2022 में मंदिर के बाहर हुए आत्मघाती हमले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज, कट्टरपंथी नेटवर्क आईएसआईएस और कथित फंडिंग तंत्र की पड़ताल में जुटी एजेंसी
एम. रियाज हाशमी

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2022 के कोयंबटूर कार बम विस्फोट मामले में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए चेन्नई, कोयंबटूर, हैदराबाद और मुंबई के 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई आतंकी गतिविधियों के लिए कथित रूप से धन जुटाने और धन शोधन की जांच के तहत की गई। ईडी का दावा है कि जांच में ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि आरोपियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान फर्जी टीकाकरण प्रमाणपत्र बनाकर और एक शैक्षणिक संस्थान के नाम पर चंदा व कथित निवेश जुटाकर आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन एकत्र किया। ईडी ने यह जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकी के आधार पर शुरू की है। एजेंसी फिलहाल आरोपियों के वित्तीय नेटवर्क, धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल की कड़ियों की जांच कर रही है।
23 अक्टूबर 2022 की सुबह ऐतिहासिक संगमेश्वरर मंदिर के बाहर एक कार में विस्फोट हुआ था। कार चला रहा 29 वर्षीय जमीशा मुबीन मौके पर ही मारा गया। प्रारंभिक जांच में कार से गैस सिलेंडर, विस्फोटक सामग्री, रासायनिक पदार्थ और लोहे की कीलें बरामद हुई थीं। बाद में मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया। एनआईए ने अपनी जांच में इसे दुर्घटना नहीं बल्कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से प्रेरित आत्मघाती आतंकी हमला बताया। जांच एजेंसी के अनुसार, जमीशा मुबीन और उसके साथियों ने विस्फोटकों से भरी संशोधित मारुति कार तैयार की थी और मंदिर को निशाना बनाने की साजिश रची थी। एजेंसी का कहना है कि लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही विस्फोट हो जाने से बड़ी जनहानि टल गई।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी इस मामले में अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इनमें जमीशा मुबीन की विस्फोट में मौत हो गई थी, जबकि अन्य आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा चल रहा है। ईडी के अनुसार जांच में आरोपियों द्वारा धन जुटाने के दो प्रमुख तरीके सामने आए हैं।
पहला, कोविड-19 महामारी के दौरान ऐसे लोगों से पैसे लिए गए जो बिना टीका लगवाए प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहते थे। एजेंसी का आरोप है कि इस अवैध कमाई का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण में किया गया। दूसरा, कोवाई अरेबिक कॉलेज के नाम पर चंदा और कथित निवेश के जरिए धन जुटाया गया। ईडी का आरोप है कि यह संस्थान केवल धन संग्रह तक सीमित नहीं था, बल्कि युवाओं के कट्टरपंथीकरण का भी माध्यम बना।
कट्टरपंथी बनाने का भी आरोप: ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि जमीशा मुबीन सहित 12 आरोपी कोवाई अरेबिक कॉलेज से जुड़े ऑनलाइन और ऑफलाइन सत्रों में शामिल हुए थे। इन सत्रों का संचालन कॉलेज के प्रवर्तक जमील बाशा द्वारा किया जाता था। इन सत्रों में युवाओं को सलाफी-जिहादी विचारधारा से प्रभावित किया गया और बाद में उन्होंने आईएसआईएस के समर्थन में आतंकी साजिश रची। राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी अपनी आरोपपत्रों में इस नेटवर्क का उल्लेख कर चुकी है। एजेंसी के अनुसार, सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश की गई।
16 ठिकानों पर क्यों पहुंची ईडी? ईडी फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी टीकाकरण प्रमाणपत्र रैकेट और चंदे के माध्यम से कितना धन जुटाया गया, यह धन किन बैंक खातों और व्यक्तियों तक पहुंचा तथा क्या इसके लिए हवाला या अन्य अवैध वित्तीय माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। इन्हीं वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच के लिए चेन्नई, कोयंबटूर, हैदराबाद और मुंबई में एक साथ छापेमारी की गई।
राजनीतिक घमासान भी तेज होने के आसार: कोयंबटूर विस्फोट तमिलनाडु की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा रहा है। भाजपा लगातार डीएमके सरकार पर कट्टरपंथी नेटवर्क के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाती रही है और इसे कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाती रही है। वहीं, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और डीएमके इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहते रहे हैं कि विस्फोट के बाद राज्य पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की, मामला एनआईए को सौंपा गया और जांच में पूरा सहयोग दिया गया। विधानसभा चुनाव से पहले ईडी की ताजा कार्रवाई से यह मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ सकता है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक किसी प्रमुख राजनीतिक दल की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।



