दिल्ली से मथुरा तक कान्हा की धूम… आधी रात को गूंजेगा ‘नंद के घर आनंद भयो’

जन्माष्टमी 2026 पर दिल्ली से मथुरा तक कान्हा की धूम, आधी रात को गूंजेगी घंटियां
जन्माष्टमी के मौके पर दिल्ली से मथुरा-वृंदावन तक कृष्ण भक्ति का माहौल है।

एक रात… हजारों दीप… मंदिरों में सजे झूले… कान्हा के बाल रूप की झांकियां और आधी रात का इंतजार।

स्नेहलता

जन्माष्टमी आते ही दिल्ली से लेकर मथुरा-वृंदावन तक माहौल कृष्णमय हो जाता है। लेकिन इस बार दिल्ली में जन्माष्टमी सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं रहने वाली बाजार से लेकर कॉलोनियों और बड़े धार्मिक स्थलों तक कान्हा के स्वागत की तैयारियां दिखाई दे रही हैं।

4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। दिल्ली में आधी रात के आसपास कृष्ण जन्म का उत्सव अपने चरम पर होगा। पंचांग के अनुसार दिल्ली में निशीथ पूजा का समय करीब रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक है।

दिल्ली का सबसे बड़ा कृष्ण उत्सव कहां है?

दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित ISKCON मंदिर में इस बार खास तैयारियां हैं। यहां 108 कलश से महाभिषेक, 108 महाआरती, कीर्तन, फूलों की वर्षा, झांकियां और हजारों श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की जा रही है। मंदिर की सजावट में पीकॉक थीम भी खास आकर्षण बनने वाली है।

यानी दक्षिण दिल्ली में कृष्ण भक्ति का अलग रंग दिखेगा, तो पुरानी दिल्ली और बाकी इलाकों में स्थानीय मंदिरों की झांकियां, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण लोगों को आकर्षित करेंगे।

बाजारों में भी ‘कान्हा इकोनॉमी’

जन्माष्टमी का असर दिल्ली के बाजारों में भी साफ दिखाई देता है। कहीं लड्डू गोपाल के लिए नए कपड़े बिक रहे हैं, कहीं मुकुट-मोरपंख और बांसुरी की मांग बढ़ रही है। छोटे झूले, सजावटी सामान, फूल, लाइट और जन्माष्टमी की झांकियों का सामान भी बाजारों में पहुंच चुका है।

इस बार घरों में भी कम बजट में कृष्ण कॉर्नर, फूलों की सजावट, मटकी, मोरपंख और झूले सजाने का ट्रेंड दिखाई दे रहा है।

दिल्ली की रात, कान्हा के नाम

जन्माष्टमी की असली कहानी रात 12 बजे शुरू होती है। व्रत रखने वाले भक्त घड़ी की सुइयों पर नजर रखते हैं। जैसे ही कृष्ण जन्म का समय आता है, मंदिरों में शंख और घंटियां गूंजती हैं, बाल गोपाल का अभिषेक होता है और उन्हें झूले में विराजमान कराया जाता है।

अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाता है। ISKCON दिल्ली में भी 5 सितंबर को नंदोत्सव का कार्यक्रम निर्धारित है।

यानी इस जन्माष्टमी दिल्ली सिर्फ कृष्ण का जन्म नहीं मनाएगी—दिल्ली अपनी रफ्तार के बीच कुछ पल कान्हा के नाम भी करेगी।

मथुरा में जन्मभूमि का उल्लास होगा, वृंदावन में भक्ति का सैलाब और दिल्ली में मंदिरों से लेकर बाजारों तक कान्हा की गूंज। सवाल बस इतना है जब आधी रात को घंटियां बजेंगी, तो क्या दिल्ली की भागती जिंदगी कुछ पल के लिए ठहरकर कान्हा का स्वागत करेगी?