारियों के विरोध के बाद इस मुद्दे पर सरकार के स्तर पर समीक्षा शुरू हुई। अब सरकार ने तत्काल प्रतिबंध लागू करने के बजाय कारोबारियों को एक साल का समय देने का फैसला किया है।
निष्कर्ष: महाराष्ट्र में खुले खाद्य तेल पर लागू नियम खत्म नहीं किए गए हैं। फिलहाल सरकार ने इन नियमों के तहत कार्रवाई और प्रतिबंध के प्रवर्तन को एक साल के लिए टाला है, ताकि कारोबारी नई व्यवस्था अपना सकें।

