
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, गंभीर हालत में पहुंचा था मरीज; इमरजेंसी में कोड ब्लू घोषित कर बचाने की कोशिश
रिपोर्ट: स्नेहलता
दिल्ली के दिलशाद गार्डन स्थित Institute of Human Behaviour and Allied Sciences (IHBAS) में एक गंभीर घटना सामने आई है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज करा रहे एक मरीज ने कथित तौर पर अस्पताल परिसर में फांसी लगाने की कोशिश की। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल इमरजेंसी रिस्पॉन्स शुरू किया, लेकिन इस घटना ने संस्थान में भर्ती मरीजों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, मरीज का इलाज IHBAS के ड्यूल डायग्नोसिस वार्ड (DDW) में चल रहा था। यह वार्ड मानसिक स्वास्थ्य समस्या के साथ नशे की निर्भरता जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के इलाज से जुड़ा है। बताया गया कि मरीज को घटना के बाद तत्काल इमरजेंसी विभाग में लाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई गई।
सांस लेने में थी परेशानी, गैसपिंग की स्थिति
इमरजेंसी में चिकित्सकीय जांच के दौरान मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी और गैसपिंग की स्थिति में पाया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में कोड ब्लू घोषित किया गया।
इसके बाद मरीज को बचाने के लिए तत्काल आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की गई। न्यूरो टीम को भी बुलाया गया और मरीज का इंटरवेंशन किया गया। डॉक्टरों की टीम ने मरीज की स्थिति को देखते हुए आगे वेंटिलेटरी सपोर्ट की आवश्यकता महसूस की।
मरीज की हालत स्थिर होने के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन की ओर से घटना के संबंध में मरीज की पहचान और अन्य निजी चिकित्सकीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए।
घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के भीतर भर्ती एक गंभीर मरीज तक ऐसी स्थिति कैसे पहुंची, जहां उसने अपनी जान लेने की कोशिश की।
ऐसे मरीजों की लगातार निगरानी और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना अस्पताल की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। घटना के बाद यह भी सवाल उठ रहा है कि वार्ड में मरीजों की निगरानी के लिए पर्याप्त स्टाफ मौजूद था या नहीं और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किस स्तर तक किया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार, पहले ऐसे मरीजों की निगरानी के लिए कर्मचारियों की मौजूदगी रहती थी, लेकिन पिछले कुछ समय में निगरानी व्यवस्था को लेकर बदलाव की बातें सामने आई हैं। यही पहलू इस घटना के बाद जांच का महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है।
MLC के बाद दूसरे अस्पताल भेजा गया मरीज
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीज की MLC (Medico-Legal Case) प्रक्रिया पूरी की गई और उसकी स्थिति को देखते हुए दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया।
अब सवाल केवल मरीज की जान बचाने तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि घटना की परिस्थितियां क्या थीं, मरीज ने यह कदम कैसे उठाया और उस समय उसकी निगरानी कौन कर रहा था?
IHBAS जैसे विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था में छोटी सी चूक भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसलिए घटना की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा जरूरी हो जाती है।



