
सुजीत ठाकुर । नई दिल्ली
ब्रिक्स सम्मेलन में Su-57 खरीद पर समझौता संभव
पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन भारत के लिए जरूरी रूस के साथ हो सकता है समझौता
पांचवीं पीढ़ी के फाइटर हासिल करने की दिशा में बड़ी सफलता मिल सकती है
पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन हासिल करने की दिशा में भारत को बड़ी सफलता हासिल हो सकती है। 12-13 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान रूस के साथ इसको लेकर समझौता हो सकता है। साथ ही भारतीय वायुसेना के लगभग 100 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को रूस की तकनीकी मदद से अपग्रेड करने का भी समझौता हो सकता है।
AMCA में 6 साल लग सकते हैं, इस अंतराल के लिए Su-57 की जरूरत
हालांकि भारत पांचवीं पीढ़ी का फाइटर खुद बना रहा है। इस काम में अभी लगभग 6 साल का समय और लग सकता है। लिहाजा इस अंतराल के लिए सुखोई-57 की जरूरत है। चीन स्टेल्थ फाइटर विकसित कर चुका है और पाकिस्तान को भी ऐसा विमान दे रहा है। ऐसे में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हमारे लिए जरूरी है।
19 साल पहले शुरू हुई थी परियोजना, 2018 में भारत अलग हो गया था
भारत पहले भी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर के लिए रूस के साथ काम कर चुका है। लगभग 19 साल पहले परियोजना शुरू हुई थी, लेकिन किसी कारणवश 2018 में भारत इससे अलग हो गया था। लिहाजा रूस एक बार फिर सुखोई-57 का ऑफर भारत को दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि भारत की कोशिश होगी कि सुखोई-57 के संयुक्त उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर समझौता हो सके।
Su-57 की खासियत: टॉप स्पीड 2 मैक, स्टेल्थ डिजाइन, 7500 kg पेलोड
ये है सुखोई-57 की खासियत
-टॉप स्पीड 2 मैक (2470 किलोमीटर प्रति घंटा)
-इसका डिजाइन स्टेल्थ के साथ रफ्तार और तेज मैन्युवर पर ज्यादा जोर होता है
-कॉम्बैट रेंज- 1250 किलोमीटर
-फ्लाइट रेंज-2850 किलोमीटर
-अधिकतम पेलोड- 7500 किलोग्राम
-टेकऑफ वजन-34000 किलोग्राम
अमेरिका के F-35 से 25 फीसदी तेज है Su-57
कुल मिलाकर अमेरिका के एफ-35 लड़ाकू विमान से सुखोई-57 25 फीसदी तेज है।



