आगरा: गड्ढे में फंसी एंबुलेंस, ट्रैक्टर से खींचकर निकालने की कहानी; दो घंटे की देरी ने गर्भ में ही छीनी नवजात बच्ची की जान

आगरा (उत्तर प्रदेश): बुरी तरह टूटी गांव की सड़क एक अजन्मे बच्चे की जिंदगी नहीं बचने दे पाई। आगरा जिले के बाह क्षेत्र के गढ़वार गांव में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक महिला को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस रास्ते में सड़क के गहरे जलभरे गड्ढे में जा फंसी। करीब दो घंटे की जद्दोजहद के बाद ग्रामीणों ने ट्रैक्टर की मदद से वाहन खींचकर बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

घटना 3 सितंबर की आधी रात की है

घटना 3 सितंबर की आधी रात की है। गढ़वार निवासी प्रवेंद्र सिंह की 25 वर्षीय पत्नी निधि को तेज प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने रात करीब 1 बजे आपातकालीन एंबुलेंस बुलाई। एंबुलेंस गांव पहुंची भी, लेकिन मुख्य हाईवे से गांव को जोड़ने वाली लिंक रोड पर बरसात से बने एक बड़े गड्ढे में वाहन धंस गया और पूरी तरह अटक गया। ड्राइवर की कोशिशों के बावजूद कीचड़ में फंसे पहिए जमीन से हिले तक नहीं।

ट्रैक्टर से खींची गई एंबुलेंस, देर से पहुंची अस्पताल

सूचना मिलते ही गांव के लोग भागे-भागे मदद के लिए पहुंचे। आखिरकार एक ट्रैक्टर बुलाकर रस्सी से बांधकर एंबुलेंस को गड्ढे से बाहर निकाला गया। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो काफी कीचड़ भरे घंटे लग गए। इसके बाद दूसरे रास्ते से होकर महिला को जैतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा सका, जहां परिवार तड़के करीब सवा तीन बजे पहुंचा।

जांच में डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में पल रही बच्ची पहले ही दम तोड़ चुकी थी। जटिलताओं और इलाज में हुई गंभीर देरी को बच्ची की मौत का बड़ा कारण बताया गया। हालांकि डॉक्टरों ने आपातकालीन सर्जरी कर मां की जान बचा ली और उनकी हालत स्थिर बताई गई।

‘पहले भी हो चुकी थी शिकायत’, अब सीएमओ ने मांगी रिपोर्ट

घटना से गांव में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की खराब हालत को लेकर इससे पहले भी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों तक शिकायत पहुंच चुकी थी, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क करीब छह महीने पहले ही ठीक कराई गई थी और एक मौसम की बारिश में ही उसकी दशा फिर खराब हो गई।

परिवार और ग्रामीणों ने साफ आरोप लगाया है कि अस्पताल समय पर न पहुंच पाने की वजह से ही बच्ची की मौत हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने जैतपुर अस्पताल के अधीक्षक से रिपोर्ट तलब कर जांच के आदेश दे दिए हैं। एंबुलेंस को ट्रैक्टर से खींचते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ है, जिसके बाद प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं।

गढ़वार जैसे गांवों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के दावे के बीच यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि जब रास्ता ही बदहाल हो, तो एंबुलेंस और स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं किस काम की? अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि जांच रिपोर्ट में इस तमाम नाकामी की जिम्मेदारी तय होती है कि नहीं।