BRICS की टेबल पर पहले दिन बड़ा समझौता: ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पारित, मोदी ने दुनिया के बूढ़े हुए इंस्टीट्यूट तंग करने के 10 प्रस्ताव रखे
नई दिल्ली। भारत मंडपम में चल रहे BRICS समिट 2026 की शुरुआत ही बड़े नतीजे के साथ हुई। शनिवार को समिट के पहले दिन सत्र के अंत में सदस्य देशों ने बिना मतभेद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को मंजूरी दे दी। घोषणापत्र पारित करने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा, जिन्होंने अपने समापन भाषण में कहा कि यह दस्तावेज़ सभी साझा संकल्पों को साफ दिशा देता है — अब इन्हें ज़मीनी नतीजों में बदलना सबकी ज़िम्मेदारी है।
‘पुराने इंस्टीट्यूटों से नई दुनिया नहीं चलेगी’
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने सीधे तौर पर कहा कि बदलती दुनिया को पुराने पड़ चुके वैश्विक संस्थानों से नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ की तरफ से वैश्विक शासन में सुधार के संयुक्त 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया, ताकि अगले समिट तक इन्हें BRICS सुधार रोडमैप का रूप दिया जा सके। मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की बातचीत को समय-सीमा और ठोस नतीजों से जोड़ने की ज़रूरत बताई और कहा कि वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में वोटिंग पावर और नेतृत्व आज की आर्थिक हकीकत के हिसाब से होना चाहिए। उनके शब्दों में, ‘विशेषाधिकारों के पिरामिड’ को अब ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा।
तीन बड़े ऐलान: निरंतरता तंत्र, नाविकों का नेटवर्क, 20 साल की यात्रा
शुरुआती सत्र में मोदी ने ‘BRICS निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र’ का प्रस्ताव रखा, जो ‘ट्रोइका’ के ज़रिए हर साल अध्यक्षता बदलने के बावजूद समूह की पहलों को बीच में नहीं रुकने देगा। दूसरा प्रस्ताव ‘सीफेरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ का — संकट के समय देशों के समुद्री अधिकारियों और राजनयिक मिशनों को जोड़कर नाविकों की मदद को तेज़ करने का नेटवर्क।
इस साल BRICS के 20 साल पूरे होने पर नेताओं ने दो स्मारकीय डाक टिकट भी जारी किए। मोदी ने भारत की अध्यक्षता को ‘लोगों पर केंद्रित’ बताते हुए बताया कि इस दौरान 350 से ज़्यादा बैठकें हुईं और करीब 30 शहरों में प्रतिनिधिमंडल आए।




