
रिपोर्ट प्रिया तिवारी
भारत की मेजबानी में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई अहम द्विपक्षीय बैठकों पर दुनिया की नजर है। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ होने वाली बातचीत विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मोदी-पुतिन: रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच BRICS के दौरान होने वाली बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश अपनी “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। दोनों नेताओं की हाल के वर्षों में नियमित मुलाकातें हुई हैं।
सितंबर 2025 में तियानजिन SCO शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन ने आर्थिक, ऊर्जा, अंतरिक्ष, सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी। इससे पहले दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेता मिले थे। अगस्त 2026 में मॉस्को में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक भी हुई थी।
आगामी बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उभरती तकनीकों जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठने की उम्मीद है।
मोदी-शी जिनपिंग: रिश्तों में नई गर्माहट की परीक्षा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह 2020 के सीमा विवाद के बाद दोनों नेताओं की संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिशों का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।
मोदी और शी की अक्टूबर 2024 में कज़ान BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। उस बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर जोर दिया था।
इसके बाद अगस्त 2025 में तियानजिन SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं ने मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति का स्वागत किया।
इस बार बातचीत में सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला, आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं।
मोदी-पेजेश्कियन: ईरान और पश्चिम एशिया पर नजर
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठक भी खास महत्व रखती है। दोनों नेताओं की पहली मुलाकात अक्टूबर 2024 में कज़ान BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस समय मोदी ने ईरान का BRICS परिवार में स्वागत किया और चाबहार बंदरगाह, व्यापार, कनेक्टिविटी तथा पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की थी।
इसके बाद दोनों नेताओं की अगस्त 2026 में बिश्केक SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार और कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई।
दिल्ली में होने वाली बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय शांति, चाबहार बंदरगाह, कनेक्टिविटी और भारत-ईरान आर्थिक सहयोग पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है।
क्यों अहम है यह BRICS?
इन तीनों बैठकों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है। संगठन के विस्तार और बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता, वैश्विक दक्षिण की आवाज और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
BRICS के दौरान मोदी-पुतिन, मोदी-शी और मोदी-पेजेश्कियन बातचीत से न केवल भारत के द्विपक्षीय संबंधों को दिशा मिलेगी, बल्कि यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे व्यापक मुद्दों पर भी संकेत मिल सकते हैं।



