सीएनजी पंप पर कैमरे की नजर! नंबर प्लेट स्कैन होगी, हाइड्रो टेस्ट वैध नहीं तो नहीं मिलेगी गैस

सीएनजी पंप पर कैमरे की नजर! नंबर प्लेट स्कैन होगी, हाइड्रो टेस्ट वैध नहीं तो नहीं मिलेगी गैस
दिल्ली के 10 सीएनजी स्टेशनों पर इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने स्वचालित वाहन सत्यापन व्यवस्था शुरू की है। कैमरा नंबर प्लेट स्कैन करेगा और PESO ऑनलाइन रिकॉर्ड से हाइड्रो टेस्ट की वैधता चेक की जाएगी। यह एआई तस्वीर है।

— स्नेहलता, तहलकाो

नई दिल्ली । 23 सितंबर, 2026 । दिल्ली में सीएनजी वाहनों की सुरक्षा जांच का तरीका अब बदल रहा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड यानी आईजीएल ने दिल्ली के 10 सीएनजी स्टेशनों पर स्वचालित वाहन सत्यापन व्यवस्था शुरू की है। इस व्यवस्था में स्टेशन पर पहुंचते ही कैमरा वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेगा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली के जरिए वाहन में लगे सीएनजी सिलेंडर के हाइड्रो टेस्ट की वैधता की जांच की जाएगी।

नंबर प्लेट से सिलेंडर के रिकॉर्ड तक होगी जांच

नई व्यवस्था में स्टेशन के प्रवेश पर लगा उच्च क्षमता वाला कैमरा वाहन की नंबर प्लेट को दर्ज करेगा। इसके बाद नंबर प्लेट से मिली जानकारी को प्रणाली वाहन से जुड़े सीएनजी सिलेंडर के रिकॉर्ड से मिलाएगी।

इसके बाद पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन यानी पीईएसओ के ऑनलाइन रिकॉर्ड से सिलेंडर के हाइड्रो टेस्ट की स्थिति की जांच की जाएगी।

अगर सिलेंडर का हाइड्रो टेस्ट वैध नहीं पाया जाता है या उसका प्रमाणपत्र मान्य नहीं है, तो स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी जाएगी और वाहन में सीएनजी भरने से रोका जा सकता है।

आईजीएल की ओर से उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में फिलहाल दिल्ली के 10 सीएनजी स्टेशनों पर इस व्यवस्था की शुरुआत किए जाने की जानकारी है। हालांकि, इन स्टेशनों के नामों की अलग से आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है।

सीएनजी सिलेंडर की सुरक्षा के लिए निर्धारित अंतराल पर हाइड्रोस्टैटिक परीक्षण कराया जाना जरूरी है। वर्ष 2025 में जारी गैस सिलेंडर नियमों में सीएनजी सिलेंडर के लिए हाइड्रोस्टैटिक परीक्षण या हाइड्रोस्टैटिक स्ट्रेच परीक्षण हर तीन साल में कराने का प्रावधान किया गया है।

यह परीक्षण निर्धारित और अनुमोदित परीक्षण केंद्र पर कराया जाता है।

अब कागज के साथ डिजिटल जांच भी

आईजीएल की इस सुरक्षा मुहिम में सिर्फ स्वचालित व्यवस्था ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की ओर से मैनुअल जांच भी जारी है। यानी वाहन मालिकों को हाइड्रो टेस्ट का वैध प्रमाणपत्र अपने पास रखना होगा।

नई व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे सीएनजी वाहनों में गैस न भरी जाए, जिनके सिलेंडर का अनिवार्य सुरक्षा परीक्षण समय पर नहीं हुआ है।

सिस्टम कैसे करेगा काम?

  • गाड़ी सीएनजी स्टेशन पर पहुंचेगी।
  • पहला चरण: कैमरा नंबर प्लेट पढ़ेगा।
  • दूसरा चरण: वाहन की जानकारी रिकॉर्ड से जोड़ी जाएगी।
  • तीसरा चरण: सीएनजी सिलेंडर के हाइड्रो टेस्ट की वैधता जांची जाएगी।
  • चौथा चरण: रिकॉर्ड सही होने पर सामान्य प्रक्रिया से सीएनजी भरी जाएगी।
  • पांचवां चरण: रिकॉर्ड में गड़बड़ी या हाइड्रो टेस्ट की वैधता नहीं मिलने पर स्टेशन कर्मचारियों को अलर्ट किया जाएगा।

अलर्ट हाथ में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, एलईडी स्क्रीन और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के जरिए दिया जा सकता है।

वाहन मालिकों के लिए जरूरी बात

सीएनजी वाहन मालिक अपने सिलेंडर का हाइड्रो टेस्ट समय पर कराएं और उसका वैध प्रमाणपत्र अपने पास रखें। अब सीएनजी स्टेशन पर सिर्फ नंबर प्लेट देखकर वाहन की पहचान नहीं होगी, बल्कि उसी वाहन से जुड़े सिलेंडर के सुरक्षा रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।

यानी सीएनजी भरवाने से पहले अब सवाल सिर्फ गाड़ी का नहीं, सिलेंडर की सुरक्षा का भी होगा।