तहलका ब्रेकिंग: न्यूज़पेट और लिवर की सात दवाओं पर CDSCO विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें: फेज-3 ट्रायल, वोनोप्राजान की बिक्री पर शर्तें

पेट और लिवर के इलाज से जुड़े दवा प्रस्तावों की नियामकीय समीक्षा का प्रतीकात्मक दृश्य
CDSCO की विशेषज्ञ समिति ने सात दवा प्रस्तावों पर ट्रायल, अध्ययन और नियामकीय शर्तों से जुड़ी सिफारिशें कीं। यह एआई तस्वीर है।

पेट और लिवर के इलाज में नई दवाओं के ट्रायल को मंजूरी की सिफारिश, सात नई दवाओं पर फैसले

आईबीएस, लिवर में फैट जमा होने और एसिडिटी की दवाओं पर अहम फैसला; वोनोप्राजान के इस्तेमाल पर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट का पर्चा अनिवार्य, दो नई दवाओं के फेज-3 ट्रायल को हरी झंडी

एम. रियाज़ हाशमी | नई दिल्ली

देश में पेट और लिवर की बीमारियों के इलाज से जुड़ी कई दवाओं पर अहम नियामकीय फैसले हुए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ—सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) की गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी—सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी) ने 15 सितंबर 2026 की बैठक में सात दवाओं से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया।

इनमें लिवर में फैट जमा होने से होने वाली गंभीर बीमारी, कब्ज के साथ इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस), एसिडिटी और पेट दर्द के इलाज से जुड़ी दवाएं शामिल हैं। समिति ने दो दवाओं के फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल की सिफारिश की, जबकि लिवर की दवा रेस्मेटिरोम के ट्रायल में बीमारी बढ़ने की स्थिति को मुख्य पैमाना बनाने और 52 सप्ताह तक अध्ययन करने की शर्त रखी।

हालांकि, समिति की सिफारिशों का मतलब सभी दवाओं को बाजार में बेचने की अंतिम मंजूरी मिलना नहीं है। अलग-अलग मामलों में क्लीनिकल
ट्रायल, बायोइक्विवेलेंस अध्ययन और नियामकीय समीक्षा की प्रक्रिया अभी बाकी है।

1. लिवर की दवा रेस्मेटिरोम का ट्रायल 52 सप्ताह चलेगा

प्योर एंड क्योर हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड की लिवर में फैट जमा होने से जुड़ी बीमारी के इलाज की दवा रेस्मेटिरोम (Resmetirom) 100 मिलीग्राम टैबलेट के क्लीनिकल ट्रायल में समिति ने महत्वपूर्ण बदलाव सुझाए हैं। कंपनी ने बायोइक्विवेलेंस अध्ययन की रिपोर्ट पेश की थी। इस अध्ययन का उद्देश्य यह देखना होता है कि दवा का प्रस्तावित संस्करण शरीर में किस तरह अवशोषित होता है और पहले से उपलब्ध संदर्भ दवा के समान व्यवहार करता है या नहीं। समिति ने रिपोर्ट पर विचार करने के बाद फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल के प्रोटोकॉल में संशोधन करने को कहा है।

ट्रायल का मुख्य पैमाना (प्राइमरी एफिकेसी एंडपॉइंट) लिवर में फाइब्रोसिस यानी लिवर के ऊतकों में घाव और कठोरता बढ़ने की स्थिति होना चाहिए। इसका आकलन लिवर बायोप्सी से किया जाएगा। इसमें लिवर के ऊतक का छोटा नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है। समिति ने इलाज और अध्ययन की अवधि 52 सप्ताह रखने की शर्त रखी है। कंपनी को संशोधित प्रोटोकॉल के लिए आवेदन देना होगा और ट्रायल के नतीजे आगे की समीक्षा के लिए सीडीएससीओ को सौंपने होंगे।

पहले क्या था, अब क्या बदलेगा?: पहले पेश किए गए अध्ययन प्रोटोकॉल में मुख्य प्रभावकारिता पैमाने और अध्ययन अवधि को लेकर समिति ने बदलाव की जरूरत बताई। अब दवा की प्रभावशीलता का आकलन लिवर में फाइब्रोसिस बढ़ने के आधार पर और 52 सप्ताह के अध्ययन से करना होगा। इससे लिवर की बीमारी पर दवा के वास्तविक चिकित्सकीय प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सकेगा। हालांकि, अभी इस दवा को बाजार में बेचने की नई मंजूरी नहीं मिली है।

2. लीनाक्लोटाइड का फेज-3 ट्रायल, कंपनी को प्रोटोकॉल बदलना होगा

बीडीआर फार्मास्यूटिकल्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के लीनाक्लोटाइड (Linaclotide) 290 माइक्रोग्राम कैप्सूल को लेकर समिति ने फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल करने की अनुमति देने की सिफारिश की है। यह दवा कब्ज के साथ इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस-सी) के मरीजों के लिए प्रस्तावित है। आईबीएस ऐसी स्थिति है जिसमें आंतों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इससे पेट में दर्द, पेट फूलना और मल त्याग में परेशानी हो सकती है। आईबीएस-सी में कब्ज प्रमुख लक्षण होता है। कंपनी को ट्रायल के प्रोटोकॉल में स्टैंडर्ड ऑफ केयर (एसओसी) यानी मरीजों को दी जाने वाली मानक चिकित्सा का स्पष्ट विवरण देना होगा। अस्पताल या ट्रायल सेंटर का गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के साथ राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी- नेशनल मेडिकल कमीशन) से अनुमोदित होना भी जरूरी होगा। कंपनी को संशोधित प्रोटोकॉल सीडीएससीओ को सौंपना होगा। ट्रायल के नतीजों की समिति आगे समीक्षा करेगी।

