ड्रग्स का धंधा सिर्फ नशे तक सीमित नहीं, यह कमाई को ‘सफेद’ करने का बड़ा नेटवर्क; ईडी के 30 ठिकानों पर छापे

दिल्ली में GST टीम ने 65 लाख कीमत की 4.20 लाख विदेशी सिगरेट जब्त कीं
दिल्ली के GST विभाग की एंटी-इवेजन टीम ने एक वाहन से 4.20 लाख विदेशी सिगरेट बरामद की हैं।

केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना राज्यों में एक साथ कार्रवाई, ड्रग्स के 8 मामलों की जांच; कहीं हवाला से पैसा घूम रहा था तो कहीं ड्रग्स की कमाई से खरीदी गई संपत्तियां जांच के घेरे में

एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली

दक्षिण भारत में मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक साथ बड़ी कार्रवाई की है। नशा मुक्त भारत अभियान के तहत ईडी के दक्षिणी क्षेत्र के सभी जोन ने केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में 30 ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की है। ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत आठ अलग-अलग मादक पदार्थ मामलों में जांच से जुड़ी है। लेकिन इन छापों का फोकस सिर्फ ड्रग्स बरामद करना नहीं है, बल्कि यह पता लगाना है कि नशीले पदार्थों से कमाई गई रकम किस तरह हवाला, बैंक खातों, सोने के कर्ज और संपत्तियों के जरिए छिपाई और खपाई जा रही है।

ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने ‘तहलका’ को जानकारी दी कि दक्षिणी भारत में ड्रग्स की सप्लाई चेन के साथ एक समानांतर वित्तीय नेटवर्क भी चल रहा है। केरल के एक मामले में जांच एजेंसियों को एक ऐसा नेटवर्क मिला, जिसकी शुरुआत बैंकॉक से हाइब्रिड गांजा की खरीद से होती है और अंतिम मंजिल केरल का स्थानीय बाजार है। मामला तब सामने आया जब केरल पुलिस ने आयुष विनोद को 1.166 किलोग्राम हाइब्रिड गांजा के साथ पकड़ा। उसके घर से बाद में करीब 15 किलोग्राम और हाइब्रिड गांजा बरामद हुआ। पूछताछ के बाद जांच बड़े नेटवर्क तक पहुंची।

बैंकॉक से कोच्चि तक हाइब्रिड गांजा की सप्लाई चेन

ईडी के मुताबिक, जैसल एनके उर्फ मार्को बैंकॉक से हाइब्रिड गांजा मंगाने की व्यवस्था करता है। यही कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ‘ग्रीन चैनल’ से कैरियरों को बाहर निकालने की व्यवस्था भी करता था। इसके बाद चार कैरियर संजय पी., अनीश ए., प्रेसजित और श्रीजेश बैंकॉक से कोच्चि पहुंचे और खेप लेकर आए। कोच्चि पहुंचने के बाद खेप हरिकृष्णन वीबी को दी जाती थी, जो इसे आगे फैस केटी तक पहुंचाता था। इसके बाद स्थानीय बाजार में वितरण किया जाता था। यानी नेटवर्क में हर व्यक्ति की भूमिका अलग थी।

ड्रग्स की कमाई का हिसाब जगत केएम संभाल रहा था

जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक इस नेटवर्क में एक अलग व्यक्ति जगत केएम पर बिक्री से हासिल रकम, हवाला लेनदेन और तस्करी से जुड़े अन्य वित्तीय इंतजाम संभाल रहा था। जांच एजेंसी को यह ऐसा नेटवर्क मिला, जिसमें ड्रग्स की खरीद और बिक्री के साथ-साथ कमाई को संभालने के लिए अलग वित्तीय व्यवस्था भी थी। इसी पहलू को ईडी अब पीएमएलए के तहत खंगाल रही है।

तमिलनाडु में ड्रग्स के पैसे से संपत्ति खरीदने का आरोप

तमिलनाडु के एक मामले में ईडी की जांच ने ड्रग्स की कमाई को अचल संपत्तियों में बदलने का रास्ता सामने रखा है। मामला 2023 में शुरू हुआ था, जब एनसीबी ने चेन्नई में एक श्रीलंकाई नागरिक के पास से 2 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद किया। जांच में पता चला कि इस नेटवर्क में हवाला के जरिए ₹8 लाख की अग्रिम रकम भेजी गई थी। बाद में बाकी भुगतान और कमीशन भी इसी माध्यम से किए जाने थे। इसी मामले में एनसीबी ने बाद में 54.600 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद किया। ड्रग्स की कमाई से अर्जित धन से आरोपियों के रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गईं।

कहीं हवाला, कहीं ‘तीसरे व्यक्ति’ के खाते

तमिलनाडु के दूसरे मामले में भी वित्तीय नेटवर्क की अलग तस्वीर सामने आती है। 2024 में एनसीबी ने एक व्यक्ति से 5.970 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद किया था। इसी जांच में ₹39.38 लाख नकद, 586 ग्राम सोना और 1 किलोग्राम चांदी भी जब्त की गई। ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्रग्स के लेनदेन से जुड़ी रकम किन खातों और किन लोगों के जरिए चली। ऐसे मामलों में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक रिकॉर्ड, लेनदेन का ब्योरा, डायरी, पर्चियां, डिजिटल भुगतान और संपत्ति के दस्तावेज महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।

