तहलका ब्रेकिंग न्यूज़… GMADA में बड़े भ्रष्टाचार की जांच तेजः दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली और लुधियाना में ईडी की व्यापक छापेमारी

GMADA में बड़े भ्रष्टाचार की जांच तेजः दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली और लुधियाना में ईडी की व्यापक छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच में दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली और लुधियाना में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। पंजाब हाउसिंग विभाग के प्रधान सचिव विकास गर्ग के कार्यालय से भी रिकॉर्ड खंगाले गए। यह एआई तस्वीर है।

— एम. रियाज़ हाशमी, तहलका

नई दिल्ली — 22 सितंबर, 2026 — प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) से जुड़े कथित बड़े भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की जांच का दायरा बढ़ाते हुए मंगलवार को दिल्ली, चंडीगढ़, मोहाली और लुधियाना में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया। ईडी के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य अथॉरिटी से जुड़े कई मामलों में महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य जुटाना है। जांच के दायरे में अथॉरिटी की जमीनों की नीलामी तथा बिल्डरों और डेवलपर्स से वसूले जाने वाले ईडीसी (एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेस) और ब्याज में दी गई छूट से जुड़े मामले भी शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान अथॉरिटी कार्यालय के अलावा पंजाब हाउसिंग विभाग के प्रधान सचिव आईएएस विकास गर्ग के कार्यालय से भी संबंधित रिकॉर्ड खंगाले गए। हालांकि, तलाशी के दौरान अब तक कौन-कौन से दस्तावेज, डिजिटल उपकरण या अन्य साक्ष्य बरामद हुए हैं, इसका विस्तृत ब्योरा एजेंसी ने सार्वजनिक नहीं किया है। मोहाली स्थित अथॉरिटी कार्यालय में ईडी टीम के पहुंचने और रिकॉर्ड की जांच शुरू किए जाने की स्वतंत्र रिपोर्ट भी सामने आई है।

नीलामी से लेकर बकाया वसूली और छूट तक जांच

ED की ताजा कार्रवाई का दायरा किसी एक परियोजना या एक बिल्डर तक सीमित नहीं बताया गया है। एजेंसी के अनुसार, जांच में यह देखा जा रहा है कि अथॉरिटी की जमीनों की नीलामी किस प्रक्रिया के तहत हुई, आरक्षित मूल्य कैसे तय हुआ, नीलामी के बाद आवंटियों पर कौन-कौन से भुगतान दायित्व थे और बाद में इन देनदारियों में किस स्तर पर बदलाव अथवा छूट दी गई। बिल्डरों और डेवलपर्स से वसूले जाने वाले ईडीसी और उस पर लगने वाले ब्याज की बड़ी राशि में छूट भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ईडीसी का इस्तेमाल सड़क, सीवर, पानी, ड्रेनेज और अन्य बाहरी विकास सुविधाओं से जुड़ी आधारभूत संरचना के लिए किया जाता है। ऐसे में जांच का एक अहम सवाल यह है कि किस नियम, आदेश अथवा प्राधिकरण के फैसले के तहत बकाया राशि में छूट दी गई और इससे सरकारी खजाने या अथॉरिटी को कितना वित्तीय प्रभाव पड़ा?

₹40 करोड़ की छूट वाला मामला पहले से रडार पर

GMADA से जुड़े मामलों में ताजा कार्रवाई के बीच सेक्टर-62, मोहाली की 1.13 एकड़ फूड कोर्ट साइट से जुड़ा करीब ₹40 करोड़ की देनदारी और दंडात्मक ब्याज की छूट का मामला पहले से ईडी की जांच में है। यह जमीन 2015 में नीलामी के जरिए रेमिगेट बिल्डर्स को आवंटित की गई थी और इसका रिजर्व प्राइस ₹32.50 करोड़ था। बाद में साइट से जुड़ी करीब ₹40 करोड़ की गैर-निर्माण संबंधी देनदारी और दंडात्मक ब्याज को लेकर विवाद सामने आया। पंजाब वित्त विभाग ने भी इस छूट की प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज की थी। अथॉरिटी के रिकॉर्ड में इस मामले को “आवंटन पत्र में संशोधन, दंडात्मक ब्याज की माफी और निर्माण अवधि में विस्तार” से संबंधित प्रस्ताव के रूप में रखा गया था। ईडी ने इस मामले में अथॉरिटी के वर्तमान और पूर्व मुख्य अभियंताओं से रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे थे। जांच में विशेष रूप से 2025 में तैयार इंजीनियरिंग विंग की रिपोर्ट और साइट की व्यवहार्यता से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण बताए गए हैं।

