
एम. रियाज़ हाशमी । नई दिल्ली
पहलगाम हमला: हाफिज सईद को लाहौर में समन भेजने की तैयारी
कोर्ट में गैरहाजिरी से राह खुली, 26/11 के मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख अब पहलगाम आतंकी हमले में भी कानूनी प्रक्रिया के घेरे में कोर्ट समन भेजने के लिए विदेश मंत्रालय के जरिए कूटनीतिक माध्यम का इस्तेमाल किया जाएगा, पहले पेश होने का मौका, फिर गैरहाजिरी में मुकदमे का रास्ता
NIA की पूरक आरोपपत्र में सईद को LeT और TRF प्रमुख के तौर पर आरोपी बनाया गया
पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना सईद को पहलगाम अटैक के मामले में आरोपी बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू की विशेष अदालत में दाखिल पूरक आरोपपत्र में उसे व्यक्तिगत रूप से और लश्कर-ए-तैयबा तथा उसके सक्रिय मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के प्रमुख के तौर पर आरोपी बनाया है। एजेंसी ने उस पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार आतंकी साजिश से जुड़े आरोप लगाए हैं।
विशेष अदालत ने जारी किया गैर-जमानती वारंट, अब कूटनीतिक चैनल से समन भेजने की तैयारी
विशेष एनआईए अदालत ने सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। अब अगला महत्वपूर्ण कदम यह है कि अदालत का समन पाकिस्तान में उसके ठिकाने तक पहुंचाने की औपचारिक कोशिश की जाए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह प्रक्रिया विदेश मंत्रालय के जरिए कूटनीतिक चैनल से आगे बढ़ाई जा रही है।
समन का कानूनी महत्व: पहले पेश होने का मौका, फिर गैरहाजिरी में मुकदमा
यहां असली कानूनी महत्व समन का है। भारत पहले यह रिकॉर्ड बनाना चाहता है कि आरोपी को अदालत में पेश होने और अपना पक्ष रखने का विधिवत अवसर दिया गया था। यदि वह इसके बावजूद पेश नहीं होता और आगे की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो उसे घोषित अपराधी घोषित करने और फिर उसकी गैरहाजिरी में मुकदमा चलाने का रास्ता खुल सकता है।
BNSS धारा 356: घोषित अपराधी के खिलाफ गैरहाजिरी में जांच, मुकदमा और फैसला
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 356 इसी बिंदु पर महत्वपूर्ण है। यह प्रावधान घोषित अपराधी के खिलाफ उसकी गैरहाजिरी में जांच, मुकदमा और फैसला सुनाने की अनुमति देता है, लेकिन इसके लिए कई अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। मसलन, लगातार दो गिरफ्तारी वारंट, उनके बीच कम से कम 30 दिन का अंतर, सार्वजनिक सूचना और आरोप तय होने के बाद कम से कम 90 दिन की प्रतीक्षा जैसी शर्तें हैं।
पहलगाम और 26/11: सईद के खिलाफ दो अलग कानूनी रिकॉर्ड
इस घटनाक्रम को केवल पहलगाम हमले तक सीमित करके देखना अधूरा होगा। अगस्त 2026 में 26/11 मुंबई हमले के मामले में भी सईद समेत छह पाकिस्तानियों के खिलाफ गैरहाजिरी में मुकदमे की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मुंबई पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक से इस दिशा में कार्रवाई शुरू करने को कहा है। यह बीएनएसएस के तहत इस तरह के बड़े आतंकी मामले में गैरहाजिरी में मुकदमे की पहली प्रमुख मिसाल बन रही है।
प्रत्यर्पण की मांग का जवाब पाकिस्तान ने दिया था मना, अब नई रणनीति
भारत अब केवल पाकिस्तान से सईद का प्रत्यर्पण मांगने तक सीमित नहीं है। दिसंबर 2023 में भारत पाकिस्तान से सईद के प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है, जबकि पाकिस्तान ने जवाब में दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं होने का हवाला दिया था।
नई रणनीति: आरोपी को भारत लाना संभव न हो, तब भी न्यायिक प्रक्रिया न रोके
इन दोनों मामलों को जोड़कर देखें तो भारत की रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है- आरोपी को भारत लाना संभव न हो, तब भी न्यायिक प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए रोका न जाए। हालांकि गैरहाजिरी में मुकदमा अपने आप शुरू नहीं हो सकता और इसे प्रत्यर्पण का विकल्प भी नहीं माना जा सकता। अदालत को यह संतुष्ट होना होगा कि आरोपी जानबूझकर फरार है और निकट भविष्य में उसकी गिरफ्तारी की संभावना नहीं है।
कूटनीतिक महत्व: पाकिस्तान सहयोग करे या न करे, भारत का पक्ष मजबूत होगा
इसका कूटनीतिक महत्व भी है। पाकिस्तान यदि समन स्वीकार करता है तो भारत के प्रयास का आधिकारिक रिकॉर्ड बनेगा; यदि सहयोग नहीं करता, तब भी भारत यह दिखा सकेगा कि उसने उपलब्ध न्यायिक और कूटनीतिक रास्ते अपनाए। यही रिकॉर्ड आगे आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के पक्ष को मजबूत कर सकता है।



