
कुत्ते ने नहीं काटा, फिर भी रेबीज का खतरा! दिल्ली में 1 साल में 7,45,147 एनिमल बाइट के मामले, द्वारका के अस्पताल में रोजाना 170 से 200 मरीज!
नई दिल्ली | तहलका न्यूज | स्नेहलता
28 सितंबर को हर साल विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। रेबीज का नाम आते ही सबसे पहले कुत्ते के काटने का ख्याल आता है। लेकिन तहलका की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि मामला सिर्फ कुत्ते के काटने तक सीमित नहीं है।
दिल्ली में एक साल में 7,45,147 एनिमल बाइट के मामले दर्ज हुए हैं। वहीं द्वारका के इंदिरा गांधी अस्पताल में तहलका की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आया कि यहां रोजाना करीब 170 से 200 एनिमल बाइट के मामले पहुंच रहे हैं।
सवाल यह है कि जब इतने बड़े पैमाने पर एनिमल बाइट के मामले सामने आ रहे हैं, तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रेबीज के टीके की व्यवस्था कितनी मजबूत है?
दिल्ली में 2024-25 में कितने एनिमल बाइट मामले दर्ज हुए?
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 6,90,230 कुत्ते के काटने के मामले दर्ज हुए।
इसी अवधि में दूसरे जानवरों के काटने के 54,917 मामले दर्ज किए गए।
यानी दिल्ली में एक साल में कुल 7,45,147 एनिमल बाइट के मामले सामने आए।
रिपोर्ट के मुताबिक इसी अवधि में संदिग्ध या संभावित मानव रेबीज के 70 मामले सामने आए और रेबीज से 10 मौतें दर्ज की गईं।
इनमें मानव रेबीज के 5 मामले दिल्ली के मरीजों से और 65 मामले दिल्ली के बाहर के मरीजों से संबंधित बताए गए हैं।
द्वारका के आरोग्य मंदिरों से एनिमल बाइट मरीज कहां भेजे गए?
तहलका की टीम ने द्वारका के कई ऐसे केंद्रों का भी जायजा लिया, जिन्हें पहले मोहल्ला क्लीनिक के नाम से जाना जाता था और अब आरोग्य मंदिर के नाम से संचालित किया जा रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आया कि एनिमल बाइट के मामलों में मरीजों को आगे बड़े अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जाता है।
यहीं से सवाल उठता है कि जब एनिमल बाइट के मामले इतनी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं, तो प्राथमिक स्तर पर रेबीज के टीके की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता क्यों नहीं है?
आरोग्य मंदिर की जरूरी दवाओं की सूची में रेबीज का टीका है?
डीजीएचएस की वेबसाइट पर उपलब्ध आरोग्य मंदिर यानी पहले के आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक की जरूरी दवाओं की सूची में रेबीज के टीके को जरूरी दवा के रूप में शामिल नहीं पाया गया।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की जानकारी के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में एनिमल बाइट के बाद रेबीज से बचाव के लिए टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है।
यही विरोधाभास तहलका के लिए बड़ा सवाल है।
जब दिल्ली में 1 साल में 7,45,147 एनिमल बाइट के मामले दर्ज हो रहे हैं, तो प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरी दवाओं की सूची में रेबीज के टीके को अलग क्यों रखा गया है?
द्वारका के इंदिरा गांधी अस्पताल में रोज कितने एनिमल बाइट मरीज आते हैं?
तहलका की ग्राउंड रिपोर्ट में द्वारका के इंदिरा गांधी अस्पताल में एनिमल बाइट के मामलों की बड़ी संख्या सामने आई।
अस्पताल में मिली जानकारी के मुताबिक यहां रोजाना करीब 170 से 200 एनिमल बाइट के मामले पहुंचते हैं।
इनमें बंदर, पालतू कुत्ते, बिल्लियां, सड़क के कुत्ते और दूसरे जानवरों से जुड़े मामले शामिल बताए गए।
यह 170 से 200 का आंकड़ा तहलका की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान अस्पताल स्तर पर मिली जानकारी पर आधारित है। इसे दिल्ली सरकार का आधिकारिक दैनिक आंकड़ा नहीं कहा जा रहा है।
दिल्ली और द्वारका में कितने रेबीज के टीके लगते हैं? डॉक्टर का अनुमान
इंदिरा गांधी अस्पताल, द्वारका के रेबीज विशेषज्ञ डॉ. जे. तौथांग ने तहलका को बताया कि पूरे दिल्ली में करीब 7 से 8 लाख रेबीज के टीके लगाए जाते हैं।
उन्होंने अकेले द्वारका में करीब 70 से 80 हजार रेबीज के टीके लगाए जाने की बात कही।
यह आंकड़ा डॉक्टर द्वारा तहलका को दी गई जानकारी पर आधारित है। दिल्ली सरकार की उपलब्ध 2024-25 वार्षिक रिपोर्ट में कुल लगाए गए रेबीज टीकों की संख्या उपलब्ध नहीं है।
क्या कुत्ते के काटे बिना भी रेबीज का खतरा होता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक रेबीज संक्रमित जानवर की लार से फैलता है।
संक्रमित जानवर के काटने के अलावा उसकी खरोंच या उसकी लार का किसी खुले घाव, आंख या मुंह के संपर्क में आना भी संक्रमण का कारण बन सकता है।
इसलिए किसी संभावित संक्रमित जानवर की खरोंच को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।who
इंसान के नाखून या झूठे खाने से रेबीज? डॉक्टर की बात और WHO की जानकारी
तहलका से बातचीत के दौरान डॉक्टर ने इंसान के नाखून लगने और झूठा खाना खाने से रेबीज के खतरे की बात भी कही।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक रेबीज का मुख्य संक्रमण मार्ग संक्रमित जानवर की लार का काटने, खरोंच या टूटी हुई त्वचा और शरीर की श्लेष्म झिल्ली के संपर्क में आना है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक संभावित संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने के बाद घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए।
इसके बाद बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
डॉक्टर स्थिति के आधार पर रेबीज का टीका और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन देने का फैसला करते हैं।who
दिल्ली में एनिमल बाइट के मामले बढ़ने पर प्राथमिक स्तर पर रेबीज टीके की व्यवस्था क्या है?
दिल्ली में सिर्फ 1 साल में 7,45,147 एनिमल बाइट के मामले सामने आए।
द्वारका के इंदिरा गांधी अस्पताल में तहलका की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक रोजाना करीब 170 से 200 मामले पहुंच रहे हैं।
फिर सवाल सीधा है—
जब एनिमल बाइट के मामले इतने बड़े पैमाने पर हैं, तो आरोग्य मंदिर की जरूरी दवाओं की सूची में रेबीज का टीका क्यों नहीं?
क्या एनिमल बाइट वाले मरीजों को प्राथमिक स्तर पर ही रेबीज से बचाव की सुविधा मिलनी चाहिए या उन्हें बड़े अस्पतालों तक रेफर किया जाता रहेगा?
विश्व रेबीज दिवस पर तहलका की पड़ताल इसी सवाल को सामने रखती है।