अभी क्या बदलेगा?: फिलहाल यह फैसला दवा के ट्रायल से संबंधित है। मरीजों के लिए नई दवा की बाजार उपलब्धता या बिक्री की अंतिम मंजूरी इस सिफारिश से नहीं मिलती।

3. वोनोप्राजान की बिक्री की सिफारिश, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ही लिखेंगे

मैक्लॉड्स फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड की वोनोप्राजान (Vonoprazan) 10 और 20 मिलीग्राम टैबलेट को लेकर समिति ने प्रस्तावित इस्तेमाल के लिए निर्माण और बाजार में बिक्री की अनुमति देने की सिफारिश की है। यह दवा देश में 8 मई 2024 को ही निर्माण और बिक्री के लिए अनुमोदित हो चुकी है। मैक्लॉड्स ने 20 मिलीग्राम टैबलेट की बायोइक्विवेलेंस अध्ययन रिपोर्ट पेश की थी, जिस पर समिति ने विचार किया। नई सिफारिश के तहत दो शर्तें रखी गई हैं। कंपनी को मंजूरी मिलने के तीन महीने के भीतर फेज-4 क्लीनिकल ट्रायल का प्रोटोकॉल सीडीएससीओ को देना होगा। फेज-4 अध्ययन में बाजार में आने के बाद दवा की सुरक्षा और प्रभावों का आगे आकलन किया जाता है। दूसरी शर्त यह है कि दवा खुदरा बाजार में केवल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट यानी पेट और पाचन तंत्र के विशेषज्ञ डॉक्टर के पर्चे पर बेची जाएगी। इसका मतलब है कि प्रस्तावित इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी और आगे के अध्ययन को जरूरी माना गया है।

4. वोनोप्राजान के अध्ययन की अनुमति, लेकिन बिक्री की नई मंजूरी नहीं

मस्कॉट हेल्थ सीरीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने वोनोप्राजान 10 और 20 मिलीग्राम टैबलेट के निर्माण और बिक्री के प्रस्ताव के साथ बायोइक्विवेलेंस अध्ययन का प्रोटोकॉल पेश किया था। समिति ने स्पष्ट किया कि वोनोप्राजान देश में पहले से अनुमोदित है। इसके बाद कंपनी को प्रस्तुत प्रोटोकॉल के अनुसार बायोइक्विवेलेंस अध्ययन करने की अनुमति देने की सिफारिश की गई। यह मैक्लॉड्स के मामले से अलग है। मस्कॉट को अध्ययन करने की सिफारिश मिली है, जबकि मैक्लॉड्स के प्रस्तावित इस्तेमाल के लिए निर्माण और बिक्री की अनुमति की सिफारिश अतिरिक्त शर्तों के साथ की गई है।

5. दो नई दवाओं के फेज-3 ट्रायल को मंजूरी की सिफारिश

समिति ने दो अन्य दवाओं के फेज-3 ट्रायल की अनुमति देने की सिफारिश की है। पहली दवा: एफिमोस्फर्मिन अल्फा (Efimosfermin Alfa) है, जो आईक्यूवीआईए आरडीएस (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड की है। समिति ने कंपनी के प्रस्तुत प्रोटोकॉल के अनुसार फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल करने की अनुमति देने की सिफारिश की है।

दूसरी दवा: अफिमकिबार्ट (Afimkibart) 225 मिलीग्राम/1.5 मिलीलीटर है, जो रोश प्रोडक्ट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड की है। समिति ने प्रस्तुत प्रोटोकॉल के अनुसार फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति देने की सिफारिश की है। दोनों मामलों में यह ट्रायल की सिफारिश है, बाजार में बिक्री की अंतिम मंजूरी नहीं।

6. एलुक्साडोलिन की रिपोर्ट की समीक्षा, अंतिम फैसले का उल्लेख नहीं

प्योर एंड क्योर हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड की एलुक्साडोलिन (Eluxadoline) 75 और 100 मिलीग्राम टैबलेट के मामले में कंपनी ने भोजन के बाद किए गए बायोइक्विवेलेंस अध्ययन की रिपोर्ट पेश की। समिति ने दर्ज किया कि दवा को देश में 1 जुलाई 2026 को निर्माण और बिक्री की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। बैठक के दस्तावेज में समिति द्वारा अध्ययन के नतीजों पर विचार करने की जानकारी है, लेकिन इसके बाद का अंतिम निर्णय दर्ज नहीं है। इसलिए इस मामले में किसी नई मंजूरी या अतिरिक्त शर्त का दावा नहीं किया जा सकता है।