NEET पर फिर घमासान, पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने PM मोदी से मांगी बड़ी राहत

NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों को NEET से छूट दी जाए और बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला देने की अनुमति मिले।

Former Chief Minister of Tamil Nadu M. K. Stalin. | Image Source: Satya Hindi
Former Chief Minister of Tamil Nadu M. K. Stalin. | Image Source: Satya Hindi

नई दिल्ली: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने NEET परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर कहा कि हाल ही में NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने से यह साफ हो गया है कि मौजूदा परीक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां मौजूद हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने मांग की कि केंद्र सरकार NMC Act 2019 की धारा 14 में बदलाव के लिए अध्यादेश लाए, ताकि 2026-27 सत्र में राज्यों को NEET परीक्षा से छूट मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों को छात्रों को उनकी योग्यता परीक्षा यानी 12वीं के अंकों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश देने की अनुमति दी जानी चाहिए।

अपने पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने कहा कि 3 मई को हुई NEET-UG परीक्षा से पहले एक कथित “गेस पेपर” सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गया था। उनके मुताबिक उस गेस पेपर के कई सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब NEET को लेकर विवाद सामने आया हो। पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने दावा किया कि पहले भी कई बार परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने 2015 के ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी कथित तौर पर बड़े स्तर पर नकल और पेपर लीक का मामला सामने आया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट को पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी।

पूर्व मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने परीक्षा केंद्रों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के कई छात्रों को दूर-दराज राज्यों में परीक्षा केंद्र दिए जाते हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर यात्रा और रहने का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

उन्होंने दावा किया कि NEET को पारदर्शिता और मेरिट के नाम पर लागू किया गया था, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है।