
सीबीआई का अब तक 37 के खिलाफ आरोप-पत्र और 26 गिरफ्तार; सरकारी खातों से बैंक शाखाओं तक रकम, फिर कई खातों में घुमाकर कैश में बदली
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के लिए रखे गए ₹504 करोड़ के सरकारी फंड की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने एक और बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने 2 सितंबर को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के सामने 19 आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। इसमें हरियाणा कैडर के छह आईएएस अधिकारियों, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारियों, एयू स्माल फाइनेंस बैंक के एक अधिकारी और हरियाणा सरकार के अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई के मुताबिक आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सबूत नष्ट करने, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल, खातों में हेराफेरी, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराधों के आरोप हैं। ये आरोप जांच में सामने आए तथ्यों पर आधारित हैं और अदालत में साबित होना बाकी है।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल है- ₹504 करोड़ की सरकारी रकम निकाली कैसे गई और उसे ठिकाने कैसे लगाया गया?
सरकारी पैसा निकालने में बैंक अफसरों ने मदद की
सीबीआई की जांच के मुताबिक कथित फर्जीवाड़ा किसी एक लेनदेन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे एक तय क्रम में अंजाम दिया गया। हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संस्थाओं के सरकारी फंड को पहले उन बैंकों से ट्रांसफर कराया गया, जहां संबंधित सरकारी खाते थे। इसके बाद यह रकम आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की कुछ खास शाखाओं में पहुंचाई गई। साजिश में शामिल बैंक अधिकारियों ने इन शाखाओं में खाते खुलवाने और रकम के ट्रांसफर की प्रक्रिया में सहयोग किया। बैंकिंग प्रक्रिया में वित्त विभाग की वित्तीय सावधानी और धोखाधड़ी रोकने संबंधी गाइडलाइंस का उल्लंघन हुआ। कुछ बैंक अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इस रकम को कथित तरीके से ट्रांसफर और आगे ले जाना संभव नहीं था।
असली खेल: सरकारी विभाग से बाहर के लोगों के खातों में पैसा
सीबीआई के मुताबिक सरकारी खातों से निकाली गई रकम उन तीसरे पक्षों तक पहुंचाई गई, जिनका संबंधित सरकारी विभागों से कोई संबंध नहीं था।
इसके बाद रकम को कई बैंक खातों में घुमाया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य रकम की वास्तविक दिशा को छिपाना था। अंततः इन पैसों को नकदी में बदला गया और आरोपियों ने कथित तौर पर इसका निजी लाभ उठाया। जांच में सामने आया पैटर्न यह है कि सरकारी रकम को सीधे निजी खाते में डालने के बजाय कई खातों की परतों के पीछे ले जाया गया। यही ‘लेयरिंग’ जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई खातों के जरिए रकम घुमाने से उसके मूल स्रोत और अंतिम लाभार्थी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
किन सरकारी विभागों का पैसा प्रभावित हुआ?
सीबीआई के अनुसार इस कथित घोटाले से हरियाणा सरकार के आठ विभाग और संस्थाएं प्रभावित हुईं। इनमें पंचायती राज विभाग पंचकूला, कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSsPP), हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) और हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) शामिल हैं। इन संस्थाओं से संबंधित कुल ₹504 करोड़ की रकम कथित फर्जीवाड़े की चपेट में आई।
सीबीआई की यह पहली नहीं, बल्कि तीसरी चार्जशीट है
2 सितंबर को दाखिल चार्जशीट इस मामले में सीबीआई की तीसरी चार्जशीट है। इससे पहले एजेंसी 18 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्माल फाइनेंस बैंक के अधिकारी, हरियाणा सरकार के कर्मचारी, निजी व्यक्ति और निजी कंपनियां शामिल हैं। नई चार्जशीट के बाद इस मामले में अब तक कुल 37 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। सीबीआई ने इस मामले में अब तक 54 जगहों पर तलाशी ली है और करीब ₹20 करोड़ मूल्य का सोना समेत आपत्तिजनक सामग्री जब्त करने का दावा किया है। अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
जांच राज्य की एजेंसी से सीबीआई तक कैसे पहुंची?
यह मामला मूल रूप से हरियाणा की स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में था। बाद में राज्य सरकार के अनुरोध पर CBI ने जांच अपने हाथ में ले ली। अब केंद्रीय एजेंसी न केवल सरकारी फंड की कथित हेराफेरी, बल्कि इस रकम को ट्रांसफर करने, अलग-अलग खातों में घुमाने और नकदी में बदलने की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है।
चंडीगढ़ के दो जुड़े मामलों की जांच भी सीबीआई के पास
इस मामले से जुड़े दो अन्य केस भी सीबीआई ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से अपने हाथ में लिए हैं। इनमें एक मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन चंडीगढ़ से संबंधित है, जबकि दूसरा चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी और साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रोमोशन सोसाइटी से जुड़ा है। इन दोनों मामलों में भी चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
₹504 करोड़ की पूरी रकम का ट्रेल अब भी जांच के दायरे में
सीबीआई ने साफ किया है कि तीनों मामलों में जांच अभी जारी है और अन्य संदिग्धों तथा आरोपियों के खिलाफ भी आगे की जांच की जा रही है। इसका मतलब है कि ₹504 करोड़ की रकम में से कितनी राशि किस रास्ते से गई, किस-किस खाते में पहुंची और अंततः किसे कितना लाभ मिला, इसकी पूरी तस्वीर अभी जांच के अंतिम चरण में सामने आनी बाकी है। सीबीआई का कहना है कि उसका उद्देश्य न केवल जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे में लाना है, बल्कि हेराफेरी किए गए सरकारी धन और उससे जुड़े अपराध की पूरी वित्तीय श्रृंखला का पता लगाना भी है।