पहले स्वीकार्य, बाद में ‘आंशिक रूप से व्यवहार्य’

फूड कोर्ट साइट मामले में साइट की व्यवहार्यता को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आकलन सामने आए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, तत्कालीन मुख्य अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर साइट को विकास के लिए व्यवहार्य माना गया था। वहीं बाद के इंजीनियरिंग आकलन में इसे “आंशिक रूप से व्यवहार्य” बताया गया। यही अंतर ईडी की जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं में है- क्या 2015 में नीलामी के समय साइट की वास्तविक स्थिति का पर्याप्त आकलन किया गया था और बाद में करीब ₹40 करोड़ की देनदारी तथा दंडात्मक ब्याज माफ करने का आधार क्या था। अगस्त 2026 में ईडी ने GMADA के वर्तमान मुख्य अभियंता अजय गर्ग और पूर्व मुख्य अभियंता सुनील कंसल को इस मामले में दस्तावेजों के साथ तलब किया था।

विकास गर्ग के कार्यालय की तलाशी क्यों महत्वपूर्ण

ईडी की ताजा सूचना में पंजाब हाउसिंग विभाग के प्रधान सचिव विकास गर्ग के कार्यालय की तलाशी का भी उल्लेख है। यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग का GMADA की प्रशासनिक संरचना में महत्वपूर्ण स्थान है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में विकास गर्ग को पंजाब सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग के प्रधान सचिव के रूप में दर्ज किया गया है। हालांकि, किसी अधिकारी का संबंधित विभाग का प्रमुख होना या किसी प्राधिकरण की बैठक में शामिल होना अपने आप में किसी अपराध या अनियमितता में उसकी संलिप्तता साबित नहीं करता। विकास गर्ग की ताजा तलाशी के संबंध में ईडी ने सार्वजनिक रूप से उनकी व्यक्तिगत भूमिका को लेकर कोई निष्कर्ष साझा नहीं किया है।

GMADA से जुड़े कई रियल एस्टेट मामले पहले से जांच में

ईडी की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब एजेंसी पिछले कई महीनों से GMADA से जुड़े अलग-अलग रियल एस्टेट मामलों की जांच कर रही है। इनमें सनटेक सिटी से जुड़े सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) मामले के अलावा चंडीगढ़ रॉयल सिटी ग्रुप और रॉयल एस्टेट ग्रुप से जुड़ी जांच भी शामिल है। चंडीगढ़ रॉयल सिटी मामले में ईडी ने मई 2026 में कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। मामला GMADA को देय करीब ₹32.67 करोड़ की कथित वैधानिक देनदारी और बाउंस हुए चेक से जुड़े आरोपों से भी जुड़ा है। बाद में ईडी ने GMADA से परियोजना से संबंधित सीएलयू, कॉलोनी डेवलपमेंट लाइसेंस और अन्य रिकॉर्ड मांगे थे।

इस पृष्ठभूमि में मंगलवार की बहु-शहरी तलाशी यह संकेत देती है कि ईडी की जांच अब GMADA की जमीनों की नीलामी, बिल्डरों से बकाया वसूली, ईडीसी और ब्याज में छूट तथा संबंधित प्रशासनिक फैसलों के व्यापक दस्तावेजी रिकॉर्ड तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही है। तलाशी से मिले दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य आगे की जांच में क्या भूमिका निभाते हैं, इसका पता ईडी की अगली कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों से चलेगा।