₹5.15 करोड़ खातों में आए, घोषित आय से मेल नहीं

कर्नाटक के मामले में ईडी की जांच एक अलग वित्तीय पैटर्न की ओर इशारा करती है। मृत्युंजय उर्फ जयन्ना के खिलाफ 2007 से 2022 के बीच नौ एनडीपीएस मामले दर्ज होने का उल्लेख दस्तावेज में है। जांच में उसके और उसकी पत्नी के छह बैंक खातों में कुल ₹5.15 करोड़ से अधिक की जमा राशि मिली। इसमें करीब ₹2.39 करोड़ नकद जमा होने का उल्लेख है। इसके अलावा ₹57.17 लाख के संदिग्ध यूपीआई लेनदेन की भी पहचान की गई है। जांच में आठ अचल संपत्तियां भी सामने आईं, जिनकी घोषित कीमत करीब ₹99 लाख थी। ईडी के मुताबिक इन संपत्तियों की खरीद से ठीक पहले खातों में नकद जमा होने का बार-बार पैटर्न मिला। ईडी यह पता लगा रही है कि क्या यह रकम मादक पदार्थों से हासिल आय थी।

ड्रग्स की कमाई को ‘कानूनी आय’ दिखाने का भी आरोप

कर्नाटक मामले में जांच का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। आरोपी की घोषित आय और उसकी संपत्तियों व बैंक लेनदेन के बीच बड़ा अंतर था। कुछ वर्षों में उसने आयकर रिटर्न भी दाखिल नहीं किया था। जांच में उसके इस कथित बयान का उल्लेख है कि उसने अवैध कमाई को “नियमित” दिखाने के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना शुरू किया। इतना ही नहीं, आरोप है कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से गलत रिकॉर्ड और बयान भी जमा किए गए। यह दिखाता है कि मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका सिर्फ नकदी छिपाना नहीं था। अवैध रकम को वैध कमाई का रूप देने की कोशिश भी जांच का हिस्सा है।

तेलंगानाः गांजे की बिक्री से संपत्तियों तक पहुंची रकम

तेलंगाना के मामले में पुलिस ने तीन मामलों में करीब 53.5 किलोग्राम गांजा और ₹67.35 लाख की बेहिसाबी नकदी जब्त की थी। जांच के मुताबिक यह नकदी गांजे की बिक्री से हासिल रकम थी। ईडी के अनुसार मुख्य आरोपी के नाम पर 2021 से 2023 के बीच तीन अचल संपत्तियां खरीदी गईं, जिनकी कुल घोषित कीमत ₹86.78 लाख थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपी की घोषित आय इन संपत्तियों को खरीदने के लिए पर्याप्त नहीं थी। उसका कथित वैध आय स्रोत एक छोटी किराना दुकान थी। ईडी अब यह जांच रही है कि क्या गांजे से अर्जित रकम को अचल संपत्ति में लगाकर वैध संपत्ति के रूप में पेश किया गया।

54 झींगा फार्म तक भी पहुंची ड्रग्स की कमाई

तमिलनाडु के एक अन्य मामले में ड्रग्स की कमाई को वास्तविक संपत्तियों में बदलने का पैमाना और बड़ा है। ईडी के अनुसार आरोपी एम. एलेक्स के परिवार के सदस्यों के नाम पर कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। जुलाई 2024 से मार्च 2025 के बीच परिवार और कुछ कथित तौर पर असंबंधित तीसरे पक्षों के नाम पर सोने के कर्ज लिए गए। ईडी को संदेह है कि इन कर्जों के अंतिम लाभार्थी परिवार के ही सदस्य थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने ड्रग्स की कमाई से करीब 54 झींगा फार्म और कई वाहन खरीदे। ये फार्म नागपट्टिनम, वेलंकन्नी और थलियमाडी इलाकों में बताए गए हैं।

श्रीलंका तक पहुंच रहा था मेथामफेटामाइन का नेटवर्क

तमिलनाडु के कई मामलों में एक और महत्वपूर्ण कड़ी श्रीलंका से सामने आती है। एक मामले में एनसीबी ने श्रीलंकाई नागरिकों से 1.470 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद किया था। जांच के मुताबिक चेन्नई में बरामद नकदी और विदेशी मुद्रा को श्रीलंका भेजी गई मेथामफेटामाइन की बिक्री से जोड़ा गया। एक जगह से ₹1.29 करोड़ से ज्यादा भारतीय मुद्रा, 30,000 अमेरिकी डॉलर और श्रीलंकाई मुद्रा बरामद होने का उल्लेख है। ईडी के अनुसार यह रकम एक ऐसे परिसर से मिली, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर अनधिकृत हवाला लेनदेन के लिए किया जा रहा था।

ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराध से हासिल रकम कितनी थी, किसके पास पहुंची, किसने उसे अपने कब्जे में रखा, किसने ट्रांसफर किया, कहां छिपाया और उससे कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं?

इसलिए तलाशी के दौरान बैंक रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, यूपीआई और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड, लॉकर और अन्य वित्तीय दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि जांच में अपराध से अर्जित रकम और संपत्तियों के बीच संबंध स्थापित होता है तो पीएमएलए के तहत उन संपत्तियों और रकम पर कार्रवाई की जा सकती है।