‘सबके सामने किए गए संदिग्ध सौदे’: IRCTC केस में लालू-तेजस्वी-राबड़ी पर PMLA आरोप तय, 3 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय करने का दिल्ली कोर्ट का आदेश
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC होटल टेंडर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।

नई दिल्ली।

लालू परिवार के लिए कानूनी उलझनें फिर गहरी हो गई हैं। आरजेडी (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी  तीनों के खिलाफ IRCTC होटल टेंडर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गुरुवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय कर दिए। विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने की अदालत ने कुल 16 आरोपियों में से 9 के खिलाफ पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) की धारा 3 और 4 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया, जबकि 7 आरोपियों को इसी मामले से आरोपमुक्त कर दिया । अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी 

कोर्ट का तीखा रिमार्क: ‘शक दूर करने की जगह पुख्ता शक’

अदालत के फैसले की सबसे चर्चित लाइन  “कुछ संदिग्ध सौदे बड़े खुलेआम किए गए” (‘Some dubious deals are cut in plain sight’)। कोर्ट ने कहा कि मामले में इस बात का पुख्ता शक (strong suspicion) बनता है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर अपराध से प्राप्त रकम (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) जनरेट की गई । अदालत ने यह भी कहा कि पटना में जमीन इस मामले की ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ है, और इसी के आधार पर लालू, राबड़ी, तेजस्वी, लारा प्रोजेक्ट्स, पीसी गुप्ता, सरला गुप्ता और कोचर भाइयों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप तय होना तय है ।

यह भी समझना जरूरी है कि ‘आरोप तय होना’ का मतलब है  अदालत को प्राथमिक स्तर पर लगा कि आरोपी के खिलाफ मामला चलाने लायक ठोस आधार हैं। यह किसी को दोषी साबित करना नहीं, बल्कि ट्रायल की शुरुआत की औपचारिक मंजूरी है। लेकिन यह फैसला लालू परिवार के लिए इसलिए बड़ा झटका है क्योंकि अब पीएमएलए के तहत पूरी लंबी सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

कौन घेरे में, कौन बाहर  पूरी लिस्ट

9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय:
लालू प्रसाद यादव
राबड़ी देवी
तेजस्वी यादव
पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रेम चंद गुप्ता
सरला गुप्ता
लारा प्रोजेक्ट्स (कंपनी)
सुजाता होटल्स (कंपनी)
विजय कोचर
विनय कोचर

7 आरोपी आरोपमुक्त:
राहुल यादव (लालू के दामाद)
गौरव गुप्ता
नाथ मल ककरानिया
विजय त्रिपाठी
देवकी नंदन तुलस्यान
राजीव कुमार रेलन
अभीषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड

एनआई (ED) ने अपने चार्जशीट में कुल 16 लोगों-कंपनियों को आरोपी बनाया था  कोर्ट ने इनमें से सात को इस आधार पर छोड़ा कि उनके खिलाफ आरोप तय करने के पर्याप्त आधार नहीं मिले ।

क्या है पूरा मामला? 2004 से 2009 के बीच का ‘सौदा’

केस की जड़ें उस दौर में जाती हैं जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री थे  यानी 2004 से 2009 के बीच। आरोप है कि इस दौरान रेलवे से जुड़ी IRCTC के दो होटलों (बीएनआर होटल्स) की लीजिंग/टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई। आरोपियों पर आरोप है कि रेलवे मंत्री रहते हुए लालू ने इन होटलों को सस्ते दर पर सुजाता होटल्स कंपनी (कोचर भाइयों) को लीज पर देने में अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया। बदले में पटना में प्रधानमंत्री आवास के पास बने भव्य बंगले की जमीन को दरअसल लालू के परिवार के नाम दे दिया गया  सौदा लारा प्रोजेक्ट्स और देल्ही-आधारित बिल्डरों के जरिए पूरा किया गया । ED का केस CBI की एफआईआर से जुड़ता है, जिसमें भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप हैं।

पिछले साल भी लगे थे आरोप  अब पीएमएलए का दूसरा दौर

यह मामला लालू परिवार के लिए नया नहीं, बल्कि पुराने दौर का है। 13 अक्टूबर 2025 को इसी कोर्ट ने CBI के केस में लालू प्रसाद यादव को भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोपों के तहत आरोप तय किए थे  तेजस्वी और राबड़ी समेत कई लोगों पर तत्कालीन आरोप तय हुए थे। अब गुरुवार को उसी मामले से जुड़े ED के मनी लॉन्ड्रिंग केस में दूसरा दांव चला है । लालू प्रसाद यादव पहले से ही चारा घोटाला के कई मामलों में दोषसिद्ध हो चुके हैं, इसलिए IRCTC केस की हर कार्रवाई पर बिहार की राजनीति में सियासी असर की बात होती रहती है।

अब आगे क्या?

कोर्ट ने अगली सुनवाई 3 अक्टूबर के लिए तय की है, जब औपचारिक रूप से आरोप पढ़े जाने की प्रक्रिया पूरी होगी और ट्रायल की शुरुआत होगी । यानी अब यह लंबी लीगल लड़ाई की ओर बढ़ रहा है  लालू परिवार की ओर से अब हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने का रास्ता खुला रहता है। राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि तेजस्वी यादव बिहार में RJD की कमान संभाले हुए हैं और पार्टी की साख पर सीधा असर पड़ने वाली हर अदालती कार्रवाई उनके लिए सियासी चुनौती बन जाती है।