
सीबीआई जांचः CREST के तत्कालीन सीईओ नवनीत श्रीवास्तव पर सरकारी धन के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश का आरोप; पत्नी की कंपनी को मिले थे 95 लाख रुपये, रकम से खरीदी गई अचल संपत्ति
एम. रियाज़ हाशमी। नई दिल्ली
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चंडीगढ़ के चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) के फंड में कथित 75.4 करोड़ रुपये के गबन के मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFoS) अधिकारी नवनीत श्रीवास्तव, उनकी पत्नी की कंपनी विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के डायरेक्टर शामिल हैं।
सीबीआई के मुताबिक, नवनीत श्रीवास्तव उस समय CREST के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) थे। जांच में सामने आया कि उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और सार्वजनिक पद पर रहते हुए CREST के फंड का दुरुपयोग किया तथा इसके बदले अवैध आर्थिक लाभ हासिल किया।
95 लाख रुपये कंपनी को मिले, जिनसे अचल संपत्ति खरीदी
सीबीआई के अनुसार, श्रीवास्तव की पत्नी जिस विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर हैं, वह भी मामले में आरोपी बनाई गई है। कंपनी और उसकी डायरेक्टर पर अपराध में मदद करने और आपराधिक साजिश का हिस्सा बनने के आरोप हैं। जांच में पता चला कि कंपनी को कथित तौर पर धोखाधड़ी की रकम में से 95 लाख रुपये मिले। सीबीआई के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल आगे अचल संपत्ति हासिल करने के लिए किया गया।
सीबीआई की आरोपियों पर कई गंभीर धाराओं में कार्रवाई
सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, साक्ष्य नष्ट करने, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धाराएं लगाई हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018के तहत रिश्वतखोरी, आपराधिक कदाचार और उकसावे से संबंधित प्रावधानों के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई के मुताबिक, इस मामले में कथित तौर पर IDFC फर्स्ट बैंक के खातों से CREST के फंड का दुरुपयोग किया गया।
नवनीत श्रीवास्तव पहले ही गिरफ्तार, अभी न्यायिक हिरासत में
सीबीआई ने बताया कि नवनीत श्रीवास्तव को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं। इस चार्जशीट से पहले सीबीआई इस मामले में 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यानी CREST से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई अब तक कई आरोपियों तक पहुंच चुकी है। मामले में फंड के पूरे ट्रेल का पता लगाने और अन्य आरोपियों की पहचान के लिए जांच जारी है।
75.4 करोड़ का मामला 504 करोड़ के बैंकिंग फ्रॉड से जुड़ा
CREST का मामला चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक शाखा में हुए बड़े बैंकिंग फ्रॉड से जुड़े मामलों की व्यापक जांच का हिस्सा है। सीबीआई के अनुसार, इस बड़े मामले में हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संगठनों से संबंधित करीब 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड को कथित तौर पर फर्जी और अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तथा धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजैक्शन के जरिए निकाल लिया गया था। सीबीआई ने यह मामला हरियाणा सरकार के अनुरोध पर स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो, हरियाणा से अपने हाथ में लिया था। हरियाणा से जुड़े इस मामले में सीबीआई अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
स्मार्ट सिटी और नगर निगम फंड से जुड़े मामले में भी कार्रवाई
सीबीआई ने इसी क्रम में तीसरे मामले को भी अपने हाथ में लिया है। यह मामला स्मार्ट सिटी/चंडीगढ़ नगर निगम से संबंधित है। इस मामले में जांच एजेंसी ने चंडीगढ़ नगर निगम को करीब 78 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीटदाखिल की है। सीबीआई के मुताबिक, तीनों मामले अभी आगे की जांच के अधीन हैं। जांच एजेंसी फंड के पूरे ट्रेल का पता लगाने के साथ-साथ उन अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिनकी कथित भूमिका इन वित्तीय अनियमितताओं में रही हो सकती है। सीबीआई ने कहा है कि वह जिम्मेदार सभी लोगों को न्याय के कटघरे तक लाने और कथित तौर पर दुरुपयोग किए गए सरकारी धन की पूरी मनी ट्रेल तथा अपराध से अर्जित रकम (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का प्रभावी ढंग से पता लगाने के लिए प्रतिबद्ध है।



